गंगा सप्तमी – इस दिन गंगा मैया बनीं थी जाह्नवी

गंगा मात्र एक नदी नहीं है बल्कि आस्था की देवी हैं किसानों के लिये प्राण दायिनी हैं। यह सवाल तो आज भी रहस्य है कि उद्योग कारखानों की रसायनों और गंदगी को अपने में समा लेने के बाद भी इसकी पवित्रता बरकरार कैसे हैं? जब किसी रहस्य का पता न चले तो उसे चमात्कार कहा जा सकता है। गंगा का यही रहस्य इस नदी को देवी गंगा बनाता है। इसी की बदौलत लोगों की इसमें गहरी आस्था भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं गंगा जी को एक बार एक ऋषि ने पूरा का पूरा गटक लिया था, फिर देवताओं के अनुरोध और भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर उन्होंने गंगा मैया को मुक्त किया ताकि वह भगीरथ के पूर्वजों को मुक्ति प्रदान कर सके। जिस दिन गंगा मैया को ऋषि ने मुक्त किया वह दिन था वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी का। इसलिये इस दिन को गंगा सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। आइये जानते हैं वैशाख शुक्ल सप्तमी को घटे इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जिसकी गवाही पुराण देते हैं।

गंगा सप्तमी पर ज्योतिषीय उपाय जानने के लिये एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।

 

महर्षि जाहनु पी गये थे सारी गंगा का पानी

अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिये भगीरथ ने कड़ा तप कर गंगा मैया को पृथ्वी पर लाने में कामयाबी मिल गई थी। भगवान शिव ने अपनी जटा में लपेट कर गंगा के अनियंत्रित प्रवाह को नियंत्रित तो कर लिया लेकिन बावजूद उसके भी गंगा मैया के रास्ते में आने वाले बहुत से वन, आश्रम नष्ट हो रहे थे। चलते-चलते वह जाहनु ऋषि के आश्रम में पंहुच गई जब जाह्नु ऋषि ने गंगा द्वारा मचाई तबाही को देखा तो वे बहुत क्रोधित हुए और गंगा के सारे पानी को पी गये। भगीरथ को अपना प्रयास विफल दिखाई देने लगा। वह जाह्नु ऋषि को प्रसन्न करने के लिये तप पर बैठ गये। देवताओं ने भी महर्षि से अनुरोध कर गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने के महत्व के बारे में बताया। अब जाह्नु ऋषि का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने अपने कान से गंगा मुक्त कर दिया। मान्यता है कि इसी कारण गंगा को जाहन्वी भी कहा जाता है। जिस दिन उन्होंने गंगा को अपने कान से मुक्त किया वह दिन था वैशाख मास की शुक्ल सप्तमी का। इसलिये इसे गंगा सप्तमी और जाह्नु सप्तमी भी कहा जाता है।  

 

गंगा सप्तमी पर क्या करें

गंगा सप्तमी एक प्रकार से गंगा मैया के पुनर्जन्म का दिन है इसलिये इसे कई स्थानों पर गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है। यदि गंगा मैया में स्नान करना संभव न भी हो तो गंगा जल की कुछ बूंदे साधारण जल में मिलाकर उससे स्नान किया जा सकता है। स्नानादि के पश्चात गंगा मैया की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं। भगवान शिव की आराधना भी इस दिन शुभ फलदायी मानी जाती है। इसके अलावा गंगा को अपने तप से पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ की पूजा भी कर सकते हैं।  गंगा पूजन के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी फल मिलता है। 

सबंधित लेख

गंगा दशहरा – इस दिन गंगा स्नान से कटेंगें दस पाप   |   गंगा मैया देती हैं जीवात्मा को मोक्ष   |   इस दिन गंगाजल बनता है अमृत   |   

गंगा चालीसा   |   गंगा आरती   |   गौ माता    |   गायत्री मन्त्र   |   गीता सार

 

2019 में कब है गंगा सप्तमी?

इस वर्ष  गंगा सप्तमी 11 मई को है। सप्तमी के दिन स्नान व पूजा का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा।

गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त - 10:58 से 13:38 बजे तक

सप्तमी तिथि आरंभ - 21:41 (10 मई 2019)

सप्तमी तिथि समाप्त - 19:44 (11 मई 2019)

 

एस्ट्रो लेख

प्रदोष व्रत 2019

इस व्रत को उत्तर भारत में प्रदोष वर्त तथा दक्षिण भारत में प्रदोषम के नाम से जाना जाता है। व्रत में भगवान शिव की स्तुति की जाती है। मान्यताओं कि माने तो शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदो...

और पढ़ें ➜

भविष्यफल 2020 -...

नया साल हर किसी के लिए एक नई उमंग, नया उत्साह और नई-नई योजनाएं लेकर आता है। नये साल के साथ हर किसी को नई उम्मीद भी जुड़ी होती है। आमतौर पर नए साल को लेकर लोग जीवन में दुख के दिन दू...

और पढ़ें ➜

बुध का वृश्चिक ...

इस 05 दिसंबर को बुध सुबह10 बजकर 46 मिनट पर राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। इस समय बुध तुला राशि में हैं परंतु 05 दिसंबर 2019 को यह राशि बदलकर वृश्चिक राशि में आ जाएंगे। जिसका आपके ऊ...

और पढ़ें ➜

स्कंद षष्ठी 201...

यदि आपके घर में कोई बहुत लंबे समय से बीमार है? आपको हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है? कड़ी मेहनत के बाद भी आपके संतान को सफलता नहीं मिलती है तो आपको हर माह हिंदू कैलेंडर के अनुसार. ...

और पढ़ें ➜