सकट चौथ – इस दिन श्री गणेश दिलाते हैं संकटों से मुक्ति

भगवान गणेश जिन्हें हर कार्य के प्रारंभ में पूजा जाता है। जिन्हें हर जन मंगलकारी मानता है। इन्हीं भगवान श्री गणेश की आराधना का दिन होता संकष्टी चतुर्थी। वैसे तो हर चंद्र मास में दो चतुर्थी आती हैं। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को ही संकष्टी चतुर्थी कहते हैं व शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भाद्रपद माह में आने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। पूरी दुनिया में भगवान गणेश का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाता है।

संकष्टी चतुर्थी को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम से भी जाना जाता है। उत्तर भारत में माघ माह की संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। तो दक्षिण भारत में गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी भी कहा जाता है।

क्या है मान्यता

संकष्टी का तात्पर्य है संकट से मुक्ति। लोगों की मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश सारे दुखों, सारे संकटों का हरण कर लेते हैं। संकष्टी चतुर्थी यदि मंगलवार के दिन हो तो अंगारकी चतुर्थी कहलाती है जो कि बहुत ही शुभ मानी जाती है।

कब रखें व्रत

वैसे तो हर माह संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है लेकिन सबसे मुख्य संकष्टी चतुर्थी पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार माघ महीने में पड़ती है। वहीं अमांत पंचांग के अनुसार पौष महीने की चतुर्थी को सबसे मुख्य संकष्टी चतुर्थी माना जाता है।

व्रत की विधि

संकष्टी चतुर्थी का व्रत महाराष्ट्र व तमिलनाडु में विशेष रूप से अधिक प्रचलित है। इस दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखा जाता है। इसमें केवल फल, कंदमूल व वनस्पति उत्पादों का ही सेवन किया जाता है। साबूदाना खिचड़ी, आलू व मूंगफली आदि श्रद्धालुओं का आहार होते हैं। चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उपवास तोड़ा जाता है।

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