Skip Navigation Links
गीता जयंती 2016 - भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में दिया था गीता का उपदेश


गीता जयंती 2016 - भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में दिया था गीता का उपदेश

कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोSस्त्वकर्मणि ||


मनुष्य के हाथ में केवल कर्म करने का अधिकार है फल की चिंता करना व्यर्थ अर्थात निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिये। स्वंय भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुखारबिंद से कुरुक्षेत्र की धरा पर श्रीमद्भगवदगीता का उपदेश दिया। गीता का ज्ञान गीता पढ़ने वाले को हर बार एक नये रूप में हासिल होता है। मानव जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं है जिसकी व्याख्या गीता में न मिले। बहुत ही साधारण लगने वाले हिंदू धर्म के इस पवित्र ग्रंथ की महिमा जितनी गायी जाये उतनी कम है। किसी भी धर्म में ऐसा कोई ग्रंथ नहीं है जिसके उद्भव का जिसकी उत्पति का दिन महोत्सव के रूप में मनाया जाता हो एकमात्र गीता ही वह ग्रंथ है जिसके आविर्भाव के दिन को बतौर जयंती मनाया जाता है।


कब मनाई जाती है गीता जयंती


ब्रह्मपुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दिया था। इसलिये इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हिंदू धर्म के अनुयायी श्रीमद्भगवद् गीता का पाठ करवाते हैं। वर्तमान में गीता की लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर होने लगी है, विभिन्न भाषाओं में इसके अनुवाद से पूरी दुनिया में गीतोपदेश की स्वीकार्यता मानवता के उद्धारक, कल्याणकारी ग्रंथ के रूप में होने लगी हैं। अब गीता जयंती के उत्सव में विभिन्न धर्मों के लोग भी बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं।


क्या है कथा


गीता के आविर्भाव की कहानी महाभारत में मिलती है। दरअसल गीता महाभारत के अध्याय का ही हिस्सा है। हुआ यूं कि जब कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरव और पांडव एक दूसरे के आमने सामने हो गये और युद्ध की घड़ी आ गई तो अर्जुन ने अपने सामने गुरु द्रोण, भीष्म पितामह आदि को सामने पाया। उस समय उसे आभास हुआ कि वह किसके लिये युद्ध कर रहा है, किसके खिलाफ कर रहा है, ये सब तो मेरे अपने हैं, इनकी गोद में मैं खेला हूं, इनसे मैंने शिक्षा प्राप्त की है, ये मेरे ही भाई-बंधु हैं इन्हें मारकर हासिल किये मुकुट को मैं कैसे धारण कर सकूंगा। कुल मिलाकर अर्जुन ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अवसादग्रस्त होकर हथियार त्याग दिये। ऐसे में उनके सारथी बने भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य विमुख होने बचाने के लिये गीता का उपदेश दिया। इसमें उन्हें आत्मा-परमात्मा से लेकर धर्म-कर्म से जुड़ी अर्जुन की हर शंका का निदान किया। भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुये ये संवाद ही श्रीमद्भगवद गीता का उपदेश हैं। इस उपदेश के दौरान ही भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपना विराट रूप दिखलाकर जीवन की वास्तविकता से उनका साक्षात्कार करवाते हैं। तब से लेकर अब तक गीता के इस उपदेश की सार्थकता बनी हुई है और चिरकाल तक बनी रहेगी क्योंकि यह स्वयं भगवान के मानवता के कल्याण के लिये निकला उपदेश है।


भगवद् गीता का महत्व


श्रीमद् भगवद् गीता का मानव जीवन के लिये बहुत अधिक महत्व है। इसका उपदेश मनुष्य को जीवन की वास्तविकताओं से परिचित करवाता है। उन्हें निस्वार्थ रूप से कर्म करने के लिये प्रेरित करता है। इन्हें कर्तव्यपरायण बनाता है। सबसे अहम बात यह भी है कि जब भी आप किसी भी तरह की शंका में घिरे हों, गीता का अध्ययन करें आपका उचित मार्गदर्शन अवश्य होगा। इसके अध्ययन, श्रवण, मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता का भाव आता है। लेकिन इसके संदेश में मात्र संदेश नहीं हैं बल्कि ये वो मूल मंत्र हैं जिन्हें हर कोई अपने जीवन में आत्मसात कर पूरी मानवता का कल्याण कर सकता है। गीता अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आत्मज्ञान से भीतर को रोशन करती है। अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम, लोभ आदि से मुक्ति का मार्ग बताती है गीता। दरअसल गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा अपने भक्तों के उद्धार के लिये गाया हुआ मधुर गीत ही है। अर्जुन तो उसे हम तक पंहुचाने का जरिया मात्र बने हैं।


कब है गीता जयंती 2016 में 


गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है इस दिन को मोक्षदा एकादशी का उपवास भी रखा जाता है। 2016 में यह तिथि अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 10 दिसंबर को मनाई जायेगी।

भगवान श्री कृष्ण आपकी मनोकामनाओं को पूर्ण करें व भगवद् गीता आपके जीवन के अंधकार को मिटाकर उसे ज्ञान से रोशन करे। आप सभी को एस्ट्रोयोगी की ओर से गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।


संबंधित लेख

गीता सार   |   गंगा मैया देती हैं जीवात्मा को मोक्ष   |   गौ माता - क्यों हिंदू मानते हैं गाय को माता   |   मंत्र करते हैं सकारात्मक ऊर्जा का संचार

गायत्री जयंती – विश्वामित्र ने पंहुचाया सर्वसाधारण तक गायत्री मंत्र   |   भक्तों की लाज रखते हैं भगवान श्री कृष्ण   |   मार्गशीर्ष – जानिये मार्गशीर्ष मास के व्रत व त्यौहार




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

माँ चंद्रघंटा - नवरात्र का तीसरा दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा विधि

माँ चंद्रघंटा - नव...

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नामचंद्रघंटाहै। नवरात्रि उपासनामें तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह कापूजन-आरा...

और पढ़ें...
माँ कूष्माण्डा - नवरात्र का चौथा दिन माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा विधि

माँ कूष्माण्डा - न...

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था, तब द...

और पढ़ें...
दुर्गा पूजा 2017 – जानिये क्या है दुर्गा पूजा का महत्व

दुर्गा पूजा 2017 –...

हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा की जाती है उत्सव मनाये जाते हैं। उत्त...

और पढ़ें...
जानें नवरात्र कलश स्थापना पूजा विधि व मुहूर्त

जानें नवरात्र कलश ...

 प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रे आते है। पहले नवरात्रे चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि ...

और पढ़ें...
नवरात्र में कैसे करें नवग्रहों की शांति?

नवरात्र में कैसे क...

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मां दुर्गा की आराधना का पर्व आरंभ हो जाता है। इस दिन कलश स्थापना कर नवरात्रि पूजा शुरु होती है। वैसे ...

और पढ़ें...