Skip Navigation Links
पितृदोष – पितृपक्ष में ये उपाय करने से होते हैं पितर शांत


पितृदोष – पितृपक्ष में ये उपाय करने से होते हैं पितर शांत

कहते हैं माता-पिता के ऋण को पूरा करने का दायित्व संतान का होता है। लेकिन जब संतान माता-पिता या परिवार के बुजूर्गों की, अपने से बड़ों की उपेक्षा करने लगती है तो समझ लेना चाहिये कि अब घर का बंटाधार होना तय है। इस स्थिति से बचने के लिये अपने पूर्वजों जो जीवित हैं उनके लिये सम्मान और जो पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं उनके प्रति श्रद्धा का भाव होना जरुरी है। ज्योतिष शास्त्र मानता है यदि विधि द्वारा बनाये गये इस विधान का पालन नहीं होता तो जातक पर दोष लग जाता है। इसे पितृ दोष कहा जाता है। अपने इस लेख में हम बात करेंगें पितृ दोष की आखिर क्यों होते हैं अपने दिवंगत नाराज़? और किन उपायों से मनाये जाते हैं पितर।

क्या होता है पितृ दोष?

जब परिवार में किसी की समय-असमय मृत्यु हो जाती है और जिनके संस्कार में किसी तरह की कमी रह जाती है या उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जाता जिसके वे हकदार हैं तो मान्यता है कि ऐसी स्थिति में वे दिवंगत आत्माएं नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं जिससे परिवार में अशांति रहने लगती है और बने बनाये काम बिगड़ने लगते हैं। इसे ही पितृ दोष कहा जाता है। जब विवाह या संतानोत्पत्ति में समस्या का सामना करना पड़ रहा हो। व्यापार में घाटा हो रहा हो या फिर धन की हानि हो रही हो तो आप पर पितृ दोष हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि तो जातक की कुंडली के अध्ययन के उपरांत ही विद्वान आचार्य कर सकते हैं।

कब लगता है पितृदोष?

पितृदोष के बारे में आपने जाना आइये अब जानते हैं कि यह दोष लगता कब है। सबसे पहली बात तो यही है कि जब जातक माता-पिता की सेवा के अपने दायित्व को पूरा नहीं करते तो इससे पितृदोष लगता है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की दशा भी है जिससे जातक पर पितृदोष लगता है।

मान्यता है कि सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य राहू से पीड़ित होता है, इसलिये इस स्थिति में पितृदोष लगता है। चूंकि सूर्य को आत्मज, पिता स्वरुप, पिता का अंश माना जाता है इसलिये जब जातक की कुंडली में पितृदोष लगता है। इसके अलावा दशमेश या नवमेश पाप ग्रहों से दृष्ट हों या युक्ति कर रहे हों तो इसे भी पितृदोष कहा जाता है। इसके अलावा जातक का जन्म अमावस्या का हो तो इस समय सूर्य, चंद्रमा एक साथ हो जाते हैं यह स्थिति भी पितृदोष की कारक मानी जाती है।

केतु और सूर्य का युक्ति संबंध भी पितृदोष की श्रेणी में आता है। गुरु ग्रह की युक्ति से भी पितृदोष लगता है। अगर राहू केतु के बीच में सारे ग्रह आ जायें तो इस दोष को कालसर्प दोष इस स्थि में भी पितृदोष लगता है जिसके उपाय जरुर करने चाहिये।

पितृदोष निवारण के उपाय

पितृदोष का निवारण करने के लिये पितृपक्ष में पितरों के नाम से तृपण करवाना चाहिये। इसके साथ-साथ किसी गरीब ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिये। वेदों का अध्ययन करने वाले ब्राह्मण को अध्ययन सामग्री का दान करने से भी पितृदोष का प्रभाव कम होता है। इसके अलावा पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितृपक्ष में कव्वे, चींटियों, गाय, कुत्ते के लिये भोजन की व्यवस्था करनी चाहिये। किसी गरीब व भूखे व्यक्ति को भी भोजन खिलाना चाहिये। इसके अलावा नलकूप, धर्मशाला, वृद्धाश्रम आदि में भी दान करना चाहिये। गीता, भागवत पुराण, विष्णु सहस्रनाम, गरुड़पुराण, गजेंद्र मोक्ष, गायत्री मंत्र आदि का पाठ भी सुयोग्य ब्राह्मण से करवाना चाहिये। गंगा घाट हरिद्वार, काशी, प्रयाग आदि तीर्थ स्थलों में पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से पिंड दान दें तो इससे भी पितृदोष कम हो सकता है। एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की विशेष सलाह है कि किसी भी तरह का तर्पण, दान व पाठ विद्वान आचार्यों से ही करवायें। आपकी कुंडली में पितृदोष है या नहीं? यदि है तो क्या करना चाहिये इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिये आप ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। इसके लिये आपको सिर्फ इस लिंक पर क्लिक कर अपना रजिस्ट्रेशन करना है। अभी रजिस्ट्रेशन करने पर आपको मिलेगा 100 रुपये तक की बातचीत निशुल्क करने का मौका। 

यह भी पढ़ें

श्राद्ध 2017 - कब है 2017 में पितृपक्ष श्राद्ध?  |   कन्या में वक्री बुध – कैसे करेगा आपको प्रभावित

बृहस्पति का कन्या में गोचर – क्या पड़ेगा प्रभाव   |    पंचक - क्यों नहीं किये जाते इसमें शुभ कार्य ?   |  

चंद्र दोष – कैसे लगता है चंद्र दोष क्या हैं उपाय   |   क्या आपके बने-बनाये ‘कार्य` बिगड़ रहे हैं? सावधान ‘विष योग` से   |  

 कुंडली में कालसर्प दोष और इसके निदान के सरल उपाय   |   शनिदेव की बदली चाल, वक्री से हुए मार्गी, क्या पड़ेगा प्रभाव?   |  




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

जगन्नाथ रथयात्रा 2018 - सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देने वाली है पुरी रथयात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा 2...

उड़िसा में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में शामिल है। जगन्नाथ मंदिर, सनातन धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मपुर...

और पढ़ें...
जगन्नाथ पुरी मंदिर - जानें पुरी के जगन्नाथ मंदिर की कहानी

जगन्नाथ पुरी मंदिर...

सप्तपुरियों में पुरी हों या चार धामों में धामसर्वोपरी पुरी धाम में जगन्नाथ का नामजगन्नाथ की पुरी भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उड़िसा प्रांत के प...

और पढ़ें...
चंद्र ग्रहण 2018 - 2018 में कब है चंद्रग्रहण?

चंद्र ग्रहण 2018 -...

चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रम...

और पढ़ें...
गुप्त नवरात्र 2018 – जानिये गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि एवं कथा

गुप्त नवरात्र 2018...

देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वही इस चराचर जगत में शक्ति का संचार करती हैं। उनकी आराधना के लिये ही साल में दो बार बड़े स्तर पर लगातार नौ...

और पढ़ें...
तुला राशि में बृहस्पति की बदली चाल – जानिए किन राशियों के करियर में आयेगा उछाल

तुला राशि में बृहस...

ज्ञान के कारक और देवताओं के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति की ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बहुत अधिक मान्यता है। गुरु बिगड़ी को बनाने, बनते हुए को बिगाड़ने में समर्थ माने ...

और पढ़ें...