लक्ष्मी स्तोत्र

लक्ष्मी स्तोत्र, जैसा की नाम से ही पता चल रहा है कि यह स्तोत्र किसके लिए व किस लिए पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से जातक को धन संपदा की प्राप्ति होती है। जीवन के यापन के लिए धन सबसे ज्यादा मायने रखता है। आज के मसय में भैतिक सुख को ही अधिक महत्व व तवज्जो दिया जाता है। जिसके पास धन संपत्ती उसके पिछे सब कुल मिलाकर धन मायने रखता है। इस स्तोत्र में अष्टलक्ष्मी की स्तुति की गई है। मान्यता है जो इस स्तोत्र को श्रद्धा के साथ करता है। उसे जरूर मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तो आइये लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।

आदिलक्ष्मी

सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवी चन्द्र सहोदरीहेममये |

मुनिगणमंडित मोक्षप्रदायिनी मंजुलभाषिणीवेदनुते ||

पंकजवासिनी देवसुपुजित सद्रुणवर्षिणी शांतियुते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी आदिलक्ष्मी सदापलीमाम ||1||

धान्यलक्ष्मी

अहिकली कल्मषनाशिनि कामिनी वैदिकरुपिणी वेदमये |

क्षीरमुद्भव मंगलरूपिणी मन्त्रनिवासिनी मन्त्रनुते | |

मंगलदायिनि  अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पाद्युते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी धान्यलक्ष्मी सदा पली माम||2||

धैर्यलक्ष्मी

जयवरवर्णिनी  वैष्णवी भार्गवी मन्त्रस्वरूपिणी  मन्त्रम्ये |

सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनी शास्त्रनुते ||

भवभयहारिणी पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी धैर्यलक्ष्मी सदापलेमाम ||3||

 

 

 

गजलक्ष्मी

जयजय दुर्गतिनाशिनी कामिनी सर्वफलप्रद शास्त्रमये |

रथगज तुरगपदादी  समावृत परिजनमंडित लोकनुते ||

हरिहर ब्रम्हा सुपूजित सेवित तापनिवारिणी पादयुते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी गजलक्ष्मी  रूपेण पलेमाम ||4||

संतानलक्ष्मी

अहिखग वाहिनी मोहिनी  चक्रनि रागविवर्धिनी  लोकहितैषिणी |

स्वरसप्त भूषित गाननुते सकल सूरासुर देवमुनीश्वर ||

मानववन्दित पादयुते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी संतानलक्ष्मी त्वं पालयमाम ||5||

विजय लक्ष्मी

जय कमलासनी सद्रतिदायिनी ज्ञानविकासिनी गानमये |

अनुदिनमर्चित कुमकुमधूसर-भूषित वासित वाद्यनुते ||

कनकधस्तुति  वैभव वन्दित शंकर देशिक मान्य पदे |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी विजयलक्ष्मी सदा पालय माम ||6||

विद्यालक्ष्मी

प्रणत सुरेश्वरी भारती भार्गवी शोकविनासिनी रत्नमये |

मणिमयभूषित कर्णविभूषण शांतिसमवृत  हास्यमुखे ||

नवनिधिदायिनी  कलिमहरिणी कामित फलप्रद  हस्त युते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनीविद्यालक्ष्मी  सदा पालय माम ||7||

 

 

 

 

धनलक्ष्मी

धिमिधिमी धिंधिमी धिंधिमी धिंधिमी दुन्दुभी नाद सुपूर्णमये |

घूमघूम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते ||

वेदपूराणेतिहास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते |

जय जय हे मधुसुदन कामिनी धनलक्ष्मी रूपेण पालय माम || 8||

 

लक्ष्मी स्तोत्र के लाभ

लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने से आपको धन संपदा की प्राप्ति होगी। यदि आप अपने व्यापार में मन चाहा लाभ पाना चाहते हैं तो आपको लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ सभी कर सकते हैं। इसमें कोई अन्य या किसी के लिए रोक टोक नहीं है। परंतु यदि आप अपने राशि के अनुसार स्तोत्र का पाठ कर अधिक लाभ पाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए ज्योतिषाचार्य से बात करना होगा। अभी ज्योतिषाचार्य से बात करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आप ज्योतिषातार्य से बात करते हैं तो आपको जरूर लाभ होगा। क्योंकि ये जो भी बताएंगे आपकी कुंडली व राशि का आकलन करने के बाद ही बताएंगे जिससे आपको मन चाहा परिणाम मिलेगा।

 

लक्ष्मी स्तोत्र पाठ विधि

लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने के लिए सामान्य विधि है। जैसे आप रोजाना पूजा करने के लिए तैयार होते हैं। वैसे ही आपको लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने के लिए भी सज्ज होना है। जैसा कि कहा गया है गणेश पूजा सर्वप्रथम किया जाता है। वैसे ही आपको सबसे पहले गणेश पूजा करनी चाहिए। इसके बाद आप लक्ष्मी पूजा कर स्तोत्र का पाठ करें। परंतु इससे पहले आपक लक्ष्मी मंत्र का जाप 101 बार करें। लक्ष्मी जी को कमल पुष्प अर्पित करें।


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