हनुमान स्तोत्र

हनुमान स्तोत्र जैसा कि जग जाहिर है कि बरंगबली हर विपदा को समाप्त कर देते हैं। सबसे पहले जान लें कि स्तोत्र क्या है तो हम आपको बता दें कि स्तोत्र व मार्ग है जिसका अनुसरण करने से जातक को देव व देवी जल्दी ही कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में यदि आप राम भक्त हनुमान की कृपा पाना चाहते हैं तो आपको हनुमान स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। बता दें कि यहां हम दो स्तोत्र दें रहें हैं। यह आपके सहूलियत के लिए है। पहला संस्कृत भाषा में व दूसरा अवधी हिंदी भाषा में आप अपने अनुसार कोई भी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इससे आपको लाभ होगा। तो आइये पाठ करते हैं हनुमान स्तोत्र का -

 

हनुमान संस्कृत स्तोत्र

सर्वारिष्टनिवारकं शुभकरं पिङ्गाक्षमक्षापहं

सीतान्वेषणतत्परं कपिवरं कोटीन्दुसूर्यप्रभम्।

 

लंकाद्वीपभयंकरं सकलदं सुग्रीवसम्मानितं

देवेन्द्रादिसमस्तदेवविनुतं काकुत्स्थदूतं भजे ॥१॥

ख्यातः श्रीरामदूतः पवनतनुभवः पिङ्गलाक्षः शिखावन्

सीताशोकापहारी दशमुखविजयी लक्ष्मणप्राणदाता।

आनेता भेषजाद्रेर्लवणजलनिधेः लङ्घने दीक्षितो यः

वीरश्रीमान् हनूमान्मम मनसि वसन्कार्यसिद्धुं तनोतु॥२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिवतां वरिष्ठम्।

वातत्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि ॥३॥

बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं निर्भयत्वमरोगता।

अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनूमत्स्मरणाद्भवेत् ॥४॥

 

 

 

हिंदी हनुमान स्तोत्र

काहे विलम्ब करो अंजनी-सुत । संकट बेगि में होहु सहाई ।।

नहिं जप जोग न ध्यान करो । तुम्हरे पद पंकज में सिर नाई ।।

खेलत खात अचेत फिरौं । ममता-मद-लोभ रहे तन छाई ।।

हेरत पन्थ रहो निसि वासर । कारण कौन विलम्बु लगाई ।।

काहे विलम्ब करो अंजनी सुत । संकट बेगि में होहु सहाई ।।

जो अब आरत होई पुकारत । राखि लेहु यम फांस बचाई ।।

रावण गर्वहने दश मस्तक । घेरि लंगूर की कोट बनाई ।।

 

निशिचर मारि विध्वंस कियो । घृत लाइ लंगूर ने लंक जराई ।।

जाइ पाताल हने अहिरावण । देविहिं टारि पाताल पठाई ।।

वै भुज काह भये हनुमन्त । लियो जिहि ते सब संत बचाई ।।

औगुन मोर क्षमा करु साहेब । जानिपरी भुज की प्रभुताई ।।

भवन आधार बिना घृत दीपक । टूटी पर यम त्रास दिखाई ।।

काहि पुकार करो यही औसर । भूलि गई जिय की चतुराई ।।

गाढ़ परे सुख देत तु हीं प्रभु । रोषित देखि के जात डेराई ।।

छाड़े हैं माता पिता परिवार । पराई गही शरणागत आई ।।

जन्म अकारथ जात चले ।

 

