राधा अष्टमी 2020 - राधा को प्रसन्न करने से मिलती है श्री कृष्ण की कृपा

24 अगस्त 2020

जब बात प्रेम की होती है तो सबसे पहले नाम राधा-कृष्ण का आता है। लोग आज भी अमर प्रेम की दास्तान में राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण को ही याद करते हैं। कहा भी जाता है कि अगर आप श्रीकृष्ण की कृपा पाना चाहते हैं तो आपको राधाजी की पूजा करनी होगी। राधारानी के पूजन के बिना कृष्ण की कृपा मिल ही नहीं सकती है, क्योंकि भगवान कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी राधारानी कही जाती हैं, इसलिए राधाजी की कृपा पाने का सबसे पवित्र पर्व राधाष्टमी के अलावा कौन सा हो सकता है?  यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 26 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा।

 

बरसाने में मनाई जाती है धूमधाम से राधाष्टमी 

 

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष राधाष्टमी का पर्व उत्तर प्रदेश के बरसाना में धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना को राधाजी का जन्मस्थान माना जाता है, जो कि पहाड़ी से ढलाऊ हिस्से में बसा है। इस पहाड़ी को ब्रह्मा पर्वत कहा जाता है। इस तिथि पर ब्रह्मा पर्वत पर स्थित गहवर वन की श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। वृंदावन में भी यह उत्सव बडे़ ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, रावल और मांट के राधा रानी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तो तांता लगा रहता है। 

 

राधाष्टमी पर श्रीकृष्ण और राधा को प्रसन्न करने के सरल ज्योतिषीय उपाय जानने के लिये एस्ट्रोयोगी पर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें।  
 

 

राधारानी का जन्म

 

पौराणिक कथा के अनुसार इस तिथि में राधाजी का जन्म हुआ था। पद्मपुराण के अनुसार राधारानी को राजा वृषभानु और रानी कीर्ति की संतान बताया गया बल्कि कथानुसार, एक बार राजा वृषभानु यज्ञ के लिए भूमि की सफाई कर रहे थे तब उन्हें भूमि पर पुत्री के रूप में राधाजी मिली थी। कहा जाता है कि राधाजी भगवान श्रीकृष्ण से 11.5 महीने बड़ी थी। उन्होंने पहली बार कान्हा को उनके पालने में झूलते हुए देखा था। कहा जाता है कि वह बचपन में ही वयस्क हो गई थी।

 

राधाष्टमी व्रत विधि

 

राधाष्टमी का विधिपूर्वक पूजन करने के लिए सबसे पहले प्रातकाल स्नानादि के बाद निवृत्त हो जाए। अपराह्म के समय राधारानी की पूजा करना श्रेष्ठ समय होता है। इस दिन पूजास्थल को 5 रंगों के मंडप से सजाएं, फिर कमलयंत्र बनाएं और कमल के बीचोबीच दिव्यासन पर श्री कृष्ण की पश्चिमाभिमुख वाली मूर्ति को विराजित करें। इसके बाद राधा रानी को पंचामृत से अभिषेक कराएं और फिर उनका ऋंगार करें। अभिषेक कराने के बाद उन्हे मंडप के भीतर मंडल के बीच मिट्टी या तांबे का शुद्ध बर्तन रखें। उस पर 2 वस्त्रों से ढकी हुई राधाजी की धातु की बनी हुई प्रतिमा को स्थापित करें। इसके पश्चात्  पुष्पमाला, वस्त्र, पताका और विभिन्न प्रकार के मिष्ठानों से राधारानी की स्तुति करें। राधाष्टमी के दिन व्रत रखने का भी प्रावधान है। अष्टमी के दूसरे दिन विवाहित स्त्रियों को भोजन कराएं और नवमी के दिन मूर्ति दान करने के बाद स्वयं पारण करें। कहा जाता है कि इस दिन मंदिरों में 27 पेड़ों की पत्तियों और 27 ही कुंओं का जल इकठ्ठा करना और भी अधिक शुभ माना गया है।

 

क्यों नहीं हुई राधा-कृष्ण की शादी? 

 

आमतौर पर जनसाधाऱण के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि श्रीकृष्ण और राधारानी ने एक-दूसरे से विवाह क्यों नहीं किया था? इसको लेकर कई तरह की पौराणिक कथाएं प्रचलति हैं। एक कथानुसार राधाजी की शादी पहले भगवान श्रीकृष्ण से तय हुई थी लेकिन राधारानी के पिता ने अपने मित्र उग्रपत को वचन दिया था कि वह अपने जीवन में एक बार उनसे मन चाहा कुछ भी मांग सकते हैं। राजा उग्रपत ने वृषभानु से राधा का हाथ अपने पुत्र अयन के लिए मांगा था। राजा वृषभानु वचन से बंधे हुए थे यदि  वह वचन को तोड़ते तो उन्हें बरसाना छोड़कर जाना पड़ता। राजा वृषभानु ने अपने राधाजी की खुशी के लिए बरसाना छोड़ने का निर्णय कर लिया लेकिन जब राजा उग्रपत की पत्नी जटिला को जब पता चलता है कि वृषभानु ने वचन तोड़ दिया है तो वह क्रोधित होती हैं और राधारानी के पास जाकर उन्हें माता-पिता के बरसाना छोड़ने का आरोपी बताती हैं। जब इस वचन के बारे में भगवान कृष्ण को पता चलता है तो श्रीकृष्ण बरसाना छोड़कर चले जाते हैं। वहीं श्रीधर के श्राप की वजह से राधा रानी और श्रीकृष्ण को 100 सालों तक विरह की अग्नि में जलना पड़ा ता। इस श्राप की वजह से भगवान कृष्ण और राधाजी की शादी नहीं हो पाई थी। 

 

राधाष्टमी 2020 शुभ मुहुर्त

 

इस बार राधाष्टमी का पर्व 26 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा।

अष्टमी तिथि का प्रारंभ- रात्रि 24:21 बजे (25 अगस्त 2020) से
अष्टमी तिथि का अंत- सुबह10:39 बजे (26 अगस्त 2020) तक

 

यह भी पढ़ें

कृष्ण जन्माष्टमी: कृष्ण भगवान की भक्ति का त्यौहार | गीता सार | राधावल्लभ मंदिर वृंदावन | सावन के बाद आया, श्रीकृष्ण जी का माह ‘भादों‘ । श्री कृष्ण चालीसा | कुंज बिहारी आरती | बांके बिहारी आरती | बुधवार - युगल किशोर आरती | श्री कृष्ण जन्माष्टमी

एस्ट्रो लेख

KKR vs RR - कोलकाता नाइट राइडर्स vs राजस्थान रॉयल्स का मैच प्रेडिक्शन

CSK vs KXIP - चेन्नई सुपर किंग्स vs किंग्स इलेवन पंजाब का मैच प्रेडिक्शन

कार्तिक मास 2020 - पवित्र नदी में स्नान औऱ दीपदान का महीना

RCB vs SRH - रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर vs सनराइजर्स हैदराबाद का मैच प्रेडिक्शन

Chat now for Support
Support