2019 में क्या कहती है भारत की कुंडली?

2019 में क्या कहती है भारत की कुंडली?


वर्षांत का समय जैसे जैसे नजदीक आने लगता है नववर्ष की ओर हम आकर्षित होने लगते हैं। जानें क्यों एक नई उम्मीद, एक नया उल्लास, नई आशाएं मन में जागने लगती हैं। जाने वाले वर्ष की समीक्षा होने लगती है कि हमने इस वर्ष में क्या खोया है और क्या पाया है क्या छूट गया है जिसे हम पकड़ सकते थे आदि आदि। देखा जाये तो 2018 काफी अहम साल रहा है। इस साल को नोटबंदी व जीएसटी जैसे फैसलों की समीक्षा का साल भी कहा जा सकता है। राजनीति, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक तौर पर भी यह साल काफी अहम रहा है। राजनीतिक तौर पर इसे 2019 के सेमिफाइनल के रूप में भी देखा गया। तीन तलाक व राम मंदिर का मुद्दा इस वर्ष मुखर रहा तो भीड़ द्वारा हमलों की बढ़ती घटनाओं से सामाजिक सद्भाव में कमी आयी है। ऐसे में 2019 में ग्रहों की दशा व दिशा का क्या प्रभाव भारत पर पड़ेगा? 2019 में क्या कहती है भारत की कुंडली? आइये जानते हैं।


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15 अगस्त 1947 मध्यरात्रि के समय जब देश की आज़ादी का परचम लहराया तब पुष्य नक्षत्र में भारत की कुंडली वृष लग्न की बनी। इसके अनुसार भारत की राशि कर्क है। इस समय भारत पर राशि स्वामी चंद्रमा की महादशा चल रही है जोकि 2025 तक रहेगी। साल 2019 की शुरुआत के समय भारत की कुंडली के अनुसार भारत पर बुध की अतंर्दशा तो सूर्य प्रत्यतंर दशा में गोचर कर रहे हैं।


भारत के लिये कैसा रहेगा 2019?

यदि बात करें कि भारत के लिये साल 2019 कैसा रहेगा तो नव वर्ष का आरंभ कन्या लग्न में हो रहा है जो कि भारत की राशि से देखा जाये तो तीसरा स्थान है। वर्ष लग्न स्वामी बुध हैं जो भारत की कुंडली के अनुसार पंचम घर के कारक हैं। कुल मिलाकर साल 2019 शिक्षा और नई तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी रह सकता है या अपना विशेष मुकाम हासिल कर सकता है। वर्ष लग्न के अनुसार लग्न स्वामी बुध पराक्रम भाव में विचरण करने से भारत अपने पराक्रम एवं मेहनत के बल पर विश्व में भी अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हो सकता है। पराक्रम में बुध के साथ सूर्य के होने से जहां बुधादित्य युति बन रही है वहीं शनि भी इसी घर में विराजमान हैं। जो कि 2019 में भारत के लिये काफी चुनौतिपूर्ण समय के संकेत कर रहे हैं। 

भारत की राशि के स्वामी चंद्रमा वर्ष कुंडली में सप्तम भाव में शुक्र के साथ गोचर कर रहे हैं। यह संकेत कर रहे हैं कि भारत 2019 में सांस्कृतिक तौर पर दुनिया में अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ सकता है। कला के मामले में दुनिया भर में भारत अपना नाम कमा सकता है। विश्व के अलग-अलग देशों में भारत की पहचान बढ़ेगी। किसी विशेष क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व भी कर सकता है।

मार्च में भारत को आर्थिक रूप से चुनौतिपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है या कह सकते हैं कुछ क्षेत्रों में धंधें में मंदे के संकेत मिल रहे हैं। आर्थिक तौर पर स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती। वित्तिय घाटा बढ़ने के आसार हैं। इसका कारण है राहू इस समय राशि परिवर्तन करेंगें। निर्यात के मामले में भी भारत को प्रतिद्वंदी देशों से चुनौतियों का सामना इस समय करना पड़ सकता है।

मार्च के अंतिम दिनों में गुरु ग्रह बृहस्पति अपनी राशि बदल रहे हैं। अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह के मध्य में बृहस्पति वक्री होंगे व उतर्राध में वह वापस वृश्चिक राशि में आ जायेंगें। इसके बाद शनि भी वक्री हो जायेंगें। कुल मिलाकर देश के लिये हर क्षेत्र में यह समय उतार-चढ़ाव के संकेत कर रहा है। विकसित देशों द्वारा संचालित कुछ संस्थाओं द्वारा भारत पर दबाव भी बनाने के प्रयास भी किये जा सकता है।

कुल मिलाकर वर्ष के पूर्वाध में भारत के लिये समय मिले जुले परिणाम लेकर आने वाला रह सकता है।

लेकिन अगस्त के बाद हालातों में सुधार दिखाई देने लगेगा। बृहस्पति मार्गी हो जायेगें, शनि भी मार्गी हो जायेंगें। तो इसके काफी सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगेंगें। कुल मिलाकर एक बेहतर वर्षांत की उम्मीद भारत 2019 से कर सकता है। हालांकि यह पूरा साल भारत के प्रत्येक नागरिक के लिये स्वयं को साबित करने वाला साल रहने वाला है। इसलिये देश के प्रत्येक व्यक्ति का योगदान इसमें शामिल है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में 2019 में ही संसदीय चुनाव भी होने हैं जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का मत बहुत महत्वपूर्ण रहेगा। यहीं से अगले पांच साल के लिये देश का भविष्य भी तय होगा। 

यह तो रहा भारत की कुंडली का हाल आपकी कुंडली क्या कहती है इस साल जानने के लिये एस्ट्रोयोगी पर बात करें देश के जाने माने ज्योतिषाचार्यों से। 

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