Saraswati Vandana Lyrics: माता की 5 प्रमुख वंदनाएँ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक लाभ

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Saraswati Vandana Lyrics: माता की 5 प्रमुख वंदनाएँ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक लाभ

Saraswati Vandana: जब भी ज्ञान, बुद्धि और कला की बात होती है, तो मां सरस्वती का स्मरण अपने आप हो जाता है। सरस्वती मां को न सिर्फ विद्या की देवी माना जाता है बल्कि आपकी सोच,समझ और रचनात्मकता का प्रतीक भी कहा जाता है। यही कारण है कि पढ़ाई शुरू करने से पहले, किसी नए काम की शुरुआत में या मन की शांति के लिए सरस्वती वंदना करना एक परंपरा बनी हुई है। सरस्वती वंदना सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है। यह आपके अज्ञान को दूर करने और सही दिशा दिखाने का माध्यम है यह सरस्वती वंदना अलग-अलग समय और परंपराओं के अनुसार रची गई हैं। यहां आपको मां सरस्वती की पांच सबसे लोकप्रिय और भावपूर्ण वंदनाओं (Maa Saraswati Vandana) के बारे में जानने को मिलेगा। यहां दी गई वंदना और प्रार्थना में आपको मधुरता और भावों की गहराई भी नज़र आएगी। तो आइए जानें-    

मां सरस्वती की वंदना (Saraswati Vandana Lyrics In Hindi)

यहां मां सरस्वती की आराधना करने के लिए पांच अलग-अलग वंदनाओं के बारे में बताया गया है, साथ ही उनके अर्थ और विशेषताएं भी दी गईं हैं- 

या कुन्देन्दु (Ya Kundendu Saraswati Vandana)

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभि:
देवै: सदा पूजिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्यापहा॥  

जब भी माँ सरस्वती की वंदना (Maa Saraswati Vandana) की बात आती है, तो सबसे पहले “या कुंदेंदु तुषारहार धवला” का नाम अपने आप ज़हन में आ जाता है। 

इस वंदना में माँ सरस्वती के स्वरूप का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। उन्हें कुंद के फूल, चंद्रमा और बर्फ की तरह उज्ज्वल बताया गया है। यानी उनका रूप बिल्कुल शुद्ध, शांत और प्रकाश से भरा हुआ है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता और सरलता का प्रतीक माने जाते हैं। उनके हाथों में वीणा है, जो संगीत, कला और रचनात्मकता का संकेत देती है, और वे श्वेत कमल पर विराजमान हैं, जो ज्ञान और निर्मलता को दर्शाता है। इस श्लोक में यह भी कहा गया है कि ब्रह्मा, विष्णु और शंकर जैसे महान देवता भी माँ सरस्वती की पूजा करते हैं। 

अंत में भक्त उनसे यही प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन से अज्ञान और जड़ता को पूरी तरह दूर कर दें। यानी यह वंदना सिर्फ विद्या की कामना नहीं करती, बल्कि सोच की स्पष्टता और समझ की गहराई भी माँगती है।

क्यों खास है:
इस वंदना की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है। शब्द कम हैं, लेकिन भाव बहुत गहरे हैं। इसे पढ़ते या सुनते ही मन अपने आप शांत होने लगता है। ऐसा लगता है जैसे शोर और उलझन से भरा दिमाग धीरे-धीरे स्थिर हो रहा हो। इसी वजह से इसे स्टूडेंट्स को रोज़ पढ़ने की सलाह दी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए भी जो पढ़ाई या मानसिक काम से जुड़े हैं।

 

सरस्वति नमस्तुभ्यं (Saraswati Vandana for Students) 

सरस्वति नमस्तुभ्यं

वरदे कामरूपिणि।

विद्यारम्भं करिष्यामि

सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

यह वंदना खास तौर पर विद्यार्थियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसके शब्द सीधे और साफ हैं, जिनमें कोई कठिनता नहीं है। इसमें माँ सरस्वती को नमन करते हुए उनसे विद्या और सफलता का आशीर्वाद माँगा गया है।

इस श्लोक में भक्त कहता है कि वह अपनी पढ़ाई या ज्ञान की यात्रा शुरू करने जा रहा है और माँ से प्रार्थना करता है कि उसका प्रयास सफल हो। यहाँ माँ सरस्वती को “वर देने वाली” और “इच्छानुसार रूप धारण करने वाली” कहा गया है, यानी वे हर भक्त की ज़रूरत को समझती हैं।

क्यों खास है:
यह वंदना दिल से जुड़ती है, क्योंकि इसमें कोई घुमावदार बात नहीं है। परीक्षा के समय, नए कोर्स की शुरुआत में या किसी नई सीख की शुरुआत से पहले इसे पढ़ने से विद्यार्थियों के आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में एक भरोसा पैदा होता है।

 

हे शारदे मां (Hey Sharde Maa Saraswati Vandana)

हे शारदे मां, हे शारदे मां
अज्ञानता से हमें तार दे मां

तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे
हर शब्द में है, ये पहचान तुझसे

दे ज्ञान का दीप, जला दे मां
हे शारदे मां, हे शारदे मां

जो ज्ञान हमने पाया है
वो तेरा ही तो साया है

गलत राह से हमें बचा ले मां
हे शारदे मां, हे शारदे मां

 

