Skip Navigation Links
केमद्रुम योग - क्या आपकी कुंडली में है केमद्रुम योग ? जानें ये उपाय


केमद्रुम योग - क्या आपकी कुंडली में है केमद्रुम योग ? जानें ये उपाय

आपने कुंडली के ऐसे योगों के बारे में जरुर सुना होगा जिनमें व्यक्ति राजा तक बन जाता है। निर्धन व्यक्ति भी धनवान बन जाता है। ऐसे योग भी जरुर देखें होंगें जिनमें रातों रात जातक प्रसिद्धि पा जाते हैं। मंझे हुए कलाकार बन जाते हैं। या फिर एक सरकारी नौकरी पाकर एक सुरक्षित जीवन व्यतीत करते हैं लेकिन कुछ ऐसे योग भी हैं जिन्हें योग की बजाय दोष कहना उचित होता है। ऐसा ही एक योग है केमद्रुम योग।

केमद्रुम योग वाले जातक जीवन में निर्धनता के लिये अभिशप्त होते हैं। कुछ जातकों की कुंडली में तो यह इतना प्रबल हो सकता है कि उनकी मृत्यु के बाद अत्येंष्टि तक में भारी दिक्कतें आती हैं। आइये जानते हैं क्या है यह केमद्रुम योग और किन परिस्थितियों में बनता है यह अशुभ फल दायी और कब इसमें मिल सकते हैं शुभ फल?


कब बनता है केमद्रुम योग


जब जातक की कुंडली में चंद्रमा अकेला हो और उसके अगल-बगल अन्य भावों में कोई ग्रह न हो तो इस स्थिति में केमद्रुम योग बनता है। लेकिन इसी स्थिति में जब चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न पड़ रही हो और वह स्वयं नीच का हो, पापी व क्रूर ग्रह उसे देख रहे हों तो यह बहुत ही अशुभ फल देने वाला योग बन जाता है। इस तरह के योग में जन्में जातक को दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर होना पड़ता है। कई बार तो भीख मांगकर जीवन यापन करने तक की नौबत जातक पर आन पड़ती है अन्यथा तंगहाली में तो उसे बशर करना ही पड़ता है।

हालांकि कुछ ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि जब चंद्रमा के आगे पीछे के भावों में शुभ ग्रह न हों या चंद्रमा से दूसरे और द्वादश भाव में कोई भी ग्रह न हो तो इस स्थिति में बनने वाले केमद्रुम योग के अशुभ प्रभावों को कुछ उपायों से कम किया जा सकता है। यह योग दरअसल व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करने की क्षमता एवं ताकत प्रदान करने वाला हो सकता है। कुछ उपायों को अपनाकर जातक भाग्य का निर्माण कर सकता है। लेकिन यह तय है कि इस योग में उत्पन्न हुये जातक को दरिद्रता का दंश झेलना पड़ता है, उसे वैवाहिक और संतान पक्ष का सुख भी प्राप्त नहीं हो पाता। परिजनों को भी ऐसे जातक का सुख नहीं मिल पाता, कुछ जातकों के स्वभाव में तो हद दर्जे की धृष्टता भी मिलती है।


भंग भी हो जाता है केमद्रुम योग


ज्योतिष शास्त्र में कुछ भी असंभव नहीं है और बात अगर भाग्य की हो तो कहा जाता है कि किसी का भाग्य पलटने में देर नहीं लगती। ऐसा ही केमद्रुम योग के बारे में भी है। कुछ ऐसी विशेष दशाएं भी जातक की कुंडली में बनती हैं जिनमें केमद्रुम योग के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं बल्कि कई बार तो तो बिल्कुल समाप्त होकर शुभ फल देने वाले हो जाते हैं।

