Skip Navigation Links
सूर्य ग्रहण 2018 - 2018 में कब लगेगा सूर्य ग्रहण?


सूर्य ग्रहण 2018 - 2018 में कब लगेगा सूर्य ग्रहण?

ग्रहण इस शब्द में ही नकारात्मकता झलकती है। एक प्रकार के संकट का आभास होता है, लगता है जैसे कुछ अनिष्ट होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं हैं एक और जहां इसका वैज्ञानिक महत्व है तो दूसरी और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह एक आध्यात्मिक घटना होती है जिसका जगत के समस्त प्राणियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। विशेषकर सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण का। साल 2018 में तीन सूर्य ग्रहण लगेंगें। हालांकि यह आंशिक ग्रहण होंगे। आइये जानते हैं कब कब यह सूर्य ग्रहण लगेंगे और कहां कहां इन्हें देखा जा सकेगा। साथ ही इस लेख में आप जानेंगें कि सूर्य ग्रहण के दौरान क्या-क्या सावधानियां आपको रखनी चाहिये। ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने व अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिये सूर्य ग्रहण के समय अपनी कुंडली के अनुसार ज्योतिषीय उपाय भी किये जाते हैं।  एस्ट्रोयोगी पर आप इन ज्योतिषीय उपाय के बारे में जानने के लिये ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।

कब लगता है सूर्यग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी चंद्रमा व सूर्य एक सीधी रेखा में हों तो उस अवस्था में सूर्य को चांद ढक लेता है जिस सूर्य का प्रकाश या तो मध्यम पड़ जाता है या फिर अंधेरा छाने लगता है इसी को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

कितने प्रकार का होता है सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।

खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण - वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।

2018 में कब लगेगा सूर्य ग्रहण?

वर्ष 2018 में पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा पहली बार 16 फरवरी को आयेगा इस बार सूर्य ग्रहण का योग इसी दिन बनेगा। 2018 का दूसरा सूर्यग्रहण 13 जुलाई को तो तीसरा 11 अगस्त को लगेगा। हालांकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा। 

कहां कहां दिखाई देगा सूर्यग्रहण

2018 में वैसे तो तीन सूर्य ग्रहण हैं जिनमें से दूसरा और तीसरा सूर्यग्रहण तो लगातार हैं। आंशिक तौर पर लगने वाले ये तीनों सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखे जा सकेंगें हालांकि दुनिया अन्य कई हिस्सों में इन्हें देखा जा सकेगा। 

ग्रहण काल का समय

जैसा कि लेख में जानकारी दी गई है कि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिये ग्रहण का समय यहां नहीं दिया जा रहा। ग्रहण का सूतक काल वैसे तो ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरु हो जाता है लेकिन 2018 के तीनों आंशिक सूर्य ग्रहण भारतीयों को प्रभावित नहीं करेगें।

सूर्य ग्रहण पर क्या रखें सावधानियां

एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि ग्रहण काल के समय खाना न खांए न ही कुछ पीयें, प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। इस समय नवग्रहों का दान करना भी लाभकारी रहेगा। जो विद्यार्थी अच्छा परिणाम चाहते हैं वे ग्रहण काल में पढाई शुरु न करें बल्कि ग्रहण के समय से पहले से शुरु कर ग्रहण के दौरान करते रहें तो अच्छा रहेगा। घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक कर रखें। ग्रहण से पहले रात्रि भोज में से खाना न ही बचायें तो अच्छा रहेगा। यदि दुध, दही या अन्य तरल पदार्थ बच जांयें तो उनमें तुलसी अथवा कुशा डालकर रखें इससे ग्रहण का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। ग्रहण समाप्ति पर पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें, देव मूर्ति को भी गंगाजल से स्नान करवायें व तदुपरांत भोग लगायें।

संबंधित लेख

सूर्य ग्रहण 2018 जानें राशिनुसार क्या पड़ेगा प्रभाव   |   चंद्र ग्रहण 2018   |   चंद्र दोष – कैसे लगता है चंद्र दोष क्या हैं उपाय   |   

पितृदोष – पितृपक्ष में ये उपाय करने से होते हैं पितर शांत   |   पंचक - क्यों नहीं किये जाते इसमें शुभ कार्य ?   |   

कुंडली में कालसर्प दोष और इसके निदान के सरल उपाय    |   सूर्य नमस्कार से प्रसन्न होते हैं सूर्यदेव   |   शनिदेव - क्यों रखते हैं पिता सूर्यदेव से वैरभाव




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

पद्मिनी एकादशी – जानिए कमला एकादशी का महत्व व व्रत कथा के बारे में

पद्मिनी एकादशी – ज...

कमला एकादशी, अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मिनी एकादशी कहलाती है। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में व्रत व त्यौहारों की बड़ी मान्यता है। सप्ताह का...

और पढ़ें...
वृषभ राशि में बुध का परिवर्तन – जानिए किन राशियों के लिये लाभकारी है वृषभ राशि में बुधादित्य योग

वृषभ राशि में बुध ...

बुध ग्रह राशि चक्र में तीसरी और छठी राशि मिथुन व कन्या के स्वामी हैं। बुध वाणी के कारक माने जाते हैं। बुध का राशि परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक बड़ी घटना मान...

और पढ़ें...
अधिक मास - क्या होता है मलमास? अधिक मास में क्या करें क्या न करें?

अधिक मास - क्या हो...

अधिक शब्द जहां भी इस्तेमाल होगा निश्चित रूप से वह किसी तरह की अधिकता को व्यक्त करेगा। हाल ही में अधिक मास शब्द आप काफी सुन रहे होंगे। विशेषकर हिंदू कैलेंडर वर्ष को म...

और पढ़ें...
सकारात्मकता के लिये अपनाएं ये वास्तु उपाय

सकारात्मकता के लिय...

हर चीज़ को करने का एक सलीका होता है। शउर होता है। जब चीज़ें करीने सजा कर एकदम व्यवस्थित रखी हों तो कितनी अच्छी लगती हैं। उससे हमारे भीतर एक सकारात्मक उर्जा का संचार ...

और पढ़ें...
मलमास - जानिए मल मास के बारे में

मलमास - जानिए मल म...

16 मई 2018 से मलमास का आरंभ हो चुका है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला यह मलमास 16 मई से आरंभ होकर 13 जून 2018 तक रहेगा। प्रत्येक वर्ष हर तीन साल में एक बार अतिरिक्त माह...

और पढ़ें...