Pitru Dosha: पितृपक्ष में पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये सरल उपाय

bell icon Sun, Sep 11, 2022
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Pitru Dosha: श्राद्ध पक्ष में पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये सरल उपाय

कहते हैं माता-पिता के ऋण को पूरा करने का दायित्व संतान का होता है। लेकिन जब संतान माता-पिता या परिवार के बुजूर्गों की, अपने से बड़ों की उपेक्षा करने लगती है तो समझ लेना चाहिये कि अब घर का बंटाधार होना तय है। इस स्थिति से बचने के लिये अपने पूर्वजों जो जीवित हैं उनके लिये सम्मान और जो पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं उनके प्रति श्रद्धा का भाव होना जरुरी है। ज्योतिष शास्त्र मानता है यदि विधि द्वारा बनाये गये इस विधान का पालन नहीं होता तो जातक पर दोष लग जाता है। इसे पितृ दोष कहा जाता है। अपने इस लेख में हम बात करेंगें पितृ दोष की आखिर क्यों होते हैं अपने दिवंगत नाराज़? और किन उपायों से मनाये जाते हैं पितर।

क्या होता है पितृ दोष?

जब परिवार में किसी की समय-असमय मृत्यु हो जाती है और जिनके संस्कार में किसी तरह की कमी रह जाती है या उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जाता जिसके वे हकदार हैं तो मान्यता है कि ऐसी स्थिति में वे दिवंगत आत्माएं नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं जिससे परिवार में अशांति रहने लगती है और बने बनाये काम बिगड़ने लगते हैं। इसे ही पितृ दोष कहा जाता है। जब विवाह या संतानोत्पत्ति में समस्या का सामना करना पड़ रहा हो। व्यापार में घाटा हो रहा हो या फिर धन की हानि हो रही हो तो आप पर पितृ दोष हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि तो जातक की कुंडली के अध्ययन के उपरांत ही विद्वान आचार्य कर सकते हैं। गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से

कब लगता है पितृदोष?

पितृदोष के बारे में आपने जाना आइये अब जानते हैं कि यह दोष लगता कब है। सबसे पहली बात तो यही है कि जब जातक माता-पिता की सेवा के अपने दायित्व को पूरा नहीं करते तो इससे पितृदोष लगता है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की दशा भी है जिससे जातक पर पितृदोष लगता है।

ज्योतिषाचार्य की माने तो सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य राहू से पीड़ित होता है, इसलिये इस स्थिति में पितृदोष लगता है। चूंकि सूर्य को आत्मज, पिता स्वरुप, पिता का अंश माना जाता है इसलिये जब जातक की कुंडली में पितृदोष लगता है। इसके अलावा दशमेश या नवमेश पाप ग्रहों से दृष्ट हों या युक्ति कर रहे हों तो इसे भी पितृदोष कहा जाता है। इसके अलावा जातक का जन्म अमावस्या का हो तो इस समय सूर्य, चंद्रमा एक साथ हो जाते हैं यह स्थिति भी पितृदोष की कारक मानी जाती है।

केतु और सूर्य का युक्ति संबंध भी पितृदोष की श्रेणी में आता है। गुरु ग्रह की युक्ति से भी पितृदोष लगता है। अगर राहू केतु के बीच में सारे ग्रह आ जायें तो इस दोष को कालसर्प दोष इस स्थि में भी पितृदोष लगता है जिसके उपाय जरुर करने चाहिये।

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पितृदोष निवारण के उपाय

  • पितृदोष का निवारण करने के लिये पितृपक्ष में पितरों के नाम से तृपण करवाना चाहिये।
  • इसके साथ-साथ किसी गरीब ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिये।
  • वेदों का अध्ययन करने वाले ब्राह्मण को अध्ययन सामग्री का दान करने से भी पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
  • इसके अलावा पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • पितृपक्ष में कव्वे, चींटियों, गाय, कुत्ते के लिये भोजन की व्यवस्था करनी चाहिये।
  • किसी गरीब व भूखे व्यक्ति को भी भोजन खिलाना चाहिये। इसके अलावा नलकूप, धर्मशाला, वृद्धाश्रम आदि में भी दान करना चाहिये।
  • गीता, भागवत पुराण, विष्णु सहस्रनाम, गरुड़पुराण, गजेंद्र मोक्ष, गायत्री मंत्र आदि का पाठ भी सुयोग्य ब्राह्मण से करवाना चाहिये।
  • गंगा घाट हरिद्वार, काशी, प्रयाग आदि तीर्थ स्थलों में पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से पिंड दान दें तो इससे भी पितृदोष कम हो सकता है।

एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की विशेष सलाह है कि किसी भी तरह का तर्पण, दान व पाठ विद्वान आचार्यों से ही करवायें। आपकी कुंडली में पितृदोष है या नहीं? यदि है तो क्या करना चाहिये इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिये आप ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। इसके लिये लिंक पर क्लिक करें।

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✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी