सूर्य गोचर 2026

सूर्य गोचर 2026

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है। नव ग्रहों की चालें ही यह तय करती हैं आपके जीवन में आगे क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं। आज आप इस पेज पर ग्रहों के राजा सूर्य के राशि बदलने या गोचर से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के बारे में जानेंगे। जब यह ग्रह किसी राशि में प्रवेश करता है तो इसके कई बड़े प्रभाव देखने को मिलते हैं। तो चलिए जानें सूर्य गोचर क्या होता है, सूर्य गोचर 2026 (Surya Gochar 2026) में कब-कब होगा और जन्म कुंडली के किस भाव में यह क्या फल दे सकता है।  

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सूर्य गोचर क्या होता है ? (Surya Gochar Kya Hota Hai ?)

जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे सूर्य गोचर या सूर्य संक्रांति कहा जाता है। यह प्रक्रिया लगभग हर 30 दिनों में होती है और हर बार सूर्य का यह परिवर्तन आपके जीवन में नई ऊर्जा और बदलाव लेकर आता है। हिंदू पंचांग में इस अवधि का धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों रूपों में खास महत्व होता है।

सूर्य को ब्रह्मांड का प्रमुख ऊर्जा स्रोत माना गया है। जब यह किसी नई राशि में प्रवेश करता है, तो उस राशि से जुड़ी ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। इससे न सिर्फ दुनिया के हालात, मौसम और सामाजिक परिस्थितियों पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि हर व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति के आधार पर व्यक्तिगत जीवन जैसे करियर, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और रिश्तों पर भी असर दिखाई देता है।

ज्योतिष में सूर्य गोचर का महत्व (Surya Gochar Significance)

सूर्य आपके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और जीवन-ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष में इसे आत्मा और नेतृत्व का ग्रह माना गया है। जब सूर्य किसी राशि से गुजरता है, तो उस समय आपकी सोच, निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-अभिव्यक्ति पर इसका सीधा असर पड़ता है। 

अगर सूर्य की स्थिति मजबूत हो या यह आपकी कुंडली के शुभ भाव से गुजर रहा हो, तो यह समय सफलता, सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होता है। वहीं अगर सूर्य कमजोर स्थिति में हो या शनि, राहु या केतु जैसे ग्रहों से प्रभावित हो, तो थकान, आत्म-संदेह, या काम में देरी जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं। 

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर सूर्य संक्रांति एक नए सौर मास की शुरुआत मानी जाती है। इन दिनों को दान-पुण्य, तर्पण और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। 

जानें सूर्य गोचर 2026 की तारीख और समय (Surya Gochar 2026 Date & Time)

साल 2026 में सूर्य अपनी नियमित गति से हर महीने एक नई राशि में प्रवेश करेगा। हर बार जब सूर्य राशि बदलता है, तो यह गोचर न केवल व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा लाता है, बल्कि मौसम, मनोदशा और समाज में भी बदलाव का संकेत देता है।

नीचे दी गई सूची में आपको सूर्य गोचर 2026 की पूरी जानकारी मिलेगी, किस दिन और किस समय सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करेगा।

Surya Gochar 2026 Date & Time
सूर्य का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी 2026, बुधवार, दोपहर 03:13 बजे
सूर्य का कुम्भ राशि में गोचर 13 फरवरी 2026, शुक्रवार, सुबह 04:14 बजे
सूर्य का मीन राशि में गोचर 15 मार्च 2026, रविवार, रात 01:08 बजे
सूर्य का मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल 2026, मंगलवार, सुबह 09:38 बजे
सूर्य का वृषभ राशि में गोचर 15 मई 2026, शुक्रवार, सुबह 06:28 बजे
सूर्य का मिथुन राशि में गोचर 15 जून 2026, सोमवार, दोपहर 12:58 बजे
सूर्य का कर्क राशि में गोचर 16 जुलाई 2026, गुरुवार, रात 11:44 बजे
सूर्य का सिंह राशि में गोचर 17 अगस्त 2026, सोमवार, सुबह 08:03 बजे
सूर्य का कन्या राशि में गोचर 17 सितंबर 2026, गुरुवार, सुबह 07:58 बजे
सूर्य का तुला राशि में गोचर 17 अक्टूबर 2026, शनिवार, शाम 07:57 बजे
सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर 16 नवंबर 2026, सोमवार, शाम 07:48 बजे
सूर्य का धनु राशि में गोचर 16 दिसम्बर 2026, बुधवार, सुबह 10:29 बजे

जन्म कुंडली के 12 भावों पर सूर्य गोचर का प्रभाव 

ज्योतिष में सूर्य की स्थिति आपके जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों को प्रभावित करती है, जैसे आत्मविश्वास, परिवार, करियर, रिश्ते और स्वास्थ्य। जब सूर्य हर महीने किसी नए भाव से गुजरता है, तो उसकी ऊर्जा उस भाव से जुड़ी चीज़ों को सक्रिय कर देती है।

आइए जानते हैं, सूर्य का गोचर जब जन्म कुंडली के बारह भावों से होकर गुजरता है, तो वह क्या असर लाता है

