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सूर्य ग्रहण 2017


सूर्य ग्रहण 2017

ग्रहण इस शब्द में ही नकारात्मकता झलकती है। एक प्रकार के संकट का आभास होता है, लगता है जैसे कुछ अनिष्ट होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं हैं एक और जहां इसका वैज्ञानिक महत्व है तो दूसरी और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह एक आध्यात्मिक घटना होती है जिसका जगत के समस्त प्राणियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। विशेषकर सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण का। साल 2017 का दूसरा सूर्य ग्रहण 21-22 अगस्त को लगेगा। आइये जानते हैं कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण और इस दौरान क्या सावधानियां आपको रखनी चाहिये। एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से ग्रहण संबधि उपायों हेतु आप परामर्श कर सकते हैं। परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।

कब लगता है सूर्यग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी चंद्रमा व सूर्य एक सीधी रेखा में हों तो उस अवस्था में सूर्य को चांद ढक लेता है जिस सूर्य का प्रकाश या तो मध्यम पड़ जाता है या फिर अंधेरा छाने लगता है इसी को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

कितने प्रकार का होता है सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।

खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण - वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।

2017 में कब है सूर्य ग्रहण

इस वर्ष पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा पहली बार 26 फरवरी को आयेगा इस बार सूर्य ग्रहण का योग इसी दिन यानि फाल्गुनि अमावस्या को है।

कहां कहां दिखाई देगा सूर्यग्रहण

वर्ष 2017 का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका एवं आस्ट्रिया महाद्वीप में नहीं देखा जा सकेगा। यह अफ्रीका एवं दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में ही दिखाई देगा।

ग्रहण काल का समय

जैसा कि लेख में जानकारी दी गई है कि भारत सहित एशिया के देशों में ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिये ग्रहण का समय यहां नहीं दिया जा रहा। ग्रहण का सूतक काल भी वैसे तो ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरु हो जाता है लेकिन इस वर्ष के पहले सूर्य ग्रहण पर यह भारतीयों को प्रभावित नहीं करेगा।

सूर्य ग्रहण पर क्या रखें सावधानियां

एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि ग्रहण काल के समय खाना न खांए न ही कुछ पीयें, प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। इस समय नवग्रहों का दान करना भी लाभकारी रहेगा। जो विद्यार्थी अच्छा परिणाम चाहते हैं वे ग्रहण काल में पढाई शुरु न करें बल्कि ग्रहण के समय से पहले से शुरु कर ग्रहण के दौरान करते रहें तो अच्छा रहेगा। घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक कर रखें। ग्रहण से पहले रात्रि भोज में से खाना न ही बचायें तो अच्छा रहेगा। यदि दुध, दही या अन्य तरल पदार्थ बच जांयें तो उनमें तुलसी अथवा कुशा डालकर रखें इससे ग्रहण का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। ग्रहण समाप्ति पर पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें, देव मूर्ति को भी गंगाजल से स्नान करवायें व तदुपरांत भोग लगायें।

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