Rohini Vrat: जानें 2022 में कब-कब है रोहिणी व्रत और इससे जुड़ी मान्‍यताएं

bell icon Tue, Jul 19, 2022
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
कब-कब है रोहिणी व्रत 2022 में? जानें

रोहिणी व्रत जैन धर्म के लोगों का प्रमुख व्रत है जो जैनी महिलाओं एवं पुरुष द्वारा किया जाता है। साल 2022 में कब है रोहिणी व्रत? कब और किस मुहूर्त में करें रोहिणी व्रत की पूजा? जानने के लिए पढ़ें।  

वैदिक ज्योतिष में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक रोहिणी नक्षत्र है जिसको समर्पित होता है रोहिणी व्रत (Rohini Vrat)। इस व्रत को बहुत ही शुभ एवं पावन माना गया है। रोहिणी व्रत की महत्ता मुख्य रूप से जैन धर्म के लोगों में है और इस दिन व्रत का पालन महिलाओं द्वारा किया जाता है। जैन समाज की स्त्रियों द्वारा रोहिणी व्रत का पालन किया जाता है। 

जून 2022 में कब है रोहिणी व्रत?

  • रोहिणी व्रत जून 2022 शुभ मुहूर्त  
  • वैशाख मास का रोहिणी व्रत 27 जून 2022, सोमवार को रखा जाएगा.
  • रोहिणी व्रत प्रारंभ: 26 जून 2022 दोपहर 01:06 बजे
  • रोहिणी व्रत का समापन: 27 जून 2022 शाम 04:02 बजे

जैन धर्म के पुरुषों और स्त्रियों द्वारा रोहिणी व्रत को किया जाता है। पंचांग के अनुसार, हर माह आने वाले रोहिणी व्रत को तब करने का रिवाज़ है जब रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय के बाद प्रबल होता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। हर 27 दिनों में रोहिणी व्रत को मनाया जाता है, एक वर्ष की अवधि में लगभग 23 से 13 रोहिणी व्रत होते हैं। 

कैसे किया जाता है रोहिणी व्रत?

  1. रोहिणी व्रत का आरम्भ तब होता है जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र आकाश में उदित होता है। इस व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करती हैं। 
  2. इसके पश्चात महिलाएं भगवान वासुपूज्य की पूजा करती हैं, साथ ही बेहतर स्वास्थ्य और धन-समृद्धि से पूर्ण अपने पतियों को लंबे एवं सुखी जीवन की कामना के लिए प्रार्थना करती हैं। 
  3. इस दिन मंत्रों का जाप करना और रोहिणी व्रत की कथा पढ़ना या सुनना भी रोहिणी व्रत की पूजा विधि का हिस्सा है। पूजा समाप्त होने के बाद, महिलाएं व्रत का पालन करते हुए पूरा दिन बिना कुछ खाए-पिए रहती हैं। 
  4. कई महिलाएं रोहिणी व्रत के दिन गरीबों को भोजन और भिक्षा भी देती हैं। मृगशीर्ष नक्षत्र के उदय के साथ उपवास का समापन हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और दुख दूर हो जाते हैं।

2022 में रोहिणी नक्षत्र समय के साथ रोहिणी व्रत की तिथियां 

जनवरी रोहिणी व्रत 2022

  • 14 जनवरी 2022,शुक्रवार 
  • प्रारंभ: 13 जनवरी 2022 शाम 05:07 बजे
  • समाप्त: 14 जनवरी 2022 रात 08:18 बजे

फरवरी रोहिणी व्रत 2022

  • 10 फरवरी 2022, गुरुवार
  • प्रारंभ: 10 फरवरी 2022 रात 00:23 बजे
  • समाप्त: 11 फरवरी 2022 रात 03:32 बजे

मार्च रोहिणी व्रत 2022

  • 10 मार्च 2022, गुरुवार
  • प्रारंभ: 09 मार्च 2022 सुबह 08:31 बजे
  • समाप्त: 10 मार्च 2022 सुबह 11:30 बजे

