सरस्वती स्तोत्र

सरस्वती स्तोत्र का पाठ उन जातकों को विशेषतः करना चाहिए जो जातक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं इसके साथ ही इस स्तोत्र का पाठ लिखा पढ़ी काम काजी लोग करें तो उनके लिए भी यह अत्यंत लाभदायी है। कहा गया है कि सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ ही लेखन के क्षेत्र में कार्य करने वालों को अधिक लाभ होता है। इन पर मां सरस्वती की कृपा बनती है। जिससे ये अधिक बुद्धिमान व ज्ञानवान होते हैं। कहते हैं कि जो ज्ञानवान होता है उसी के आगे संसार झुकता है। यदि आपको भी मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करनी है तो सरस्वती स्तोत्र का पाठ करें। तो आइये चलें स्तोत्र पाठ की ओर –

 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।

 

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।

 

आशासु राशीभवदंगवल्लीभासैव दासीकृतदुग्धसिन्धुम ।

मन्दस्मितैर्निन्दितशारदेन्दुं वन्देsरविन्दासनसुन्दरि त्वाम ।।2।।

 

शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे ।

सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात ।।3।।

 

सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम ।

देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ।।4।।

 

पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती ।

प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ।।5।।

 

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम ।

हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम ।।6।।

 

वीणाधरे विपुलमंगलदानशीले, भक्तार्तिनाशिनि विरिंचिहरीशवन्द्ये ।

कीर्तिप्रदेsखिलमनोरथदे महार्हे, विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम ।।7।।

 

श्वेताब्जपूर्णविमलासनसंस्थिते हे, श्वेताम्बरावृतमनोहरमंजुगात्रे ।

उद्यन्मनोज्ञसितपंकजमंजुलास्ये, विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम ।।8।।

 

मातस्त्वदीयपदपंकजभक्तियुक्ता, ये त्वां भजन्ति निखिलानपरान्विहाय ।

ते निर्जरत्वमिह यान्ति कलेवरेण, भूवह्निवायुगगनाम्बुविनिर्मितेन ।।9।।

 

मोहान्धकारभरिते ह्रदये मदीये, मात: सदैव कुरु वासमुदारभावे ।

स्वीयाखिलावयवनिर्मलसुप्रभाभि:, शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम ।।10।।

 

ब्रह्मा जगत सृजति पालयतीन्दिरेश:, शम्भुर्विनाशयति देवि तव प्रभावै: ।

न स्यात्कृपा यदि तव प्रकटप्रभावे, न स्यु: कथंचिदपि ते निजकार्यदक्षा: ।।11।।

 

लक्ष्मीर्मेधा धरा पुष्टिर्गौरी तुष्टि: प्रभा धृति: । एताभि: पाहि तनुभिरष्टाभिर्मां सरस्वति ।।12।।

 

सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम: । वेदवेदान्तवेदांगविद्यास्थानेभ्य: एव च ।।13।।

 

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विद्यारुपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोsस्तु ते ।।14।।

 

यदक्षरं पदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत । तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ।।15।।

। इति श्री सरस्वती स्तोत्र समाप्त ।

 

सरस्वती स्तोत्र के लाभ

सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से विद्या की देवी मां सरस्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिषाचार्यों की माने तो उनका कहना है कि जिन जातकों का मन पढ़ाई में नहीं लगता है उन्हें जरूर मां सरस्वती के स्तोत्र का पाठा रोजाना करना चाहिए। इससे उनका मन शिक्षा की ओर आकर्षित होता है। बुद्धि भी प्रखर होती है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग में आ रही बाधाएं भी दूर होती है। जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। जीवन में सफल होता है।

 

सरस्वती स्तोत्र विधि

सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। पूजा विधि इस प्रकार है। सबसे पहले मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप और अगरबत्ती जलानी चाहिए। इसके बाद शुद्धि और आचमन लें और फिर चंदन लगाएं। चंदन लगाते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें। चन्‍दनस्‍य महत्‍पुण्‍यम् पवित्रं पापनाशनम्, आपदां हरते नित्‍यम् लक्ष्‍मी तिष्‍ठतु सर्वदा।' फिर माता को श्रृंगार के सामान भेंट करें। अब स्तोत्र का पाठ आरंभ करें। स्तोत्र पाठ के बाद आरती कर प्रसाद के रुप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाईयां चढ़ाकर सभी में बांट दें। अपने सामर्थ्य के हिसाब से पूजा करें। दी गई विधि सामान्य है अपने राशि के अनुसार पूजा विधि जानने के लिए बात करें। देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से। अभी बात करने के लिए यहां क्लिक करें।


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