आश्विन - आश्विन मास के व्रत व त्यौहार

हिंदू पंचांग के अनुसार साल के सातवें महीने को आश्विन महीना कहा जाता है। ये भाद्रपद के बाद और कार्तिक माह से पहले आता है। हिंदू कैलेंडर में हर महीना किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। जैसे- सावन शंकर का महीना होता है, भादो को श्रीकृष्ण का माह माना जाता है उसी प्रकार अश्विनी माह को देवी दुर्गा का माह माना जाता है। इस माह में ही पितरों के श्राद्ध् का विधान है और शारदीय नवरात्रि भी इस माह में ही संपन्न होती हैं। अश्विनी मास 2019 में 15 सितंबर से शुरु हो रहा है और 13 अक्टूबर तक रहेगा। आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि, दशहरा, शरद पूर्णिमा जैसे तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। 

 

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अश्विन माह के कुछ विशेष व्रत और पर्व

पितृपक्ष

भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाले पितृपक्ष का समापन आश्विन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को होता है। इन श्राद्ध के 16 दिनों में पितरों को शांत करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए उनका तर्पण और पिंडदान किया जाता है। हिंदू धर्म में आश्विन कृष्ण अमावस्या को पितरों की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।  

 

शारदीय नवरात्रि (29 सितंबर- 7 अक्टूबर)

भारतवर्ष में हर साल 4 बार नवरात्र मनाई जाती है लेकिन आमतौर पर लोग साल में चैत्र और शारदीय नवरात्र को सबसे ज्यादा मनाते हैं। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष से होती है और विजयादशमी से इसका समापन होता है। नवरात्रि में भक्तगण 9 दिन तक व्रत रखते हैं और देवी दुर्गा की विधि पूर्वक उपासना करते हैं। 

 

विजयादशमी (दशहरा)

शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इस विजय की खुशी में ही विजयादशमी मनाए जाने का प्रावधान है। दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। इस दिन सैन्यबल में शस्त्रों का पूजन करने का प्रावधान है। इस बार विजयादशमी 8 अक्टूबर 2019 को मनाई जा रही है।   

 

पापकुंशा एकादशी

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापकुंशा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पाने के लिए मनाए जाने का प्रावधान है। मान्यता है कि जब किसी की बुद्धि फिरती है तो वह व्यक्ति पाप के शिखर पर पहुंच जाता है और जब उसे एहसास होता है तब तक देर हो चुकी होती है। ऐसे में उसे पश्चाताप करने का भी अधिकार नहीं होता है। ऐसे लोगों के लिए पापकुंशा एकादशी सच्ची भावना के साथ पश्चाताप करने का महापर्व है। 2019 में पापकुंशा एकादशी 9 अक्टूबर को मनाई जा रही है।

 

शरद पूर्णिमा 

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाए जाने का प्रावधान है। इस पूर्णिमा की रात्रि को चांदनी रात में रखी खीर को सुबह भोग लगाने का विशेष महत्व है। इसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से संपुर्ण होकर अपनी किरणों से रातभर अमृत की वर्षा करता है। मान्यता है कि पूर्णिमा की रात्रि को धन की देवी मां लक्ष्मी धरतीलोक पर आती हैं और वह भ्रमण करती हैं और उन्हें जो लोग जागरण करते हुए मिलते हैं उन पर कृपा बरसाती हैं। इस वर्ष 13 अक्टूबर 2019 को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। 

 

वाल्मीकि जयंती 2019

विश्व विख्यात रामायण ग्रन्थ के रचियता महर्षि वाल्मीकि का जन्म आश्विन मास की शरद पूर्णिमा को हुआ था। वाल्मीकि के जन्मदिन को वाल्मीकि जंयती के रूप में मनाया जाता है। इस साल 13 अक्टूबर 2019 को वाल्मीकि जयंती मनाई जा रही है। 

 

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