क्या आपने कभी सोचा है कि कई लोग पूरी तरह योग्य और सक्षम होने के बावजूद भी शादी में बार-बार रुकावटों का सामना क्यों करते हैं? भारतीय समाज में विवाह सिर्फ दो व्यक्तियों का साथ नहीं, बल्कि दो परिवारों और उनकी संस्कृतियों का संगम माना जाता है। हर कोई चाहता है कि उसका विवाह सही समय पर और अच्छे माहौल में हो, लेकिन हकीकत यह है कि कई बार किस्मत या परिस्थितियां इसमें बाधा बन जाती हैं। समाज इसे कभी भाग्य का खेल कह देता है, तो कभी परिवारिक कारणों को जिम्मेदार ठहरा देता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र मानता है कि विवाह में देरी का बड़ा कारण ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और कुंडली में मौजूद दोष भी हो सकते हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर कौन-से ज्योतिषीय कारण विवाह में रुकावट डालते हैं और कौन-से उपाय अपनाकर इस समस्या को दूर किया जा सकता है।
विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण
1. अशुभ ग्रहों की दृष्टि
कुंडली में विवाह के प्रमुख कारक ग्रह—शुक्र, बृहस्पति और मंगल माने जाते हैं।
यदि ये ग्रह अशुभ भावों (षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव) में हों तो विवाह में अड़चनें आती हैं।
इन ग्रहों पर यदि राहु, केतु या शनि जैसे क्रूर ग्रहों की दृष्टि हो, तो विवाह का योग बार-बार टलता है।
विशेषकर शुक्र का कमजोर होना व्यक्ति के विवाह योग को प्रभावित करता है।
2. दोषपूर्ण ग्रह योग
कई बार कुंडली में कुछ विशेष दोष विवाह में बाधा उत्पन्न करते हैं।
मांगलिक दोष (मंगल दोष): जब मंगल ग्रह 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो, तो विवाह में बाधा आती है।
कालसर्प दोष: राहु-केतु के बीच सभी ग्रहों के फंस जाने से बना यह योग भी विवाह में देरी करवाता है।
गुरु चांडाल योग: जब बृहस्पति पर राहु या केतु की युति या दृष्टि हो, तो विवाह में विलंब होता है।
3. ग्रहों का कमजोर होना
शुक्र का कमजोर होना वैवाहिक जीवन की खुशियों को प्रभावित करता है।
बृहस्पति का कमजोर होना लड़कियों के विवाह में देरी करवाता है।
मंगल का कमजोर होना विवाह के बाद के जीवन में अस्थिरता पैदा करता है।
4. सप्तम भाव पर प्रभाव
कुंडली का सातवां भाव (विवाह भाव) विवाह से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है।
यदि इस भाव में पाप ग्रह बैठे हों या इसकी दृष्टि अशुभ ग्रहों पर हो, तो विवाह में बाधाएं आती हैं।
सप्तम भाव के स्वामी ग्रह का नीच राशि में होना या शत्रु ग्रहों से प्रभावित होना भी विवाह में देरी का कारण बनता है।
5. दशा और अंतरदशा का प्रभाव
कुंडली में जब सप्तम भाव या विवाह से जुड़े ग्रहों की प्रतिकूल दशा-अंतरदशा चल रही हो, तो विवाह का योग बनने के बावजूद बार-बार टलता है।
ज्योतिष शास्त्र केवल कारण बताने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके समाधान भी मौजूद हैं। इन उपायों को सच्ची श्रद्धा और आस्था से किया जाए तो सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
1. व्रत और पूजा का महत्व
शुक्रवार का व्रत: जो लोग विवाह में देरी से परेशान हैं, उन्हें शुक्रवार का व्रत करना चाहिए। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और विवाह का मार्ग प्रशस्त होता है।
शुक्रवार के दिन 11 कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें उपहार देना भी लाभकारी माना जाता है।
2. बृहस्पति मंत्र का जप
लड़कियों के विवाह में यदि बाधा आ रही हो तो बृहस्पति को मजबूत करना जरूरी है।
रोजाना सुबह स्नान कर के पीले वस्त्र पहनें।
बृहस्पति बीज मंत्र "ॐ ब्रीम बृहस्पतये नमः" का 108 बार जप करें।
यह उपाय बृहस्पति ग्रह की स्थिति को मजबूत कर विवाह योग को सशक्त बनाता है।
3. शनिवार के उपाय
शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल या तिल्ली के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पीपल के पेड़ के चारों ओर सात बार परिक्रमा कर प्रार्थना करने से शनि ग्रह की पीड़ा कम होती है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
4. रत्न धारण करना
रत्न ग्रहों की शक्ति को बढ़ाने का एक असरदार माध्यम है।
शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए: ओपल या हीरा धारण किया जा सकता है।
बृहस्पति को मजबूत करने के लिए: पीला पुखराज (येलो सैफायर) धारण करना शुभ माना जाता है।
रत्न हमेशा किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद ही धारण करना चाहिए।
5. ग्रहों के बीज मंत्र
विवाह में बाधा झेल रहे लड़कों के लिए: "ॐ शुं शुक्राय नमः" मंत्र का जप करना शुभ है।
विवाह में देरी झेल रही लड़कियों के लिए: "ॐ ब्रीम बृहस्पतये नमः" का जप करना लाभकारी है।
इन मंत्रों का नियमित जप ग्रहों की स्थिति को सुधारता है।
6. शिवलिंग का अभिषेक
सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, शहद और बेलपत्र चढ़ाना विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है।
खासकर कुंवारी लड़कियां यह उपाय करें तो उन्हें शीघ्र ही अच्छा वर प्राप्त हो सकता है।
विवाह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जब इसमें देरी होती है तो व्यक्ति और परिवार दोनों ही तनावग्रस्त हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र हमें यह समझने में मदद करता है कि ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति हमारे जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डालती है। विवाह में देरी के कारण चाहे ग्रह हों या परिस्थितियां, ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर इस समस्या को दूर किया जा सकता है।