शनि के वक्री होने से बढ़ सकती हैं, इन दो राशियों की मुश्किलें

bell icon Sat, Jun 04, 2022
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
शनि के वक्री होने से बढ़ सकती हैं, इन दो राशियों की मुश्किलें

शनिदेव को ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में अत्यंत विशेष स्थान प्राप्त है जो व्यक्ति को कर्म के अनुसार फल देते है। शनि के वक्री होने पर कैसा होगा आपकी राशि पर असर?जानने के लिए पढ़ें।   

ज्योतिष एवं धार्मिक दृष्टि से शनि देव को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, इन्हें हिन्दू धर्म में न्याय के देवता कहा गया है, तो वहीँ ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को नवग्रहों में से प्रमुख ग्रह और मकर एवं कुंभ राशि के स्वामी माना गया है। भगवान शनि की टेढ़ी नज़र, कुंडली में शनि साढ़े सत्ती या ढैय्या लोगों के जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। जब भी शनि ग्रह अपनी राशि परिवर्तन करते है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। शनि अब बहुत जल्द ही वक्री होने जा रहे हैं, कैसा होगा आपके जीवन पर शनि के वक्री होने का प्रभाव और कैसे बचें इसके प्रभावों से? आइये जानते है। 

अच्छे या बुरे, कैसे मिलते है शनि के राशि परिवर्तन के परिणाम?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी ग्रह का राशि परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। न्याय के देवता व कर्मफलदाता शनिदेव 29 अप्रैल को मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़े सत्ती व ढैय्या की शुरुआत होती है और कुछ राशियों को इससे मुक्ति मिलती है। लेकिन जब शनि की चाल में परिवर्तन होता है, तो शनि महादशा की चपेट में वापस से कुछ राशियां आ जाएंगी। 

नवग्रहों में शनि को सबसे धीमा चलने वाला ग्रह माना गया है। शनि एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने में कम से कम ढाई साल का समय लेते हैं। शनिदेव ने 29 अप्रैल को कुंभ राशि में प्रवेश किया है, और इस राशि में शनि ग्रह के प्रवेश के साथ ही मिथुनतुला राशि वालों को शनि ढैय्या से मुक्ति मिल गई थी। वहीं कर्क व वृश्चिक राशि वाले की शनि ढैय्या शुरू हो गई हैं।

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कब हो रहे है शनि वक्री?

  • न्यायदाता शनिदेव 12 जुलाई को मकर राशि में वक्री होने जा रहा है जिसका सीधा असर एक बार फिर मिथुन व तुला राशि के जातकों पर पड़ना शुरू हो जाएगा। 
  • ज्योतिष में किसी ग्रह के वक्री होने का अर्थ होता है किसी ग्रह का उल्टी चाल से चलना। इसका मतलब है कि शनि देव वक्री होने जा रहे है। 
  • शनि की ढैय्या से मिथुन और तुला राशि फिर से चपेट में आएंगी और इन राशियों को शनि की वक्री अवस्था प्रभावित करेगी। 
  • शनि के वक्री होने पर इन राशि वालों को करियर व व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ जरूरी काम अटक सकते हैं। शनि ढैय्या की अवधि ढाई साल की होती है और इस दौरान जातक को अनेक प्रकार की शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। 

शनि के वक्री होने पर कैसे होंगे प्रभाव?

  1. शनि के वक्री होने की स्थिति में शनि देव जातकों को कर्मानुसार फल प्रदान करेंगे। अब कुछ समय के लिए शनि ग्रह मिथुन और तुला राशि को प्रभावित करेंगे जिसका सीधा असर इन राशि के जातकों के जीवन पर पड़ेगा। 
  2. आपको बता दें कि शनि की ढैय्या से प्रभावित होने पर किसी भी व्यापार में धन निवेश करने से बचना चाहिए, साथ ही इस दौरान सभी प्रकार के वित्तीय फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। वहीं, इस अवधि में करियर और नौकरी में भी सफलता प्राप्त नहीं होती है।
  3. शनि के वक्री होने पर मिथुन और तुला राशि वालों को करियर और व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आप लोगों के कुछ जरूरी काम अटक सकते हैं।

कौन से उपाय करें शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए?

शनि के वक्री होने का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन जिन दो राशियों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा वह है मिथुन और तुला राशि। मिथुन राशि और तुला राशि के जातक यदि शनि के प्रकोप से बचना और उनकी कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो इन उपायों को करना आपके लिए फलदायी होगा। 

  • शनि जयंती पर सभी राशि के जातक स्वच्छ कपड़े पहनकर शनि मंदिर में जाएं और वहां सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। ऐसा करने से आपको शनिदेव की विशेष कृपा की प्राप्ति होगी। 
  • शनि जयंती के दिन दान काले तिल, काले उड़द और सरसों का तेल आदि दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते है। 
  • यदि आप शनि जयंती के दिन किसी गरीब को दान देते हैं तो ऐसा करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिल सकता है.
  • शनि देव के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए सरसों के तेल से भरे कटोरे में अपनी परछाई देखकर उसे जरूरतमंदों को दान करें।  

शनि का वक्री होना कैसे करेगा आपके जीवन को प्रभावित? जानने के लिए अभी बात करें एस्ट्रोयोगी के वैदिक ज्योतिषियों से। 

 

✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी

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