ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिथि का अपना ही एक अलग महत्व है। तिथि के आधार पर ही व्रत, त्योहार और शुभ कार्य किए जाते हैं। सही तिथि पर कार्य करने से चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं। वैसे तो हर महीने में 30 तिथि होती हैं क्योंकि एक चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष और प्रत्येक पक्ष में 15-15 तिथियां होती है। दोनों पक्षों में 14 तिथियां समान होती है लेकिन कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि अमावस्या और शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि पूर्णिमा कही जाती है। वहीं हिंदू पंचाग की पहली तिथि प्रतिपदा (Pratipada) होती है। नीचे 2026 में पड़ने वाली प्रतिपदा तिथियों का कैलेंडर प्रस्तुत किया गया है, जिससे व्रत, त्योहार और शुभ कार्यों की योजना बनाना आसान हो सके।
| तिथि और दिन | पक्ष | प्रतिपदा अवधि |
|---|---|---|
| 03 जनवरी 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष | 3:32 PM से 12:30 PM (04 जनवरी 2026) |
| 19 जनवरी 2026, सोमवार | शुक्ल पक्ष | 1:22 AM से 2:14 AM (20 जनवरी 2026) |
| 02 फरवरी 2026, सोमवार | कृष्ण पक्ष | 3:39 AM से 1:52 AM (03 फरवरी 2026) |
| 17 फरवरी 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष | 5:31 PM से 4:58 PM (18 फरवरी 2026) |
| 03 मार्च 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष | 5:07 PM से 4:49 PM (04 मार्च 2026) |
| 19 मार्च 2026, गुरुवार | शुक्ल पक्ष | 6:53 AM से 4:52 AM (20 मार्च 2026) |
| 02 अप्रैल 2026, गुरुवार | कृष्ण पक्ष | 7:41 AM से 8:42 AM (03 अप्रैल 2026) |
| 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार | शुक्ल पक्ष | 5:21 PM से 2:11 PM (18 अप्रैल 2026) |
| 01 मई 2026, शुक्रवार | कृष्ण पक्ष | 10:53 PM से 12:50 AM (03 मई 2026) |
| 17 मई 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष | 1:31 AM से 9:41 PM (17 मई 2026) |
| 31 मई 2026, रविवार | कृष्ण पक्ष | 2:15 PM से 4:37 PM (01 जून 2026) |
| 15 जून 2026, सोमवार | शुक्ल पक्ष | 8:24 AM से 4:31 AM (16 जून 2026) |
| 30 जून 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष | 5:26 AM से 7:38 AM (01 जुलाई 2026) |
| 14 जुलाई 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष | 3:13 PM से 11:51 AM (15 जुलाई 2026) |
| 29 जुलाई 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष | 8:05 PM से 9:30 PM (30 जुलाई 2026) |
| 12 अगस्त 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष | 11:06 PM से 8:42 PM (13 अगस्त 2026) |
| 28 अगस्त 2026, शुक्रवार | कृष्ण पक्ष | 9:48 AM से 9:57 AM (29 अगस्त 2026) |
| 11 सितंबर 2026, शुक्रवार | शुक्ल पक्ष | 8:57 AM से 7:46 AM (12 सितंबर 2026) |
| 26 सितंबर 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष | 10:19 PM से 8:59 PM (27 सितंबर 2026) |
| 10 अक्टूबर 2026, शनिवार | शुक्ल पक्ष | 9:20 PM से 9:31 PM (11 अक्टूबर 2026) |
| 26 अक्टूबर 2026, सोमवार | कृष्ण पक्ष | 9:41 AM से 7:02 AM (27 अक्टूबर 2026) |
| 09 नवंबर 2026, सोमवार | शुक्ल पक्ष | 12:32 PM से 2:00 PM (10 नवंबर 2026) |
| 24 नवंबर 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष | 8:23 PM से 4:50 PM (25 नवंबर 2026) |
| 09 दिसंबर 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष | 6:21 AM से 8:46 AM (10 दिसंबर 2026) |
| 24 दिसंबर 2026, गुरुवार | कृष्ण पक्ष | 6:58 AM से 3:07 AM (25 दिसंबर 2026) |
हिंदू पंचाग की पहली तिथि प्रतिपदा (Pratipada tithi) है, जिसका मतलब होता है मार्ग। इसे हिंदी में परेवा या पड़वा कहते हैं, यह तिथि आनंद देने वाली कही गई है। इस तिथि से चंद्रमा अपनी नयी यात्रा पर निकलता है। प्रतिपदा तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 0 डिग्री से 12 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 181 से 192 डिग्री अंश तक होता है। प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव माने गए हैं। इस तिथि में जन्मे लोगों को अग्निदेव का पूजन अवश्य करना चाहिए।
यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद माह की प्रतिपदा शून्य होती है। वहीं शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। दूसरी ओर कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में शिव का पूजन करना चाहिए।
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य कभी कभार उनके परिवार को ही हानि पहुंचा सकते हैं।
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक धनी, बुद्धिमान और मानसिक रूप से मजबूत होता है। उस पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है।
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मे जातक कभी-कभी गलत संगति में पड़ सकते हैं, जिससे उनके कार्य परिवार के लिए कष्टदायक बन सकते हैं।
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में विवाह, गृह प्रवेश, वास्तु कर्म, उपनयन, चौल कर्म और यात्रा जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा में शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
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