2020 में क्या कहती है भारत की कुंडली?

26 दिसम्बर 2019

वर्षांत का समय जैसे जैसे नजदीक आने लगता है नववर्ष की ओर हम आकर्षित होने लगते हैं। जानें क्यों एक नई उम्मीद, एक नया उल्लास, नई आशाएं मन में जागने लगती हैं। जाने वाले वर्ष की समीक्षा होने लगती है कि हमने इस वर्ष में क्या खोया है और क्या पाया है क्या छूट गया है जिसे हम पकड़ सकते थे आदि आदि। देखा जाये तो 2019 काफी अहम साल रहा है। इस साल को नागरिकता संशोधन अधिनियम व राम मंदिर जैसे फैसलों की समीक्षा का साल भी कहा जा सकता है। राजनीति, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक तौर पर भी यह साल काफी अहम रहा है। राजनीतिक तौर पर साल 2019 में फिर से एक बार केंद्र की सत्ता पर नरेंद्र मोदी दुबारा पीएम के तौर पर काबिज हुए। तीन तलाक व राम मंदिर का मुद्दा इस वर्ष मुखर रहा तो भीड़ द्वारा हमलों की बढ़ती घटनाओं से सामाजिक सद्भाव में कमी आयी है। ऐसे में 2020 में ग्रहों की दशा व दिशा का क्या प्रभाव भारत पर पड़ेगा? 2020 में क्या कहती है भारत की कुंडली? आइये जानते हैं।

 

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15 अगस्त 1947 मध्यरात्रि के समय जब देश की आज़ादी का परचम लहराया तब पुष्य नक्षत्र में भारत की कुंडली वृष लग्न की बनी। इसके अनुसार भारत की राशि कर्क है। इस समय भारत पर राशि स्वामी चंद्रमा की महादशा चल रही है जोकि 2025 तक रहेगी। वर्ष 2020 की कुंडली में जनवरी महीने में 1 तारीख को वृश्चिक का उदय होगा, स्वयं लग्नेश लग्न में हैं। 

 

भारत के लिये कैसा रहेगा 2020?

वर्ष 2020 भारत के लिए कई बड़ी घटनाएं एवं चुनौती लेकर आया है। इस वर्ष भारत की कुंडली क्या कहती है? देश किस दिशा की ओर जाएगा? विश्व गुरु बनने का सपना पूरा होगा या नही, सांस्कृतिक और सामाजिक तौर पर साल 2020 भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। CAB, NRC आदि मुद्दे क्या दिशा लेंगे? राम मंदिर मुद्दा समाप्त होकर भी खत्म नहीं हुआ है, क्या मंदिर मन अनुरूप बनेगा या नहीं? इन सब सवालों के साथ भारत की कुडंली का हम विश्लेषण करेंगे। 

 

वर्तमान वर्ष 2020 की कुंडली में जनवरी महीने में 1 तारीख वृश्चिक लग्न का उदय होगा, स्वंय लग्नेश लग्न में हैं। पांच ग्रह दूसरे भाव में और राहु केतु अक्ष में रहेंगे। उत्तरी क्षेत्र में तनाव और संघर्ष बने रहने की संभावना है। मंगल का अपनी राशि में होना रक्तपात, प्रदर्शन और दंगा का प्रतीक है। राहु केतु के अक्ष से जासूसी आदि से जनता का संबंध बढ़ेगा। इस वर्ष प्रमादी नामक नव सम्वत्सर का उदय होगा। इस वर्ष बारिश होने की कम संभावना है जिसकी वजह से कृषि वर्ग को नुकसान हो सकता है। साथ ही पीने के पानी की कमी इस वर्ष देखने को मिलेगी तथा अनाज में तेजी रहेगी। 

 

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राजनैतिक दलों में अस्थिरता बढ़ेगी। विपक्ष में एक जुटता का अभाव रहेगा, इस वर्ष देश के बहुत हिस्सों में संघर्ष और युद्ध जैसे हालात बनने की संभावना है। अष्टक वर्ष में केवल 20 बिंदु होने और शनि का मकर राशि में गोचर होने से संघर्ष बना रहेगा। स्वतंत्र भारत की कुंडली में मकर भाग्य स्थान पर स्थित है। आर्थिक तौर पर मुथा के द्वादश स्थान पर होने से सरकार का व्यय बढ़ेगा और लाभ की संभावना कम रहेगी। साल 2020 में भारत के विकास में पंचम स्थान के पीड़ित होने से विकास योजनाओं में अड़चनें रहेंगी और देरी से पूर्ण होगी। साथ ही नई योजनाएं कम ही प्रभाव होंगी। 

 

मार्च महीने में सरकार कई लोक लुभावन परियोजनाएं लाएगी और इकोनॉमी के मुद्दों पर कार्य करेगी। सरकार इनकम टैक्स कम कर सकती है क्योंकि मार्च महीने में गुरु लाभ भाव में है परंतु केतु का प्रभाव आय में कमी करेगा। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत का नाम ऊंचा रहेगा। अंतरिक्ष विज्ञान में देश एक नई ऊंचाई छुएगा। विपक्ष के मजबूत होने से विकास योजनाओं की गति धीमी रहेगी। द्वितीय भाव यानि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। यह स्थिति 15 अगस्त के आसपास बनेगी, जब शनि द्वितीय भाव में गणतंत्र भारत की कुंडली में होंगे। 

 

मई महीने में शुक्र अस्त होकर बाढ़ और प्राकृतिक प्रकोपों को बढ़ावा देंगे। जून महीने में सूर्य ग्रहण होने पर खाद्य पदार्थों में तेजी रहेगी। जुलाई महीने में सूर्य शनि समसप्तक रहकर महंगाई में वृद्धि तथा राजनैतिक टकराव आदि को बढ़ा सकते हैं। मुख्य राजनैतिक दल का मार्ग सुगम नहीं रहेगा तथा अस्थिरता बनी रहेगी। दिसंबर महीने में वृश्चिक राशि स्वामी मंगल पर शनि की दृष्टि होने से केंद्रीय सरकार को चुनौती का सामना करना पड़ेगा परंतु सूझबूझ से इसको सुलझा दिया जाएगा। 

 

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