गंगाजल

गंगाजल

सावन का पवित्र महिना चल रहा है और साथ ही चल रहा है कांवड़ यात्रा का दौर, हर साल लाखो की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल को कांवड़ के माध्यम से लाते हैं। हिंदु धर्म की मान्यताओं का अनुसरण करने के कारण लगभग हर हिंदु के घर में गंगा जल मिलेगा। आखिर क्या महत्व है गंगा जल का, क्यों पूज्यनीय है।

आईए जानते हैं, गंगा नदी के कुछ खास पहलूं

 

धार्मिक कारण

हिंदु धर्म में गंगा नदि को सब नदियों से पवित्र माना जाता है। और इसको एक पूज्यनीय स्थान भी सनातन धर्म में दिया गया है। इसी कारण से हिंदुओ द्वारा अपने घर में गंगा जल रखा जाता है। इस गंगा जल का इस्तेमाल घर में होने वाले सभी तरह के धार्मिक अनुष्ठानों मे किया जाता है। सावन के महिने में गंगा नदी से कांवड़ द्वारा लाए गए गंगा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, जो अत्यधिक फलदायक होता है। हिंदु समाज में जन्म संस्कार से लेकर मृत्युं तक गंगा जल का इस्तेमाल किया जाता है। इंसान की सामान्य मृत्यु होने पर उसके मुख में गंगा जल डाला जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र जल सभी पापों और बुरे विचारों का नाश कर तन मन को पवित्र करता है।

पौराणिक महत्व

हिंदु धर्म पुराणों नें भी गंगा को पवित्र और दैविय नदी कहा है। सनातन धर्म के लगभग सभी पौराणों में गंगा का जिक्र किया गया है। मान्यताओं के अनुसार गंगा भगवान शिव के शीश पर विराजमान रहती थी। किसी वक्त में भागीरथ नामक राजा नें भगवान शिव की तपस्या करके उन्हे प्रसन्न किया और उनसे गंगा को पृथ्वी पर भेजने का अनुग्रह किया, जिसके बाद गंगा इस धरती पर अपनी पवित्र धारा के साथ उतरी।

वैज्ञानिक शोध

गंगा जल पर किए गए वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि गंगा जल वैज्ञानिक दृष्ठी से भी सभी नदियों के जल से अधिक महत्वपूर्ण है। गंगा जल को किसी भी पात्र में कितने भी दिन रख लो ये कभी खराब नही होता। मतलब ना तो इसमें काई लगती है और ना ही किसी प्रकार के किटाणु इसमें पैदा होते हैं।

कीटाणुओं को मारने की क्षमता

शौधों से पता चला है की गंगा की बालू में तांबा, क्रोमियम और सूक्ष्म मात्रा में रेडियोधर्मी थोरियम अन्य दूसरी नदियों की तुलना में कई गुना अधिक है। इन तत्वों में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है. ये तत्व गंगा नदी में पानी द्वारा पत्थरों की रगड़ से उत्पन्न होते हैं। शौंधो से यह भी पता चलता है कि गंगा के पानी में एक कालिफाज नामक लाभकारी कीटाणु पाया जाता है , यह कीटाणु सभी हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करके गंगा के जल को साफ करता है। इसके साथ साथ लखनऊ के नेशनल बॉटेनिकल इंस्टीट्यूट ने अपने रिसर्च से ये निष्कर्ष निकाला की गंगा के पानी में बीमारी पैदा करने वाले ई कोलाई बैक्टीरियां का मारने की क्षमता होती है। गंगा जल में ये चमत्कारी गुण इसकी तलहटी या सतह पर मौजूद रहते हैं। वैज्ञानिकों नें गंगा जल के साथ हानिकारक बीमारियों के कीटाणुओ का प्रयोग करके देखा तो पाया कि गंगा जल के प्रभाव से सभी कीटाणु समाप्त हो गए।

आक्सीजन सोखने की शक्ति

आईआईटी रुड़की में पर्यावरण विज्ञान के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर देवेंद्र स्वरुप भार्गव का कहना है गंगा के पानी में वातावरण से आक्सीजन सोखने की अद्भूत क्षमता होती है और इसके साथ साथ दूसरी नदियों की अपेक्षा गंगा नदि में गंदगी को नष्ट करने की क्षमता 15 से 20 प्रतिशत ज्यादा है।

घर में कैसे रखें गंगा जल

गंगा जल को घर में रखने के लिए ध्यान रहे की इसे प्लास्टिक के किसी बर्तन में सहेज कर ना रखे। गंगा जल को रखने के लिए पीतल, कांसे, तांबे या चांदी के बर्तन में रखने से इसकी गुणवत्ता और महता बरकरार रहती है। गंगाजल को हमेशा पूजा स्थान पर रखना ही धार्मिक नीयमों के अनुसार सही प्रक्रिया है।

एस्ट्रो लेख
कब है सुहागिनों का त्यौहार करवाचौथ? जानिए तिथि, मुहूर्त, महत्व, कथा एवं व्रत नियम।

कब है सुहागिनों का त्यौहार करवाचौथ? जानिए तिथि, मुहूर्त, महत्व, कथा एवं व्रत नियम।

मंगल का तुला राशि में गोचर, जानें आपके लिए राशि परिवर्तन कितना मंगलकारी?

मंगल का तुला राशि में गोचर, जानें आपके लिए राशि परिवर्तन कितना मंगलकारी?

दशहरा 2021 - जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व एवं इससे जुड़ी परंपराओं के बारे में।

दशहरा 2021 - जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व एवं इससे जुड़ी परंपराओं के बारे में।

शारदीय नवरात्रि 2021 में करें माँ दुर्गा को प्रसन्न। क्यों विशेष है ये नवरात्रि?

शारदीय नवरात्रि 2021 में करें माँ दुर्गा को प्रसन्न। क्यों विशेष है ये नवरात्रि?

chat Support Chat now for Support
chat Support Support