यह एक आधुनिक सरस्वती वंदना है, जो सरल हिंदी में लिखी गई है। इसके शब्द इतने सहज हैं कि कोई भी आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। यही वजह है कि इसे स्कूल के फंक्शन, संगीत कक्षाओं और समूह प्रार्थनाओं में अक्सर सुना जाता है। 

इस भजन में माँ से अज्ञानता को दूर करने और ज्ञान का दीप जलाने की प्रार्थना की गई है। इसमें यह भाव बहुत सुंदर तरीके से सामने आता है कि जो भी ज्ञान हमें मिलता है, वह माँ की कृपा से ही है।

क्यों खास है:
जो लोग संस्कृत श्लोक नहीं पढ़ पाते, उनके लिए यह वंदना बहुत उपयोगी है। इसके भाव सीधे मन को छूते हैं और भक्ति का अनुभव कराते हैं, बिना किसी कठिन भाषा के।

सरस्वति महाभागे (Saraswati Mahabhage Saraswati Vandana)

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने ।

विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते ॥

यह वंदना बहुत ही कोमल और विनम्र शब्दों में लिखी गई है। इसमें माँ सरस्वती को ज्ञान का साकार रूप माना गया है और उनसे विद्या प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। यहाँ किसी बड़ी उपलब्धि की नहीं, बल्कि सीखने की सच्ची इच्छा की बात की गई है।

क्यों खास है:
इस वंदना को पढ़ते समय मन अपने आप झुक जाता है। यह हमें याद दिलाती है कि ज्ञान माँगते समय अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां (Shuklam Brahma Vicara Sara Saraswati Vandana)

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।

हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥

यह वंदना थोड़ी गूढ़ मानी जाती है, लेकिन इसके भाव बहुत गहरे हैं। इसमें माँ सरस्वती को सिर्फ विद्या की देवी नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान और विवेक की प्रतीक बताया गया है। वे अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाली और निर्भयता देने वाली हैं। 

क्यों खास है:
यह वंदना सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि सही सोच और समझ के लिए भी बहुत प्रभावी मानी जाती है। जो लोग जीवन में स्पष्टता और सही दिशा चाहते हैं, उनके लिए इसके शब्द बहुत प्रेरक हैं।

कैसे करें सरस्वती वंदना ? 

सरस्वती वंदना का असर तब और भी गहरा होता है, जब उसे सही समय और सही भावना के साथ पढ़ा जाए। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि दिन की शुरुआत को सकारात्मक बनाने और मन को एकाग्र करने का सुंदर तरीका भी है। आइए जानते हैं कि इन सरस्वती वंदनाओं को कब पढ़ना सबसे अच्छा माना जाता है।

दैनिक वंदना पाठ
अगर आप चाहते हैं कि दिन की शुरुआत शांति और स्पष्ट सोच के साथ हो, तो रोज़ सुबह स्नान के बाद किसी एक सरस्वती वंदना का पाठ करें। इससे मन हल्का रहता है और पूरे दिन काम करने की ऊर्जा मिलती है। ज़रूरी नहीं कि हर दिन लंबी पूजा हो, श्रद्धा के साथ दो मिनट का पाठ भी काफी होता है।

पढ़ाई करने से पहले
विद्यार्थियों के लिए सरस्वती वंदना का विशेष महत्व है। किताब खोलने से पहले या स्कूल जाने से पहले इसे पढ़ने से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। यह एक तरह से मन को पढ़ाई के लिए तैयार करता है और भटकाव कम करता है।

बसंत पंचमी पर
वसंत पंचमी माँ सरस्वती को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन पूजा के दौरान सभी पाँचों सरस्वती वंदनाओं का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। खासतौर पर विद्यार्थी इस दिन किताबों और कलम की पूजा भी करते हैं।

स्कूल की प्रार्थना सभा में
भारत के ज़्यादातर स्कूलों में सुबह की सभा की शुरुआत सरस्वती वंदना से होती है। खासकर “या कुंदेंदु” वंदना को सामूहिक रूप से गाया जाता है, जिससे बच्चों में अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

इन पांचों वंदनाओं में कहीं सरलता है, कहीं गहराई, तो कहीं भावनाओं की मधुरता। आप अपनी सुविधा और आस्था के अनुसार किसी एक वंदना को रोज़ पढ़ सकते हैं या विशेष अवसरों पर सभी का पाठ कर सकते हैं। ज़रूरी यह नहीं कि कितनी वंदनाएँ पढ़ी जाएँ, बल्कि यह है कि उन्हें पूरे मन और श्रद्धा के साथ पढ़ा जाए।

जब हम सच्चे मन से माँ सरस्वती को याद करते हैं, तो धीरे-धीरे हमारे भीतर धैर्य, एकाग्रता और सीखने की इच्छा जागने लगती है। यही माँ सरस्वती की कृपा है, जो हमें बेहतर सोचने, समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। 

अगर आप पढ़ाई या करियर को लेकर परेशान हैं तो आप एस्ट्रोयोगी के विशेषज्ञ ज्योतिषियों से संपर्क कर सकते हैं। आपके लिए पहली कॉल या चैट बिलकुल फ्री है। 

 

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