योग

सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार योग की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली क्रियाओं में से एक है। यह केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने वाली एक संपूर्ण साधना है। भारतीय संस्कृति में सूर्य को ऊर्जा, जीवन और चेतना का स्रोत माना गया है, और सूर्य नमस्कार उसी ऊर्जा को अपने भीतर जागृत करने का माध्यम है।

आज के तेज़ भागदौड़ भरे जीवन में सूर्य नमस्कार एक ऐसा अभ्यास है, जो आपको शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से शांत और आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाता है।

सूर्य नमस्कार क्या है?

सूर्य नमस्कार 12 योगासन का एक क्रम (sequence) है, जिसे एक निश्चित लय और श्वास-प्रश्वास के साथ किया जाता है। हर आसन शरीर के अलग-अलग हिस्सों को सक्रिय करता है और ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करता है।

यह अभ्यास सूर्योदय के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि उस समय सूर्य की किरणों में सकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है।

सूर्य नमस्कार के 12 चरण (Steps of Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार के 12 आसन इस प्रकार हैं:

  1. प्रणामासन (Pranamasana): सबसे पहले दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं और आँख बंद कर लें। ध्यान अपने आज्ञा चक्र पर केंद्रित करके सूर्य देव का आह्वान करें। इस दौरान आप सूर्य देव के मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।

  2. हस्त उत्तानासन (Hasta Uttanasana): दूसरे चरण में सांस भरते हुए दोनों भुजाओं को ऊपर की ओर ले जाएं तथा हाथों और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। विशुद्धि चक्र पर ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश करें।

  3. पादहस्तासन (Padahastasana): तीसरे चरण में सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। अपने हाथों को गर्दन के साथ, कानों से सटाते हुए नीचे ले जाएं और पैरों के दाएं-बाएं ओर जमीन को छुएं। ध्यान रखें घुटने सीधे रहें और माथा घुटनों को स्पर्श करे। आप अपना ध्यान मणिपूरक चक्र पर केन्द्रित करें जो आपके नाभि के पीछे स्थित हैं। कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें।

  4. अश्व संचलनासन (Ashwa Sanchalanasana): चौथे चरण में उसी स्थिति में सांस को अंदर लेते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। सीने को आगे की ओर तानें। जितना हो सके गर्दन को उतना पीछे की ओर झुकाएं। पैर तने हुए सीधे पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ होना चाहिए। इस स्थिति में कुछ समय के लिए बने रहें। ध्यान को स्वाधिष्ठान और विशुद्धि चक्र पर केंद्रित करने की कोशिश करें।

  5. दंडासन (Dandasana): पांचवें चरण में सांस को धीरे से छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। ध्यान रखें की दोनों पैरों की एड़ियां एक दूसरे से मिली हुई हों। शरीर को पीछे की ओर ताने और एड़ियों को जमीन से मिलाने की कोशिश करें। कूल्हों को जितना हो सके ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को सीने की ओर ले में आएं। ध्यान सहस्रार चक्र पर केंद्रित करने का अभ्यास करें।

  6. अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara): छठे चरण में आप सांस भरते हुए शरीर को जमीन के समानांतर लाकर साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा जमीन तक लें जाएं। कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाएं और सांस धीरे से छोड़ दें। ध्यान को अनाहत चक्र पर केंद्रित करने की कोशिश करें।

  7. भुजंगासन (Bhujangasana): सातवें चरण में जिस स्थिति में हैं आप धीरे-धीरे सांस को भरते हुए सीने को आगे की ओर ताने और हाथों को सीधा करें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने ज़मीन को छुए और पैरों के पंजे खड़े हों।

  8. पर्वतासन (Parvatasana): सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) के आठवें चरण में सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे की ओर ले जाएं। ध्यान रखें कि दोनों पैरों की एड़ियां मिली हुई हों। अब आपको पीछे की ओर शरीर को ले जाना है और एड़ियों को जमीन पर लाने का प्रयास करें। कूल्हों को जितना हो सके ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को सीने के करीब ले आएं।

  9. अश्व संचलनासन: नौवें चरण में इसी स्थिति में सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। सीने को आगे की ओर तानें। गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। पैरों को तानते हुए सीधे पीछे की ओर और पैर का पंजा खड़ा हुआ हो। इस स्थिति में कुछ समय के लिए बने रहें।

  10. पादहस्तासन: दसवें चरण में आपको इसी स्थिति में सांस को धीरे- धीरे छोड़ना है और शरीर को आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए हो, हाथों को नीचे लें जाकर पैरों के दाएं-बाएं ओर जमीन से सटाएं। ध्यान रखें कि घुटने सीधे रहें।

  11. हस्त उत्तानासन: सूर्य नमस्कार के ग्यारवें चरण में सांस लेते हुए दोनों हाथों को कान से सटाते हुए ऊपर की ओर ले जाएं तथा हाथों और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएंं।

  12. प्रणामासन: सूर्य नमस्कार के अंतिम चरण में आपको एक बार पुनः शुरूआती स्थिति में आ जाएं।

