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ज्येष्ठ मास 2018 – जानें ज्येष्ठ मास के व्रत व त्याहारों की सही तिथि


ज्येष्ठ मास 2018 – जानें ज्येष्ठ मास के व्रत व त्याहारों की सही तिथि

ज्येष्ठ मास का नाम सुनते ही तपती हुई दुपहरी का चित्र ज़हन में जरूर बनता होगा। बनेगा भी क्यों नहीं इस मास में झूलसा देने वाली गर्मी जो पड़ती है। गर्मियां वैसे तो फाल्गुन मास के उतरते समय ही शुरू हो जाती हैं फिर चैत्र और वैशाख पार करने पर जब ज्येष्ठ मास का आरंभ होता है तो गर्मी का मौसम ऊफान पर होता है। इसलिये हमारे ऋषि-मुनियों ने ज्येष्ठ में जल का महत्व बहुत अधिक माना है। जल को समर्पित व्रत और त्यौहार भी इसी मास में मनाये जाते हैं। गर्मियों में पानी की किल्लत से हर कोई परेशान रहता है यही कारण हैं कि बड़े बुजूर्गों ने इन पर्व त्यौहारों के जरिये पानी का महत्व समझाने का प्रयास किया है। जल के महत्व को बताने वाले ज्येष्ठ मास की शुुरुआत 1 मई से हो रही है, 28 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ ही ज्येष्ठ माह की समाप्ति होगी।


कैसे पड़ा इस मास का नाम ज्येष्ठ?

ज्येष्ठ हिंदू पंचाग के अनुसार चंद्र मास का तीसरा महीना होता है चैत्र और वैशाख मास के बाद आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह मास अक्सर मई और जून के महीने में पड़ता है। जैसा कि सभी चंद्र मासों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं ज्येष्ठ माह भी ज्येष्ठा नामक नक्षत्र पर आधारित है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है इसी कारण इस माह का नाम ज्येष्ठ रखा गया है।


क्यों खास है वर्ष 2018 में ज्येष्ठ मास

2018 में ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास भी पड़ रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि इस बार ज्येष्ठ मास की अवधि दो मास के बराबर होगी। 1 मई को यह मास आरंभ होगा। इसके पश्चात 16 मई को अधिक मास की शुरुआत हो रही है। 29 मई को पहली ज्येष्ठ पूर्णिमा रहेगी जो कि अधिक मास में पड़ने के कारण अशुद्ध मानी जाती है। इसके पश्चात अधिक मास का समापन ज्येष्ठ मास की दूसरी अमावस्या जो कि 13 जून को पड़ रही है, को होगा। ज्येष्ठ मास का समापन 28 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ ही होगा। चूंकि ज्येष्ठ मास दो बार है इसलिये ज्येष्ठ माह में मनाये जाने वाले पर्वों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होना भी स्वाभाविक है। इसलिये व्रत व त्यौहार संबंधी यह जानकारियां आपके लिये खास हो सकती हैं-


ज्येष्ठ माह के व्रत व त्यौहार

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में तो कोई खास पर्व नहीं है लेकिन शुक्ल पक्ष में जल के महत्व को बताने वाले दो महत्वपूर्ण त्यौहार गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पड़ते हैं। गंगा नदी का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। क्योंकि गुणों के मामले में गंगा नदी का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। आइये एक नज़र डालते हैं इस माह के महत्वपूर्ण व्रत व त्यौहारों के बारे में-


अपरा एकादशी – एकादशियां तो सभी पावन मानी जाती हैं लेकिन ज्येष्ठ मास की कृष्ण एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अपरा एकादशी का त्यौहार 11 मई को है।

ज्येष्ठ अमावस्या – ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसका एक कारण तो यह है कि अमावस्या तिथि पूर्वजों की शांति के दान-तर्पण आदि के लिये बहुत ही शुभ मानी जाती है। दूसरा ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व इसलिये बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन शनिदेव की जयंती मनाई जाती है तो वहीं वट सावित्री का व्रत भी ज्येष्ठ अमावस्या को ही रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या 15 मई को है।

अधिक मास - ज्येष्ठ मास में ही इस बार अधिक मास भी पड़ रहा है। 16 मई से यह मास आरंभ होगा।

गंगा दशहरा – गंगा दशहरा का त्यौहार ज्येष्ठ मास में मनाया जाने वाला विशेष त्यौहार है। यह त्यौहार मोक्षदायिनी मां गंगा के महत्व को बतलाता ही है साथ ही जल के सरंक्षण का संदेश भी देता है। गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व 24 मई को है।

पद्मिनी एकादशी - अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि 25 मई को रहेगी।

प्रथम पूर्णिमा - अधिक मास की पूर्णिमा जो कि ज्येष्ठ मास की प्रथम पूर्णिमा भी है 29 मई को पड़ रही है।

परम एकादशी - अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परम एकादशी कहा जाता है। यह तिथि 10 जून को है।

दूसरी अमावस्या - ज्येष्ठ मास की इस अमावस्या को अधिक मास की समाप्ति होगी। यह तिथि 13 जून को होगी।

निर्जला एकादशी – निर्जला एकादशी का उपवास काफी कठिन होता है। इस दिन जल की एक बूंद तक व्रती को ग्रहण नहीं करनी होती साथ ही उसे दूसरों को जल पिलाना होता है। सब्र संतोष और जल संरक्षण सहित जल के महत्व को समझने का यह उपवास ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को रखा जाता है। निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में श्रेष्ठ मानी जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार निर्जला एकादशी का उपवास 23 जून को है। इसी तिथि को गायत्री जयंती भी मनाई जाती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा/ वट पूर्णिमा व्रतकबीरदास जयंती – वट पूर्णिमा व्रत, वट सावित्री व्रत की तरह ही है। इस दिन भी विवाहित महिलाएं सुख समृद्धि और अपने पति की दीर्घायु के लिये उपवास रखती हैं लेकिन वट पूर्णिमा व्रत मुख्यत: महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में यह ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जबकि उत्तर भारत के राज्यों में यह ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाता है। वट पर्णिमा का व्रत 27 जून को रखा जायेगा। हालांकि 28 जून को भी ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जायेगी, इसी दिन भक्तिकाल के प्रमुख संत कबीरदास जी की जयंती भी मनाई जाती है।

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