पहला भाव: इस समय व्यक्ति में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। आप खुद को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित महसूस करते हैं। लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा अहंकार या गुस्सा संबंधों में दूरी ला सकता है। संयम रखें और संतुलन बनाए रखें।

दूसरा भाव: सूर्य का यह गोचर आर्थिक लाभ और वाणी में प्रभावशाली सुधार ला सकता है। परिवार में सम्मान बढ़ता है। लेकिन अगर सूर्य अशुभ प्रभाव में हो, तो बोलचाल में कठोरता या पारिवारिक मतभेद की संभावना रहती है। अनावश्यक खर्च और जोखिम भरे निवेशों से बचें।

तीसरा भाव: यह गोचर साहस और आत्मविश्वास को मजबूत करता है। छोटे सफर, लेखन या संचार से जुड़ी गतिविधियां फलदायी रहती हैं। हालांकि भाइयों या साथियों के साथ किसी बात पर बहस से बचना चाहिए।

चौथा भाव: इस समय घर-परिवार और संपत्ति से जुड़ी चीज़ों में प्रगति संभव है। नया घर खरीदने या साज-सज्जा के कामों के लिए यह अच्छा समय हो सकता है। पर मानसिक बेचैनी या माता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है।

पांचवा भाव: सूर्य इस भाव में आने पर बुद्धि, रचनात्मकता और आत्म-प्रेरणा बढ़ाता है। छात्रों और कलाकारों के लिए समय अनुकूल रहता है। लेकिन प्रेम संबंधों में अहंकार या गलतफहमियों से बचें। सट्टा या जोखिम भरे निवेश में सावधानी रखें।

छठवां भाव: यह गोचर संघर्षों पर विजय दिला सकता है। प्रतियोगिता या नौकरी में अच्छा प्रदर्शन संभव है। स्वास्थ्य भी सुधर सकता है। फिर भी तनाव या कार्यस्थल पर विरोधियों से सतर्क रहें। अत्यधिक काम से थकान हो सकती है।

सातवां भाव: सूर्य सातवें भाव में आते ही रिश्तों पर रोशनी डालता है। यह समय साझेदारी में सफलता दिला सकता है, लेकिन अहंकार या नियंत्रण की प्रवृत्ति विवाद पैदा कर सकती है। जीवनसाथी के विचारों को सम्मान देना जरूरी है।

आठवां भाव: यह गोचर जीवन में अचानक बदलाव ला सकता है। रहस्यमय या आध्यात्मिक विषयों में रुचि बढ़ती है। लेकिन दुर्घटनाओं या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के प्रति सतर्क रहें। ज़रूरत से ज़्यादा जोखिम न लें।

नौवां भाव: यह समय भाग्य वृद्धि, धर्म-कर्म और यात्रा के लिए शुभ होता है। गुरुजनों का मार्गदर्शन मिलेगा और सोच में सकारात्मकता आएगी। लेकिन पिता या वरिष्ठों से मतभेद की संभावना रहती है। धैर्य से काम लें।

दसवां भाव: सूर्य इस भाव में बहुत शक्तिशाली माना जाता है। यह समय नौकरी, पदोन्नति और सम्मान प्राप्त करने के लिए उत्तम है। आप अपने कार्यों से लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगे। परंतु अहंकार या अधिकार के गलत प्रयोग से दूर रहें।

ग्यारहवां भाव: यह गोचर आर्थिक लाभ, नए अवसर और सामाजिक पहचान लाता है। मित्रों या नेटवर्किंग से फायदा हो सकता है। लेकिन अत्यधिक आत्मविश्वास या घमंड नुकसान पहुँचा सकता है, विनम्र बने रहें।

बारहवां भाव: बारहवें भाव में सूर्य आने पर मन आध्यात्मिकता की ओर झुकता है। विदेश यात्रा या आत्म-चिंतन के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं और एकांत का भाव हावी रह सकता है। स्वास्थ्य और मानसिक शांति का ध्यान रखें।                                                                                                 

सूर्य गोचर 2026 में करें ये आसान उपाय

  1. हर दिन सुबह सूर्य के उदय के समय सूर्य बीज मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का कम से कम 108 बार जप करें।

  2. रविवार या संक्रांति के दिन ज़रूरतमंदों को गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, या तांबे के बर्तन का दान करें। ऐसा करने से सूर्य की ऊर्जा संतुलित होती है और जीवन में सफलता और सम्मान बढ़ता है।

  3. विष्णु पूजन और सहस्रनाम का पाठ करें ज्योतिष में सूर्य को भगवान विष्णु का रूप माना गया है। इसलिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ या विष्णु पूजा करने से भी सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। 

  4. सूर्य को अर्घ्य दें हर सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा सा गुड़, चावल और लाल फूल मिलाएँ। पूर्व दिशा की ओर मुख करके “ॐ सूर्याय नमः” कहते हुए धीरे-धीरे सूर्य को अर्घ्य दें।

  5. पिता और बड़ों का सम्मान करें। सूर्य पिता का प्रतीक माना गया है। इसलिए पिता या पिता समान लोगों का आदर करें, उनकी सेवा करें और आशीर्वाद लें। ऐसा करने से सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में स्थायित्व आता है।

आपकी कुंडली के अनुसार ग्रहों की दशा क्या कहती है, जानें एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से। अभी परामर्श करें।

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