Skip Navigation Links
युद्ध देवता मंगल का कैसे हुआ जन्म पढ़ें पौराणिक कथा


युद्ध देवता मंगल का कैसे हुआ जन्म पढ़ें पौराणिक कथा

मंगल ग्रह को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मंगल से प्रभावित जातक यदि अपनी ऊर्जा का रचनात्मक व सकारात्मक इस्तेमाल करे तो उसकी प्रसिद्धि की गूंज हर दिशा में सुनाई दे सकती है लेकिन यदि इस तरह के जातक नकारात्मक रास्तों पर निकल पड़ें तो वह बड़े स्तर पर विध्वंस भी कर डालते हैं। मंगल ग्रह को युद्ध का देवता भी माना जाता है। मंगल की तुलना अक्सर पृथ्वी से की जाती है और वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को तलाशने में लगे हैं। लेकिन हिंदूओं के पौराणिक ग्रंथों में तो मंगल का पृथ्वी से सीधा संबंध है उसे पृथ्वी का पुत्र माना जाता है और भौमेय कहा जाता है। क्या है मंगल ग्रह की कहानी आइये जानते हैं।


पौराणिक कथा


मंगल ग्रह के उत्पन्न होने की कहानी स्कंदपुराण में मिलती है इसके अनुसार उज्जयिनी पुरी में एक अंधक नाम के दैत्य का राज था। उसका एक बहुत ही बलशाली और पराक्रमी पुत्र था, नाम था कनक दानव। कनक ने एक बार इंद्र को युद्ध के लिये ललकारा, दोनों के बीच भंयकर युद्ध हुआ जिसमें कनक दानव मारा गया अब इंद्र कनक के पिता अंधक की शक्ति को जानता था। वह अंधक के साथ युद्ध की कल्पना से ही घबरा गया और सीधे भगवान शिव शंकर की शरण ली। अब अंधकासुर भी अपने पुत्र की हत्या का बदला लेने के लिये आ पंहुचा। अंधक से भगवान शिव स्वंय युद्ध करने लगे। घमासान युद्ध छिड़ गया। युद्ध के दौरान ही भगवान शिव के मस्तक से पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी। इसी बूंद से अंगारे की तरह बिल्कुल लाल अंग वाले भूमिपुत्र मंगल का जन्म हुआ। ब्राह्मणों ने अंगारक, रक्ताक्ष महादेव पुत्र आदि नामों से मंगल की आराधना की और ग्रहों के बीच उनको प्रतिष्ठित किया।

मान्यता है कि ग्रहों के बीच प्रतिष्ठित होने के बाद जिस स्थान पर मंगल का जन्म हुआ वहां स्वंय ब्रह्मा जी ने मंगलेश्वर नामक उत्तम शिवलिंग की स्थापना की थी। उज्जैन में आज भी यह मंगलनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

मंगल की उत्पति के एक कहानी ओर है। यह किस्सा है ब्रह्म वैवर्त पुराण का। इसमें लिखा है कि हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष ने एक बार पृथ्वी को चुरा लिया और उसे सागर में ले गया। तब उसे बचाने के लिये भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लिया और हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से निकाल सागर पर स्थापित किया। इसके बाद ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना करने लगे। उधर पृथ्वी अपने को बचाने वाले वाराह रूपी विष्णु पर सकाम होकर उनकी वंदना करने लगी। वाराह रूपी विष्णु भी स्वंय को रोक नहीं पाये और कामवश होकर पृथ्वी संग रति क्रीड़ा की। विष्णु और पृथ्वी के इसी संयोग से कालातंर में पृथ्वी ने एक बहुत ही तेजस्वी बालक को जन्म दिया जिसे मंगल कहा गया।

मंगल के जन्म की यही कहानी देवी भागवत में भी मौजूद है

संबंधित लेख

बुध कैसे बने चंद्रमा के पुत्र ? पढ़ें पौराणिक कथा   |  शनिदेव - क्यों रखते हैं पिता सूर्यदेव से वैरभाव   |  

 शनिदेव - कैसे हुआ जन्म और कैसे टेढ़ी हुई नजर   |   चंद्र दोष – कैसे लगता है चंद्र दोष क्या हैं उपाय   |   




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

जगन्नाथ रथयात्रा 2018 - सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देने वाली है पुरी रथयात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा 2...

उड़िसा में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में शामिल है। जगन्नाथ मंदिर, सनातन धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मपुर...

और पढ़ें...
जगन्नाथ पुरी मंदिर - जानें पुरी के जगन्नाथ मंदिर की कहानी

जगन्नाथ पुरी मंदिर...

सप्तपुरियों में पुरी हों या चार धामों में धामसर्वोपरी पुरी धाम में जगन्नाथ का नामजगन्नाथ की पुरी भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उड़िसा प्रांत के प...

और पढ़ें...
चंद्र ग्रहण 2018 - 2018 में कब है चंद्रग्रहण?

चंद्र ग्रहण 2018 -...

चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रम...

और पढ़ें...
गुप्त नवरात्र 2018 – जानिये गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि एवं कथा

गुप्त नवरात्र 2018...

देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वही इस चराचर जगत में शक्ति का संचार करती हैं। उनकी आराधना के लिये ही साल में दो बार बड़े स्तर पर लगातार नौ...

और पढ़ें...
तुला राशि में बृहस्पति की बदली चाल – जानिए किन राशियों के करियर में आयेगा उछाल

तुला राशि में बृहस...

ज्ञान के कारक और देवताओं के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति की ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बहुत अधिक मान्यता है। गुरु बिगड़ी को बनाने, बनते हुए को बिगाड़ने में समर्थ माने ...

और पढ़ें...