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दुर्गा विसर्जन - कैसे करें दुर्गा माँ की प्रतिमा का विसर्जन


दुर्गा विसर्जन - कैसे करें दुर्गा माँ की प्रतिमा का विसर्जन

नवरात्री के समापन के उपरान्त दशमी तिथि पर माँ दुर्गा की प्रतिमा को समुन्द्र में या किसी भी सरोवर में विसर्जित किया जाता है| कुछ क्षेत्रों में भक्त नवमी तिथि में ही विसर्जन कर देते हैं| दुर्गा विसर्जन के समय की जाने वाली पूजा की भी अपनी एक विधि होती है| नवरात्री की पूजा-आराधना से भिन्न विसर्जन के समय घाट पर भी कुछ विशेष बातों की ओर ध्यान देना चाहिए| इस वर्ष दुर्गा विसर्जन 11 अक्टूबर को किया जाएगा|


विसर्जन पूजा विधि

  • कन्या पूजन के पश्चात एक पुष्प एवं चावल के कुछ दाने हथेली में लें और संकल्प लें|
  • घट यानि कलश में स्थापित नारियल को प्रसाद स्वरूप स्वयं भी ग्रहण करें और परिजनों को भी दें|
  • घट के पवित्र जल का पूरे घर में छिडकाव करें और फिर सम्पूर्ण परिवार इसे प्रसाद स्वरुप ग्रहण करें|
  • घट में रखें सिक्कों को अपने गुल्लक में रख सकते हैं, बरकत होती है|
  • सुपारी को भी परिवार में प्रसाद रूप में बांटें|
  • माता की चौकी से सिंहासन को पुनः अपने घर के मंदिर में उनके स्थान पर ही रख दें|
  • श्रृंगार सामग्री में से साड़ी और जेवरात आदि को घर की महिला सदस्याएं प्रयोग कर सकती हैं|
  • श्री गणेश की प्रतिमा को भी पुनः घर के मंदिर में उनके स्थान पर रख दे|
  • चढ़ावे के तौर पर सभी फल, मिष्ठान्न आदि को भी परिवार में बांटें|
  • चौकी और घट के ढक्कन पर रखें चावल एकत्रित कर पक्षियों को दें|
  • माँ दुर्गे की प्रतिमा अथवा तस्वीर, घट में बोयें गए जौ एवं पूजा सामग्री, सब को प्रणाम करें और समुन्द्, नदी या सरोवर में विसर्जित कर दें|
  • विसर्जन के पश्चात एक नारियल, दक्षिणा और चौकी के कपडें को किसी ब्राह्मण को दान करें|


शुभ मुहूर्त     

  • दुर्गा विसर्जन तिथि                :             11 अक्टूबर 2016, मंगलवार
  • दुर्गा विसर्जन शुभ तिथि             :           प्रातः 06:23 बजे से 08:41
  • दशमी तिथि प्रारंभ                 :             प्रातः 22:53 से, 10 अक्टूबर
  • दशमी तिथि समाप्त               :             प्रातः 22:28 बजे तक, 11 अक्टूबर


एस्ट्रोयोगी के सभी पाठकों और माँ दुर्गा के उपासकों को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं| आपका जीवन मंगलमय हो|




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