घटस्थापना के साथ शुरू होगी नवरात्रि, ऐसे करें मां का स्वागत

16 अक्तूबर 2020

घटस्थापना नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। हमारे शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और इसे गलत समय स्थापित करने पर देवी दुर्गा रुष्ट भी हो सकती हैं। घटस्थापना अमावस्या और रात के समय करना निषिद्ध है। यदि आप मंत्रों के साथ स्थापना करना चाहते हैं तो आप किसी अनुभवी ज्योतिषी की मदद से विधि पूर्वक कर सकते हैं। 

 

घटस्थापना शुभ मुहूर्त गणना

घटस्थापना करने का सबसे शुभ समय प्रतिपदा के दिन प्रातकाल होता है। यदि कुछ कारणों की वजह से यह समय उपलब्ध नहीं होता है तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है। घटस्थापना के दौरान नक्षत्र चित्रा और वैधृति योग से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन वे निषिद्ध नहीं हैं। विचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक यह है कि घटस्थापना हिंदू परपंरा में दोपहर से पहले की जाती है जबकि प्रतिपदा प्रचलित है।

 

शारदीय नवरात्री 2020 घटस्थापना मुहूर्त

इस बार शारदीय नवरात्रि 2020 के पहले दिन कलश स्थापना के दौरान तुला राशि का चंद्रमा, चित्रा नक्षत्र, करण किस्तुन रहेगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। घट स्थापना के लिए आपके पास 7 तरह के अनाज, मिट्टी का बर्तन, मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र और लाल पुष्प होने चाहिए। 

 

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना के लिए पूजा सामग्री

  • सात तरह के अनाज बोने के लिए चौड़ा मिट्टी का बर्तन

  • अनाज बोने के लिए स्वच्छ मिट्टी

  • सात तरह के अनाज के बीज

  • छोटा मिट्टी का कलश

  • पवित्र गंगाजल

  • पवित्र धागा या कोलावा

  • इत्र 

  • सुपारी

  • कलश में डालने के लिए सिक्के

  • अशोक या आम क पेड़ के 5 पत्ते

  • कलश को ढकने के लिए ढक्कन

  • कच्चे साबुत चावल यानि अक्षत

  • कच्चा नारियल

  • लाल वस्त्र

  • गुलमोहर का फूल 

  • दूर्वा घास 

 

शारदीय  घटस्थापना विधि

  • सबसे पहले मिट्टी के बर्तन को साफ कर लें और उसमें सात तरह के अनाज को रखें।

  • अब कलश में जल भरें और उसके गर्दन पर कलावा बांधकर उसे मिट्टी के बर्तन के ऊपर रख दें।

  • अब कलश की गर्दन पर कलावा बाँधें और इसे पवित्र पानी यानि गंगा जल से गर्दन तक भरें। 

  • पानी में सुपारी, इत्र, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्का डालें।

  • अशोक के 5 पत्तों को कलश के किनारे पर ढक्कन से ढक कर रखें।

  • अब बिना नारियल लें और उसे लाल कपड़े के अंदर लपेट दें।

  • नारियल और लाल कपड़े को पवित्र धागे से बांधें।

  • अब कलश के ऊपर नारियल को रखें। 

  • अंत में कलश को मिट्टी के बर्तन के बीचोंबीच स्थापित करें।

  • अब हमारे पास कलश है जो देवी दुर्गा का आह्वान करने के लिए तैयार है।

मंत्र

गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!

नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु।।

 

नवरात्रि में 9 दिनों उपवास रखने वाले भक्तों को इस मंत्र के साथ पूजा का संकल्प करना चाहिए। 

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्राह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे(अपने नगर या गांव का नाम लें), अमुकनामसम्वत्सरे आश्विनशुक्लप्रतिपदे अमुकवासरे प्रारभमाणे नवरात्रपर्वणि एतासु नवतिथिषु

अखिलपापक्षयपूर्वक-श्रुति-स्मृत्युक्त-पुण्यसमवेत-सर्वसुखोपलब्धये संयमादिनियमान् दृढ़ं पालयन् अमुकगोत्रः

अमुकनामाहं भगवत्याः दुर्गायाः प्रसादाय व्रतं विधास्ये।

 

यदि आप इस मंत्र का जाप नहीं कर पा रहे हैं तो आप, "यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः कार्य सिद्धयर्थं कलशाधिष्ठित देवता सहित, श्री दुर्गा पूजनं महं क​रिष्ये।" कह सकते हैं।

 

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