कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व है। इस दिन घर और मंदिरों में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। रात में श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरती करने की परंपरा है। आरती के समय दीपक जलाकर भगवान को भोग लगाया जाता है और भक्त मिलकर कृष्ण जी का गुणगान करते हैं। जन्माष्टमी पर “आरती कुंज बिहारी की” का पाठ भी कई घरों और मंदिरों में किया जाता है। आरती के शब्दों में भगवान कृष्ण के बाल रूप, उनकी सुंदर छवि और वृंदावन से जुड़े रूप का वर्णन मिलता है। पूजा के अंत में आरती करने से पूरे परिवार के साथ भगवान का स्मरण करने का अवसर मिलता है।
जन्माष्टमी पर गाई जाने वाली प्रसिद्ध आरती में “आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की” का विशेष स्थान है।
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
पूरी कृष्ण जन्माष्टमी आरती यहां पढ़ें
जन्माष्टमी की पूजा में आरती का खास स्थान है। भगवान कृष्ण के जन्म के बाद भक्त दीपक जलाकर उनकी आरती करते हैं। इस समय घर में भजन और कृष्ण के नाम का जाप भी किया जाता है।
आरती केवल पूजा का आखिरी हिस्सा नहीं है। यह भगवान के सामने अपनी श्रद्धा रखने का एक सरल तरीका है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ आरती कर सकते हैं। मंदिर में होने वाली जन्माष्टमी की पूजा में भी आरती के समय बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
कृष्ण जी की आरती में उनके अलग-अलग नामों का स्मरण किया जाता है। इससे भक्त का ध्यान पूजा पर बना रहता है और जन्माष्टमी का उत्सव भक्ति के साथ पूरा होता है।
आरती से पहले पूजा की जगह साफ कर लें। भगवान कृष्ण की मूर्ति या बाल गोपाल को साफ स्थान पर रखें। उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से सजाएं।
पूजा की थाली में दीपक, कपूर, फूल, अक्षत और भोग रखें। अगर आप बाल गोपाल की पूजा कर रहे हैं, तो उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी, फल या अपनी परंपरा के अनुसार कोई अन्य भोग अर्पित कर सकते हैं।
आरती के समय परिवार के सभी सदस्य एक जगह बैठें। दीपक जलाएं और भगवान कृष्ण का ध्यान करें। इसके बाद आरती शुरू करें।
जन्माष्टमी की पूजा आमतौर पर रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय की जाती है। पूजा का समय, स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए पूजा और आरती का सही समय जानने के लिए अपने स्थान का पंचांग देखना बेहतर है।
भगवान कृष्ण के जन्म की पूजा पूरी करने के बाद आरती की जाती है। कुछ परिवारों में पहले आरती और फिर भोग लगाया जाता है, जबकि कुछ जगहों पर भोग के बाद आरती होती है। दोनों तरीके स्थानीय परंपरा के अनुसार अपनाए जाते हैं।
आरती के समय भगवान कृष्ण के सामने दीपक और कपूर रखें। इसके साथ फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। जन्माष्टमी पर माखन और मिश्री का भोग विशेष रूप से लोकप्रिय है।
बाल गोपाल को फल, दूध, दही, मिठाई और पंजीरी भी चढ़ाई जाती है। भोग में वही सामग्री रखें जिसे आपके घर में जन्माष्टमी की पूजा में चढ़ाने की परंपरा है।
भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटें। प्रसाद को सम्मान के साथ ग्रहण करें।
आरती के लिए घी या तेल का दीपक तैयार करें। पूजा की थाली में कपूर भी रखा जा सकता है। सबसे पहले भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाएं।
इसके बाद आरती का पाठ शुरू करें। दीपक को भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने धीरे-धीरे घुमाएं। आरती के दौरान घंटी बजाई जा सकती है।
आरती पूरी होने के बाद भगवान को प्रणाम करें। परिवार के दूसरे सदस्य भी दीपक की आरती लें। अंत में प्रसाद बांटें।
आरती करते समय जल्दबाजी न करें। शब्द सही तरीके से बोलने का प्रयास करें और पूजा के दौरान ध्यान भगवान कृष्ण पर रखें।
जन्माष्टमी की रात आरती के साथ कृष्ण भजन भी गाए जाते हैं। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे पारंपरिक भजन जन्मोत्सव के दौरान सुनने को मिलते हैं।