इन 12 चरणों को मिलाकर एक चक्र पूरा होता है।

सूर्य नमस्कार करने का सही समय

  • सुबह सूर्योदय के समय

  • खाली पेट

  • खुली हवा में या शांत वातावरण में

  • स्नान के बाद करना अधिक लाभकारी

सूर्य नमस्कार के लाभ

1. शारीरिक लाभ

  • पूरे शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है

  • वजन कम करने में मदद करता है

  • पाचन तंत्र को बेहतर करता है

  • रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है

2. मानसिक लाभ

  • तनाव और चिंता को कम करता है

  • ध्यान और एकाग्रता बढ़ाता है

  • मानसिक शांति प्रदान करता है

3. आध्यात्मिक लाभ

  • सूर्य ऊर्जा से जुड़ाव बढ़ता है

  • चक्रों को सक्रिय करता है

  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है

सूर्य नमस्कार के 12 मुख्य मंत्र (12 Mantras)

सूर्य नमस्कार करते समय हर आसन के साथ एक मंत्र बोला जाता है, जिससे इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है:

  1. ॐ मित्राय नमः (Om Mitraya Namah) – सभी के मित्र

  2. ॐ रवये नमः (Om Ravaye Namah) – ऊर्जा का प्रकाश फैलाने वाले

  3. ॐ सूर्याय नमः (Om Suryaya Namah) – गतिविधि के प्रेरक

  4. ॐ भानवे नमः (Om Bhanave Namah) – प्रकाश देने वाले

  5. ॐ खगाय नमः (Om Khagaya Namah) – आकाश में चलने वाले

  6. ॐ पूष्णे नमः (Om Pushne Namah) – पोषण करने वाले

  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः (Om Hiranyagarbhaya Namah) – सृजन शक्ति

  8. ॐ मरीचये नमः (Om Marichaye Namah) – किरणों के स्वामी

  9. ॐ आदित्याय नमः (Om Adityaya Namah) – अदिति के पुत्र

  10. ॐ सवित्रे नमः (Om Savitre Namah) – सकारात्मक ऊर्जा देने वाले

  11. ॐ अर्काय नमः (Om Arkaya Namah) – पूजनीय

  12. ॐ भास्कराय नमः (Om Bhaskaraya Namah) – ज्ञान के प्रकाशक

13वां समर्पण मंत्र

ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नमः  (Om Shri Savitri Suryanarayanaya Namah)

यह मंत्र सूर्य नमस्कार के अंत में बोला जाता है और यह सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।

सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां

  • शुरुआत धीरे-धीरे करें

  • सांसों का सही तालमेल रखें

  • खाली पेट ही अभ्यास करें

  • यदि कोई गंभीर बीमारी हो तो डॉक्टर से सलाह लें

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

  • गर्भवती महिलाएं

  • हृदय रोगी

  • उच्च रक्तचाप वाले लोग

  • कमर या गर्दन दर्द वाले लोग

कितने सूर्य नमस्कार करने चाहिए?

  • शुरुआती: 5–7 चक्र

  • मध्यम स्तर: 10–15 चक्र

  • उन्नत स्तर: 20+ चक्र

नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों में सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं।

सूर्य नमस्कार व विज्ञान

सूर्य नमस्कार का अभ्यास प्रात: काल में जब सूर्य का रंग लाला होता है तब करना सबसे उत्तम माना जाता है। क्योंकि तब उस समय सूर्य से अल्ट्रा वायलेट किरणें निकलती हैं। विज्ञान में इस किरण का काफी महत्व है। वर्तमान में कृत्रिम अल्ट्रा वायलेट किरणों द्वारा कई रोगों का उपचार किया जा रहा है। ऐसे में प्राकृतिक अल्ट्रा वायलेट किरणों में सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया जाय तो कितना लाभ होगा, यह कोई भी विचारशील मनुष्य समझ सकता हैं।

सूर्य नमस्कार एक पूर्ण बॉडी वर्कआउट है, जिसमें कार्डियो, स्ट्रेचिंग और मेडिटेशन तीनों शामिल हैं।

  • यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है

  • हार्मोन संतुलन में मदद करता है

  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है

सूर्य नमस्कार और चक्र संतुलन

सूर्य नमस्कार शरीर के 7 मुख्य चक्रों को सक्रिय करता है:

  • मूलाधार

  • स्वाधिष्ठान

  • मणिपुर

  • अनाहत

  • विशुद्ध

  • आज्ञा

  • सहस्रार

इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है।

आध्यात्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में सूर्य को आत्मा का प्रतीक माना गया है। सूर्य नमस्कार केवल शरीर का व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति का मार्ग भी है।

यह अभ्यास आपको प्रकृति से जोड़ता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

सूर्य नमस्कार और ध्यान (Meditation)

अगर सूर्य नमस्कार को ध्यान के साथ किया जाए, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

  • हर आसन में श्वास पर ध्यान दें

  • मंत्रों का उच्चारण करें

  • मन को शांत रखें

निष्कर्ष

सूर्य नमस्कार एक ऐसा योग अभ्यास है, जो आपके जीवन को पूरी तरह बदल सकता है। यह न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को शांत और आत्मा को जागरूक करता है।

अगर आप रोज़ाना सिर्फ 10–15 मिनट सूर्य नमस्कार करते हैं, तो आप खुद में एक नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे।

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