ऐसा तब होता है जब कुंडली में लग्न से केंद्र में चंद्रमा या कोई ग्रह हो तो केमद्रुम अप्रभावी हो जाता है। चंद्रमा सभी ग्रहों से दृष्ट हो या चंद्रमा शुभ स्थान में हो या चंद्रमा के शुभ ग्रहों से युक्त हो या फि पूर्ण चंद्रमा लग्न में हो अथवा दसवें भाव में उच्च का हो अन्यथा केंद्र में पूर्ण बली हो तो भी केमद्रुम योग भंग हो जाता है। सुनफा अनफा या दुरुधरा योग यदि कुंडली में बन रहे हों तो भी केमद्रुम योग भंग माना जाता है। चंद्रमा से केंद्र में अन्य ग्रह के होने पर भी केमद्रुम योग के अशुभ प्रभाव भंग हो जाते हैं।


केमद्रुम योग - अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय


केमद्रुय योग के अशुभ प्रभावों को आप जान चुके हैं जाहिर है आप भी इन अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय के बारे में सोच रहे होंगे तो यहां आपको बता रहे हैं केमद्रुम योग के अशुभ प्रभावों से बचने के कुछ आसान से उपाय।

कहते हैं शिव का तात्पर्य ही कल्याण होता है इसलिये भगवान भोलनाथ यानि भगवान शिवशंकर की पूजा करने से बहुत लाभ मिलता है। साथ ही सोमवार को चित्रा नक्षत्र के समय से लगातार चार वर्ष तक पूर्णिमा उपवास करें तो इससे भी केमद्रुम योग के अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है। घर में दक्षिणावर्ती शंख स्थापित कर नियमित रूप से श्री सूक्त का पाठ करना भी इसमें लाभ देता है। भगवान शिव के साथ-साथ माता लक्ष्मी की स्तुति भी विशेष रूप से लाभकारी होती है। लेकिन ऐसा करने में परेशानी यह हो सकती है कि कहीं आप मंत्रोच्चारण सही तरीके से न कर पायें तो, या फिर आपको पूजा की विधि ही ज्ञात न हो इसलिये हमारी सलाह है कि इसके लिये ज्योतिषशास्त्र में पारंगत किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य की सहायता लें। देश-भर के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करने के लिये आप एस्ट्रोयोगी की सहायता ले सकते हैं। आपको करना सिर्फ इतना है कि इस लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। अब आप आसानी से ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। अगर आप अभी रजिस्ट्रेशन करते हैं तो एस्ट्रोयोगी की ओर से 100 रुपये आपके एस्ट्रोयोगी अकाऊंट में एड होंगे।


संबंधित लेख

कुंडली में कालसर्प दोष और इसके निदान के सरल उपाय   |   पंचक - क्यों नहीं किये जाते इसमें शुभ कार्य?

राहु और केतु ग्रहों को शांत करने के सरल उपाय   |   क्या आपके बने-बनाये ‘कार्य` बिगड़ रहे हैं? सावधान ‘विष योग` से

पितृदोष – पितृपक्ष में ये उपाय करने से होते हैं पितर शांत   |   चंद्र दोष – कैसे लगता है चंद्र दोष क्या हैं उपाय




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

माँ चंद्रघंटा - नवरात्र का तीसरा दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा विधि

माँ चंद्रघंटा - नव...

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नामचंद्रघंटाहै। नवरात्रि उपासनामें तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह कापूजन-आरा...

और पढ़ें...
माँ कूष्माण्डा - नवरात्र का चौथा दिन माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा विधि

माँ कूष्माण्डा - न...

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था, तब द...

और पढ़ें...
दुर्गा पूजा 2017 – जानिये क्या है दुर्गा पूजा का महत्व

दुर्गा पूजा 2017 –...

हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा की जाती है उत्सव मनाये जाते हैं। उत्त...

और पढ़ें...
जानें नवरात्र कलश स्थापना पूजा विधि व मुहूर्त

जानें नवरात्र कलश ...

 प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रे आते है। पहले नवरात्रे चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि ...

और पढ़ें...
नवरात्र में कैसे करें नवग्रहों की शांति?

नवरात्र में कैसे क...

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मां दुर्गा की आराधना का पर्व आरंभ हो जाता है। इस दिन कलश स्थापना कर नवरात्रि पूजा शुरु होती है। वैसे ...

और पढ़ें...