Mahashivratri 2026 Date: इस महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बन रहे पांच दुर्लभ राजयोग

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Mahashivratri 2026 Date: इस महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बन रहे पांच दुर्लभ राजयोग

Mahashivratri 2026 Date: महाशिवरात्रि 2026 इस बार बेहद खास मानी जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार करीब 300 साल बाद इस दिन एक साथ पांच दुर्लभ राजयोग बन रहे हैं, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इस दिव्य संयोग में की गई पूजा, जप और साधना का फल कई गुना बढ़ सकता है। यदि आप भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो यह महाशिवरात्रि आपके लिए आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक बदलाव का विशेष अवसर लेकर आ सकती है।

300 साल बाद बन रहे पांच दुर्लभ राजयोग

महाशिवरात्रि 2026 की सबसे बड़ी विशेषता है – पांच राजयोगों का एक साथ निर्माण। ज्योतिष शास्त्र में राजयोग को सफलता, उन्नति और विशेष कृपा का संकेत माना जाता है। आइए जानते हैं ये कौन-कौन से योग हैं:

1. लक्ष्मी नारायण राजयोग

जब बुध और शुक्र का संयोग होता है, तब यह योग बनता है। यह धन, वैभव और भौतिक सुखों में वृद्धि का संकेत देता है। यदि आप व्यापार या वित्त से जुड़े हैं, तो यह समय आपके लिए सकारात्मक परिणाम ला सकता है।

2. बुधादित्य राजयोग

सूर्य और बुध की युति से यह योग बनता है। इसे बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता और निर्णय शक्ति को मजबूत करने वाला माना जाता है। विद्यार्थियों और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह विशेष शुभ हो सकता है।

3. शुक्रादित्य योग

सूर्य और शुक्र के मिलन से बनने वाला यह योग आकर्षण, रचनात्मकता और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत देता है। शुक्रादित्य योग कला, मीडिया और रचनात्मक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।

4. शश महापुरुष राजयोग

जब शनि अपनी स्वयं की राशि कुंभ में स्थित होकर केंद्र भाव में प्रभाव डालते हैं, तो शश महापुरुष योग बनता है। यह योग धैर्य, अनुशासन और दीर्घकालिक सफलता का संकेत देता है।

5. पंचग्रह राजयोग

सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु का एक साथ प्रभाव पंचग्रह योग बनाता है। यह अत्यंत दुर्लभ संयोग माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय जीवन में बड़े बदलाव और नई दिशा का संकेत दे सकता है।

इन सभी योगों का एक साथ बनना आध्यात्मिक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा सकता है। हालांकि, व्यक्तिगत फल आपकी कुंडली पर भी निर्भर करता है।

महाशिवरात्रि 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।

तिथि आरंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 5:04 बजे से,
तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे तक।

महाशिवरात्रि की रात्रि को विशेष रूप से जागरण, जप और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस रात की गई पूजा कई गुना फल देती है।

आध्यात्मिक दृष्टि से क्या है दुर्लभ संयोग अर्थ?

महाशिवरात्रि 2026 का यह दुर्लभ संयोग केवल भौतिक उन्नति का संकेत नहीं है। यह समय आपको आत्ममंथन, ध्यान और भीतर की शक्ति को पहचानने का अवसर देता है।

भगवान शिव को संहार और सृजन दोनों का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप अपने जीवन की नकारात्मक आदतों, भय और भ्रम को त्यागकर एक नई शुरुआत कर सकते हैं।

यदि आप लंबे समय से मानसिक तनाव या असमंजस का सामना कर रहे हैं, तो यह रात आपके लिए ध्यान और साधना का श्रेष्ठ अवसर हो सकती है।

किन राशियों को मिल सकता है विशेष लाभ?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य, बुध, शुक्र या शनि मजबूत स्थिति में हैं, उन्हें इस संयोग का विशेष लाभ मिल सकता है।

विशेषकर कुंभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय उन्नति और नई संभावनाओं का संकेत दे सकता है।

हालांकि, यह सामान्य संकेत हैं। आपके लिए सटीक फल आपकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली पर निर्भर करेगा।

क्या करें और क्या न करें?

क्या करें

  • सच्चे मन से पूजा और ध्यान करें

  • दान और सेवा का भाव रखें

  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

क्या न करें

  • दिखावे के लिए पूजा न करें

  • किसी का अपमान या विवाद न करें

  • अत्यधिक अपेक्षाएं न रखें

महाशिवरात्रि का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शुद्धि और आत्मबोध है।

300 साल बाद बन रहे इन दुर्लभ राजयोगों का संयोग जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत दे सकता है। यह दिन आपको अपने भीतर झांकने, गलतियों को स्वीकारने और नई शुरुआत करने का अवसर देता है।

भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे सरल भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आप श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करते हैं, तो यह दिन आपके लिए आध्यात्मिक और मानसिक रूप से अत्यंत लाभकारी हो सकता है।

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