कुछ घरों में राधा-कृष्ण के भजन भी गाए जाते हैं। मंदिरों में पूरी रात भजन और कीर्तन का आयोजन हो सकता है।
भजन चुनते समय कोई एक तय सूची जरूरी नहीं है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण के भजन गा सकते हैं।
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को बाल रूप में सजाने की परंपरा है। उन्हें छोटे वस्त्र, मुकुट, मोर पंख और आभूषण पहनाए जाते हैं।
बाल गोपाल की आरती करते समय भक्त उन्हें अपने परिवार के छोटे सदस्य की तरह प्रेम से देखते हैं। कई घरों में जन्म के बाद शंख बजाया जाता है और बाल कृष्ण को झूले में झुलाया जाता है।
इस पूजा का मुख्य भाव भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी मनाना है। इसलिए आरती के समय घर का माहौल आनंद और भक्ति से भरा रहता है।
कृष्ण जन्माष्टमी की आरती पूरी होने के बाद भगवान कृष्ण को प्रणाम करें। इसके बाद जन्माष्टमी का प्रसाद सभी को दें।
अगर घर में बाल गोपाल का झूला सजाया गया है, तो उन्हें झूला झुलाया जा सकता है। कुछ परिवारों में जन्म के बाद भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री और अन्य भोग अर्पित किया जाता है।
पूजा की सामग्री को अगले दिन सम्मान के साथ हटाएं। फूल और दूसरी पूजा सामग्री को साफ तरीके से अलग करें।
भगवान कृष्ण को कई नामों से याद किया जाता है। आरती और भजन में कृष्ण, गोविंद, गोपाल, मुरारी, गिरिधर, कुंज बिहारी, नंदलाल और कन्हैया जैसे नाम आते हैं।
हर नाम भगवान कृष्ण के जीवन और उनकी अलग-अलग लीलाओं से जुड़ा है। गोपाल उनके ग्वाल रूप की याद दिलाता है, जबकि गिरिधर नाम गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है। नंदलाल नाम उनके पालन-पोषण और बचपन को याद करता है।
इन नामों का जाप जन्माष्टमी की पूजा के दौरान किया जा सकता है।
आरती की थाली और पूजा की सभी सामग्री साफ रखें। दीपक को बच्चों की पहुंच से दूर रखें। अगर कपूर जलाते हैं, तो उसे संभालकर इस्तेमाल करें।
आरती के दौरान दीपक को बहुत तेजी से न घुमाएं। घर में बुजुर्ग या बच्चे शामिल हों तो उन्हें भी पूजा में शामिल होने का अवसर दें।
सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा को केवल नियम पूरा करने के लिए न करें। अपनी सुविधा और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करें।
जन्माष्टमी की रात मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। भगवान कृष्ण की झांकी सजाई जाती है और बाल गोपाल को झूले में रखा जाता है।
रात में जैसे ही भगवान कृष्ण के जन्म का समय आता है, शंख और घंटियां बजाई जाती हैं। भक्त जयकारे लगाते हैं और जन्म के बाद आरती करते हैं।
कई जगह जन्माष्टमी का उत्सव पूरी रात चलता है। लोग कृष्ण भजन सुनते हैं और भगवान की लीलाओं से जुड़ी झांकियां देखते हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन सी आरती पढ़ी जाती है?
जन्माष्टमी पर “आरती कुंज बिहारी की” सबसे प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। इसके अलावा परिवार अपनी परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण की दूसरी आरतियां और भजन भी कर सकते हैं।
जन्माष्टमी पर आरती कब करनी चाहिए?
भगवान कृष्ण के जन्म के बाद आरती करने की परंपरा है। जन्म का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग में दिया गया समय देखें।
जन्माष्टमी की आरती में क्या चढ़ाना चाहिए?
आरती के समय दीपक, कपूर और फूल रखे जा सकते हैं। पूजा में भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, फल, दूध, दही या परिवार की परंपरा के अनुसार भोग लगाया जा सकता है।
क्या बाल गोपाल की आरती जन्माष्टमी की रात की जा सकती है?
हां, जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा और आरती की जाती है। भगवान कृष्ण के जन्म के बाद उन्हें झूले में रखकर आरती करने की परंपरा भी कई परिवारों में है।
कृष्ण जी की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती पूरी होने के बाद भगवान कृष्ण को प्रणाम करें और प्रसाद बांटें। परिवार के सभी सदस्य आरती का दीपक लेकर भगवान का आशीर्वाद ले सकते हैं।
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