हरियाली तीज का व्रत महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन खास व्रत विधि का पालन करते हुए महिलाएं उपवास रखती हैं।
विवाहित महिलाएं इस त्योहार को सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ मनाती हैं। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ पूजा की सही विधि और नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। हरियाली तीज व्रत विधि में सोलह श्रृंगार करने और भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश जी की स्थापना करने के साथ-साथ अन्य जरूरी नियमों का पालन किया जाता है।
हरियाली तीज की पूजा के लिए जरूरी सामग्री पहले ही जुटा लेना बेहतर रहता है, ताकि व्रत के दिन पूजा की तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो।
चौकी और पीला वस्त्र: पूजा की चौकी और उस पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा।
शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा: मिट्टी या धातु की प्रतिमाएं पूजा के लिए।
सुहाग पिटारा: मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, काजल और महावर आदि।
शिव पूजन सामग्री: बेलपत्र, भांग, धतूरा और अक्षत।
फूल और माला: भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन व श्रृंगार के लिए।
दीप और धूप सामग्री: घी का दीपक, धूप और कपूर।
भोग सामग्री: फल, मिठाई और पंचामृत।
कलश और जल: पूजा के लिए कलश में भरने के लिए स्वच्छ जल।
अन्य पूजन सामग्री: रोली, मौली और चंदन।
हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ घर पर ही रखा जा सकता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। व्रत के साथ पूजा की सही विधि का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
1. व्रत का संकल्प: व्रत की शुरुआत सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने से करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत का संकल्प लें।
2. सोलह श्रृंगार करें: संकल्प लेने के बाद सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सकती हैं। इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनना और हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा की तैयारी करें।
3. पूजा की चौकी सजाएं: पूजा स्थान की साफ-सफाई करके एक चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी को साफ और व्यवस्थित रखें, ताकि उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं विधि से स्थापित की जा सकें।
4. भगवान की मूर्ती स्थापित करें: चौकी पर मिट्टी या धातु से बनी भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का ध्यान करके श्रद्धापूर्वक पूजा आरंभ करें।
5. सुहाग का पिटारा अर्पित करें: माता पार्वती को सुहाग पिटारा अर्पित करें। इसमें मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, काजल आदि सुहाग की सामग्री रखी जा सकती है। इसे अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से अर्पित किया जाता है।
6. भगवान शिव की पूजा: भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और अक्षत अर्पित करें। इसके साथ फूल और माला भी चढ़ाएं। पूजा करते समय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
7. भोग लगाएं: पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद भगवान को फल, मिठाई या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। कलश में जल भरकर पूजा स्थान पर रखें और अन्य पूजन सामग्री भी विधि से अर्पित करें।
8. हरियाली तीज व्रत कथा सुनें: पूजा के बाद हरियाली तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। माता पार्वती और भगवान शिव की कथा का श्रवण करते हुए मन में श्रद्धा और दांपत्य जीवन की सुख-शांति की कामना करें।
9. आरती करें: अंत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें। परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना के साथ पूजा संपन्न करें।
हरियाली तीज व्रत में कुछ जरूरी नियमों का पालन भी किया जाता है। इन नियमों का पालन श्रद्धा के साथ करने से व्रत की धार्मिक भावना बनी रहती है। हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त जानने के लिए आप हमारे हरियाली तीज त्योहार पेज पर जानकारी देख सकते हैं।
परंपरागत रूप से हरियाली तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी व्रत के दौरान जल का सेवन नहीं किया जाता।
हरियाली तीज पर हरा रंग शुभ माना जाता है। वहीं काले, भूरे और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचने की परंपरा है।
पूजा से पहले पूजा स्थान और पूजन सामग्री की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा के दौरान तन और मन की शुद्धता बनाए रखने का प्रयास करें।
व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा है। इस दिन मन को शांत रखते हुए पूजा और भक्ति में ध्यान लगाना चाहिए।
कई परिवारों में मायके से आई सिंधारा की सामग्री को हरियाली तीज की पूजा में शामिल करने की परंपरा होती है। इसमें कपड़े, श्रृंगार सामग्री और अन्य सुहाग की चीजें शामिल हो सकती हैं।
व्रत के दिन किसी के प्रति क्रोध, नाराजगी या द्वेष का भाव रखने से बचें। शांत मन से भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
हरियाली तीज के व्रत का पारण अगले दिन पंचांग में बताए गए निर्धारित समय के अनुसार करें। पारण के सटीक स्थानीय समय के लिए आज का पंचांग देखें।
हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त से जुड़ी सटीक जानकारी के लिए हरियाली तीज तिथि और शुभ मुहूर्त भी देख सकते हैं।
हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार को केवल सजने-संवरने से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे सुहाग, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रृंगार करती हैं। सावन की हरियाली से जुड़ा हरा रंग भी इस पर्व पर विशेष महत्व रखता है।
हरियाली तीज पर मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, गजरा, काजल, महावर और आभूषण जैसे श्रृंगार किए जाते हैं। मान्यता है कि इस तरह सजना-संवरना माता पार्वती के प्रति भक्ति और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को दर्शाता है। हरा रंग सावन की हरियाली, नई ऊर्जा और जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसलिए तीज के दिन हरे कपड़े, चूड़ियां और मेहंदी को खास पसंद किया जाता है।
हरियाली तीज की पूजा में व्रत कथा का विशेष महत्व माना जाता है। कथा माता पार्वती की उस तपस्या से जुड़ी है, जिसके बाद उन्हें भगवान शिव का साथ प्राप्त हुआ। कथा सुनने के बाद शिव-पार्वती और गणेश जी की आरती की जाती है और सुखी दांपत्य जीवन व परिवार की खुशहाली की प्रार्थना के साथ पूजा पूरी होती है। विभिन्न देवी-देवताओं की आरतियों के लिए आरती संग्रह देखें।
हरियाली तीज का व्रत श्रद्धा और सही विधि से रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर आप अपनी कुंडली के अनुसार पूजा, व्रत के शुभ समय या वैवाहिक जीवन से जुड़े किसी सवाल को लेकर मार्गदर्शन चाहते हैं, तो एस्ट्रोयोगी के अनुभवी ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं। अपने सवालों के जवाब पाने के लिए एस्ट्रोयोगी के ज्योतिषियों से परामर्श करें।