अप्रैल रोहिणी व्रत 2022

  • 06 अप्रैल 2022, बुधवार
  • प्रारंभ: 05 अप्रैल 2022 शाम 04:52 बजे
  • समाप्त: 06 अप्रैल 2022 शाम 07:40 बजे

मई रोहिणी व्रत 2022

  • 03 मई 2022, मंगलवार
  • प्रारंभ: 03 मई 2022 रात 00:34 बजे
  • समाप्त: 04 मई 2022 रात 03:18 बजे
  • 31 मई 2022, मंगलवार
  • प्रारंभ: 30 मई 2022 सुबह 07:12 बजे
  • समाप्त: 31 मई 2022 सुबह 10:01 बजे

जून रोहिणी व्रत 2022

  • 27 जून 2022, सोमवार
  • प्रारंभ: 26 जून 2022 दोपहर 01:06 बजे
  • समाप्त: 27 जून 2022 शाम 04:02 बजे

जुलाई रोहिणी व्रत 2022

  • 24 जुलाई 2022, रविवार
  • प्रारंभ: 23 जुलाई 2022 शाम 07:03 बजे
  • समाप्त: 24 जुलाई 2022 रात 11:00 बजे

अगस्त रोहिणी व्रत 2022

  • 20 अगस्त 2022, शनिवार 
  • प्रारंभ: 20 अगस्त 2022 रात 01:53 बजे
  • समाप्त: 21 अगस्त 2022 सुबह 04:40 बजे

सितंबर रोहिणी व्रत 2022

  • 17 सितंबर 2022,शनिवार
  • प्रारंभ: 16 सितंबर 2022 सुबह 09:55 बजे
  • समाप्त: 17 सितंबर 2022 दोपहर 12:21 बजे

अक्टूबर रोहिणी व्रत 2022

  • 14 अक्टूबर 2022, शुक्रवार
  • प्रारंभ: 13 अक्टूबर 2022 शाम 06:41 बजे
  • समाप्त: 14 अक्टूबर 2022 रात 08:47 बजे

नवंबर रोहिणी व्रत 2022

  • 10 नवंबर 2022, गुरुवार
  • प्रारंभ: 10 नवंबर 2022 रात 03:09 बजे
  • समाप्त: 11 नवंबर 2022 सुबह 05:08 बजे

दिसंबर रोहिणी व्रत 2022

  • 08 दिसंबर 2022,गुरुवार
  • प्रारंभ: 07 दिसंबर 2022 सुबह 10:25 बजे
  • समाप्त: 08 दिसंबर 2022 दोपहर 12:33 बजे

क्या है जैन धर्म में रोहिणी व्रत का महत्व?

रोहिणी व्रत जैन समुदाय में आस्था रखने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में जैनी महिलाएं उपवास रखती हैं। इस व्रत का उद्देश्य पतियों के लिए लंबी और सुखी जीवन की कामना करना है। यह व्रत रखने वाली महिलाओं के पति के लिए ही नहीं, बल्कि रोहिणी व्रत उनके परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

इस व्रत का पालन केवल परिवार की महिलाओं तक ही सीमित नहीं है,बल्कि अन्य सदस्य भी रोहिणी व्रत को कर सकते हैं। रोहिणी व्रत को जितनी अवधि के लिए महिलाएं करना चाहती हैं, वह उनकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन इस व्रत को तीन, पांच या सात साल तक करना किसी भी दूसरी अवधि की तुलना में फायदेमंद होता है। 

ऐसी मान्यता है कि पांच साल पांच महीने तक उपवास रखने से व्रत रखने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है। उपवास की अवधि समाप्त होने के बाद, व्रत का समापन उद्यापन के साथ करना चाहिए। रोहिणी व्रत के दिन जैन देवता वासुपूज्य की पूजा की जाती है। 

रोहिणी व्रत की सही पूजा-विधि के बारे में जानने के लिए, अभी बात करें एस्ट्रोयोगी पर वैदिक ज्योतिषाचार्यों से। 

✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी

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