Skip Navigation Links
दुर्गा विसर्जन 2017 - कैसे करें दुर्गा माँ की प्रतिमा का विसर्जन


दुर्गा विसर्जन 2017 - कैसे करें दुर्गा माँ की प्रतिमा का विसर्जन

नवरात्री के समापन के उपरान्त दशमी तिथि पर माँ दुर्गा की प्रतिमा को समुन्द्र में या किसी भी सरोवर में विसर्जित किया जाता है| कुछ क्षेत्रों में भक्त नवमी तिथि में ही विसर्जन कर देते हैं| दुर्गा विसर्जन 2017 के समय की जाने वाली पूजा की भी अपनी एक विधि होती है| नवरात्री की पूजा-आराधना से भिन्न विसर्जन के समय घाट पर भी कुछ विशेष बातों की ओर ध्यान देना चाहिए| इस वर्ष दुर्गा विसर्जन 30 सितंबर को किया जाएगा|

विसर्जन पूजा विधि

कन्या पूजन के पश्चात एक पुष्प एवं चावल के कुछ दाने हथेली में लें और संकल्प लें|

घट यानि कलश में स्थापित नारियल को प्रसाद स्वरूप स्वयं भी ग्रहण करें और परिजनों को भी दें|

घट के पवित्र जल का पूरे घर में छिडकाव करें और फिर सम्पूर्ण परिवार इसे प्रसाद स्वरुप ग्रहण करें|

घट में रखें सिक्कों को अपने गुल्लक में रख सकते हैं, बरकत होती है|

सुपारी को भी परिवार में प्रसाद रूप में बांटें|

माता की चौकी से सिंहासन को पुनः अपने घर के मंदिर में उनके स्थान पर ही रख दें|

श्रृंगार सामग्री में से साड़ी और जेवरात आदि को घर की महिला सदस्याएं प्रयोग कर सकती हैं|

श्री गणेश की प्रतिमा को भी पुनः घर के मंदिर में उनके स्थान पर रख दे|

चढ़ावे के तौर पर सभी फल, मिष्ठान्न आदि को भी परिवार में बांटें|

चौकी और घट के ढक्कन पर रखें चावल एकत्रित कर पक्षियों को दें|

माँ दुर्गे की प्रतिमा अथवा तस्वीर, घट में बोयें गए जौ एवं पूजा सामग्री, सब को प्रणाम करें और समुन्द्, नदी या सरोवर में विसर्जित कर दें|

विसर्जन के पश्चात एक नारियल, दक्षिणा और चौकी के कपडें को किसी ब्राह्मण को दान करें|

शुभ मुहूर्त     

दुर्गा विसर्जन तिथि - 30 सितंबर 2017

दुर्गा विसर्जन शुभ तिथि - प्रातः 06:17 बजे से 08:38

दशमी तिथि प्रारंभ - रात्रि 23:49 से (29 सितंबर 2017)

दशमी तिथि समाप्त - रात्रि 01:28 बजे तक (01 अक्टूबर 2017)

एस्ट्रोयोगी के सभी पाठकों और माँ दुर्गा के उपासकों को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं| आपका जीवन मंगलमय हो|




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

शनि परिवर्तन 2017 – किस पर लगेगी ढ़ैय्या तो किसकी पार लगेगी नैय्या?

शनि परिवर्तन 2017 ...

शनि जिन्हें कर्मफलदाता, न्यायप्रिय, दंडाधिकारी आदि अनेक नामों से जाना जाता है। जिन्हें राशिचक्र की मकर व कुंभ राशियों का स्वामी माना जाता है।...

और पढ़ें...
छठ पूजा 2017 - छठ पूजा व्रत विधि और शुभ मुहूर्त

छठ पूजा 2017 - छठ ...

वर्ष में दो बार छठ का महोत्सव पूर्ण श्रद्धा और आस्था से मनाया जाता है| पहला छठ पर्व चैत्र माह में तो दूसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है| चैत...

और पढ़ें...
तुला राशि में बुध - उच्च राशि कन्या से बुध के परिवर्तन का क्या होगा असर?

तुला राशि में बुध ...

ज्योतिषशास्त्र में बुध ग्रह को विवेक यानि ज्ञान का कारक माना जाता है। लेखन व प्रकाशन के क्षेत्र से भी इनका संबंध माना जाता है। बुध ग्रह अक्सर...

और पढ़ें...
कन्या राशि में मंगल – क्या होगा असर आपकी राशि पर?

कन्या राशि में मंग...

मेष एवं वृश्चिक राशियों के स्वामी मंगल क्रूर ग्रहों में से एक माने जाते हैं। मंगल जहां किसी का मंगल कर सकते हैं वहीं भारी अमंगल की आशंका भी उ...

और पढ़ें...
नीच राशि में शुक्र का गोचर - किस पर पड़ेगा भारी?

नीच राशि में शुक्र...

शुक्र जिन्हें वीनस यानि सुंदरता की देवी कहा जाता है। जो दैत्यों के गुरु भी माने जाते हैं, जिन्हें राशि चक्र की दो राशियों वृषभ व तुला का स्वा...

और पढ़ें...