अनुमान बिना नहीं कोउ सहाई ।। मझधारहिं मम बेड़ी अड़ी ।

भवसागर पार लगाओ गोसाईं ।। पूज कोऊ कृत काशी गयो ।

मह कोऊ रहे सुर ध्यान लगाई ।। जानत शेष महेष गणेश ।

सुदेश सदा तुम्हरे गुण गाई ।। और अवलम्ब न आस छुटै ।

सब त्रास छुटे हरि भक्ति दृढाई ।। संतन के दुःख देखि सहैं नहिं ।

जान परि बड़ी वार लगाई ।। एक अचम्भी लखो हिय में ।

कछु कौतुक देखि रहो नहिं जाई ।। कहुं ताल मृदंग बजावत गावत ।

जात महा दुःख बेगि नसाई ।। मूरति एक अनूप सुहावन ।

का वरणों वह सुन्दरताई ।। कुंचित केश कपोल विराजत ।

कौन कली विच भऔंर लुभाई ।। गरजै घनघोर घमण्ड घटा ।

 

बरसै जल अमृत देखि सुहाई ।। केतिक क्रूर बसे नभ सूरज ।

सूरसती रहे ध्यान लगाई ।। भूपन भौन विचित्र सोहावन ।

गैर बिना वर बेनु बजाई ।। किंकिन शब्द सुनै जग मोहित ।

हीरा जड़े बहु झालर लाई ।। संतन के दुःख देखि सको नहिं ।

जान परि बड़ी बार लगाई ।। संत समाज सबै जपते सुर ।

लोक चले प्रभु के गुण गाई ।। केतिक क्रूर बसे जग में ।

भगवन्त बिना नहिं कोऊ सहाई ।।नहिं कछु वेद पढ़ो, नहीं ध्यान धरो ।

बनमाहिं इकन्तहि जाई ।। केवल कृष्ण भज्यो अभिअंतर ।

धन्य गुरु जिन पन्थ दिखाई ।। स्वारथ जन्म भये तिनके ।

 

जिन्ह को हनुमन्त लियो अपनाई ।। का वरणों करनी तरनी जल ।

मध्य पड़ी धरि पाल लगाई ।। जाहि जपै भव फन्द कटैं ।

अब पन्थ सोई तुम देहु दिखाई ।। हेरि हिये मन में गुनिये मन ।

जात चले अनुमान बड़ाई ।। यह जीवन जन्म है थोड़े दिना ।

मोहिं का करि है यम त्रास दिखाई ।। काहि कहै कोऊ व्यवहार करै ।

छल-छिद्र में जन्म गवाईं ।। रे मन चोर तू सत्य कहा अब ।

का करि हैं यम त्रास दिखाई ।। जीव दया करु साधु की संगत ।

लेहि अमर पद लोक बड़ाई ।। रहा न औसर जात चले ।

भजिले भगवन्त धनुर्धर राई ।। काहे विलम्ब करो अंजनी-सुत ।

संकट बेगि में होहु सहाई ।।

। इति हनुमान स्तोत्र समाप्त ।।

 

हनुमान स्तोत्र के लाभ

हनुमान स्तोत्र के लाभ के बारे में आपको क्या बताएं जो लोग राम भक्त हनुमान के बारे में जानते होंगे। उन्हें तो पता ही होगा कि हनुमान जी की कृपा जिस पर बन जाएं। उसके सारे काम बन जाएंगे। इसके साथ ही आपको यदि शत्रु का भय सताता है तो आपको हनुमान स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे आपके मन से विरोधियों का भय समाप्त होगा। आप मानसिक व शारीरिक रूप से बलवान बनेंगे। 

हनुमान स्तोत्र पाठ विधि

हनुमान स्तोत्र का पाठ करने के लिए आपको प्रात: काल स्नान आदि कर भगवान हनुमान जी की मूर्ति या प्रतिमा को गंगा जल से पवित्र कर लेना चाहिए। इसके बाद पूजा के लिए लाल रंग के फूल और घी या तिल के तेल के दीपक को जला दें। फूल को हनुमान जी के समक्ष अर्पित कर दें। दीपक जालाने के बाद हनुमान स्तोत्र का पाठ शुरू करें। यदि पाठ की शुरूआत आप मंगलवार के दिन से कर रहे हैं तो यह और भी उत्तम होगा। पाठ करने के बाद सवा ग्राम लड्डू का भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद बांट दें।


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