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Maa Mahagauri Stotram: नवरात्रि के आठवें दिन देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। माँ महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा की प्रतीक देवी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन माँ महागौरी स्तोत्र का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से जीवन के पाप और कष्ट दूर होते हैं तथा भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माँ महागौरी का स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और दिव्य माना जाता है। उनका वर्ण शंख, चंद्र और कुंद के फूल के समान अत्यंत सफेद बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ (बैल) की सवारी करती हैं। उनकी चार भुजाएँ होती हैं, जिनमें वे त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं तथा वरमुद्रा और अभयमुद्रा में भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
नवरात्रि में माँ महागौरी स्तोत्र का पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है, जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है।
॥ ध्यान मंत्र ॥
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वीनीम्॥
अर्थ — मैं मनोवांछित लाभ प्राप्त करने के लिए, सभी तरह के मनोरथों को पूरा करने वाली, मस्तक पर अर्ध चंद्र को धारण करने वाली, सिंह की सवारी करने वाली, चार भुजाओं वाली और यश प्रदान करने वाली महागौरी माता की वंदना करता हूँ।
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
अर्थ — वे हमारी सभी इन्द्रियों में वास करती हैं, सोमचक्र को मजबूती प्रदान करती हैं, नवदुर्गा में आठवां रूप है जिनका नाम महागौरी है और उनके तीन नेत्र हैं। उन्होंने अपने दो हाथों में त्रिशूल व डमरू लिया हुआ है जबकि बाकि के दो हाथ भक्तों को अभय व वरदान देने की मुद्रा में है।
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
अर्थ — महागौरी माता पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं। उनके मुख पर स्नेह के भाव हैं और उन्होंने नाना प्रकार के आभूषणों से अपना अलंकार किया हुआ है। उन्होंने अपने शरीर पर मंजीर, हार, केयूर, किंकिणी व रत्नों से जड़ित कुंडल धारण किये हुए हैं।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥
अर्थ — मैं प्रसन्न मन के साथ महागौरी देवी की आराधना करता हूँ। उनका स्वरुप बहुत ही सुंदर, कमनीय, रमणीय व वैभव युक्त है। तीनों लोकों में उनकी पूजा की जाती है।
॥ स्तोत्र ॥
सर्वसंकट हंत्रीत्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
अर्थ — महागौरी माता हमारे सभी तरह के संकटों को दूर कर देती हैं। वे हमें धन व ऐश्वर्य प्रदान करती हैं। महागौरी माता की कृपा से ही हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है। चारों वेद भी उनकी महिमा का वर्णन करते हैं। मैं महागौरी माता को प्रणाम करता हूँ।
सुखशांतिदात्री धनधान्यप्रदायनीम्।
डमरूवाद्यप्रिया अघा महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
अर्थ — माता महागौरी हमें सुख व शांति प्रदान करती हैं। उन्हीं के द्वारा ही हमारे घर में धन-संपदा आती है और हम धनवान बनते हैं। उन्हें डमरू तथा वाद्य यंत्र बहुत ही ज्यादा अच्छे लगते हैं। मैं महागौरी देवी को नमस्कार करता हूँ।
त्रैलोक्यमंगलात्वंहि तापत्रय प्रणमाम्यहम्।
वरदाचैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
अर्थ — तीनों लोकों में मंगल कार्य महागौरी माता की ही कृपा से संभव हो पाते हैं। वे तीनों लोकों के ताप को हर लेती हैं और हम सभी उन्हें प्रणाम करते हैं। वे ही इस सृष्टि के प्राणियों को वरदान देकर उनका उद्धार करती हैं। मैं महागौरी माँ को नमन करता हूँ।
माँ महागौरी स्तोत्र का पाठ नवरात्रि के आठवें दिन प्रातः स्नान के बाद शुद्ध मन से करना चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थान को स्वच्छ करके माँ महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ माँ का ध्यान करते हुए स्तोत्र का पाठ करें और अंत में माता से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
माँ महागौरी स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के पाप और कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मन की अशांति, भय और नकारात्मकता समाप्त होती है। इससे साधक को मानसिक शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि माँ महागौरी की आराधना से साधक के जीवन में शुद्धता, सुख और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
माँ महागौरी स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से नवरात्रि के आठवें दिन किया जाता है। इसके अलावा भक्त प्रतिदिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय भी इसका पाठ कर सकते हैं। शुभ फल प्राप्त करने के लिए सोमवार या शुक्रवार के दिन भी इस स्तोत्र का पाठ करना उत्तम माना जाता है।
माँ महागौरी की पूजा में स्तोत्र का विशेष महत्व माना गया है। स्तोत्र के माध्यम से भक्त देवी की स्तुति करते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्तोत्र का पाठ करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है और देवी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। इससे साधक के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति आती है।
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