भाद्रपद पूर्णिमा 2019 – जानें सत्यनारायण व्रत का महत्व व पूजा विधि

31 अगस्त 2020

पूर्णिमा की तिथि धार्मिक रूप से बहुत ही खास मानी जाती है विशेषकर हिंदूओं में इसे बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि माना जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास की पूर्णिमा महत्वपूर्ण होती है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा बहुत ही खास होती है। इसके खास होने के पिछे कारण यह है कि इसी पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष आरंभ होता है जो आश्विन अमावस्या तक चलते है। इस पूर्णिमा को स्नान दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। आइये जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा के महत्व व व्रत पूजा विधि के बारे में।

 

क्यों कहते हैं भाद्रपद पूर्णिमा

प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि से ही चंद्र वर्ष के महीनों के नामों का निर्धारण हुआ है। मान्यता रही है कि माह में पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उसी के अनुसार उस माह का नाम रखा जाता है। समस्त 12 महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। ऐसे में भाद्रपद पूर्णिमा भी इसे इसीलिये कहा जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा उत्तर भाद्रपदा या पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र में होता है।

 

भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व

जैसा कि इस आलेख के आमुख में हमने बताया कि भाद्रपद पूर्णिमा कई मायनों में खास मानी जाती है। एक और देश भर में गणेशोत्सव की समाप्ति से जोश भरा होता है तो वहीं अपने पूर्वजों यानि पितरों को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पूरा एक पखवाड़ा यानि श्राद्ध पक्ष इस तिथि से आरंभ होते हैं। वहीं इस पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा करने का विधान भी है। मान्यता है कि भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से उपासक के सारे कष्ट कट जाते हैं और घर सुख-समृद्धि व धन धान्य से भरा रहता है। व्रती के अपने जीवन में पद व प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है।

 

कैसे करें भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत में व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से स्वच्छ होकर, साफ वस्त्र धारण करने चाहियें। पूजा स्थल की साफ-सफाई कर उसमें भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा रखें। तत्पश्चात पूजा के लिये पंचामृत का निर्माण करें। प्रसाद के लिये चूरमा बनायें। इसके बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें। कथा के पश्चात भगवान सत्यनारायाण, माता लक्ष्मी, भगवान शिव, माता पार्वती आदि की आरती करें। इसके पश्चात प्रसाद का वितरण करें।

 

2020 में कब है भाद्रपद पर्णिमा

इस साल भाद्रपद पूर्णिमा तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितंबर माह की 01 तारीख को है। पूर्णिमा उपवास व पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि भी 02 सितंबर रहेगी। पूर्णिमा के अवसर पर सत्यनारायण पूजा भी करवायी जाती है।

पूर्णिमा तिथि आरंभ – सुबह 09:38 से (01 सितंबर 2020)

पूर्णिमा तिथि समाप्त – सुबह 10:51 बजे तक (02 सितंबर 2020)
 

अपनी कुंडली के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा पर विशेष ज्योतिषीय उपाय जानने के लिये एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें

चैत्र पूर्णिमा   |   बैसाख पूर्णिमा   |   ज्येष्ठ पूर्णिमा   |   आषाढ़ पूर्णिमा   |   पौष पूर्णिमा   |   माघ पूर्णिमा   |   फाल्गुन पूर्णिमा   |   

गुरु पूर्णिमा   |   शरद पूर्णिमा   |   बुद्ध पूर्णिमा   |   सत्यविनायक पूर्णिमा   |   श्रावण पूर्णिमा

सावन - शिव की पूजा का माह   |   सावन पूर्णिमा को लगेगा चंद्र ग्रहण राशिनुसार जानें क्या होगा असर

एस्ट्रो लेख

राहु गोचर 2020 - मिथुन से वृषभ राशि में गोचर

केतु गोचर 2020 - धनु से वृश्चिक राशि में गोचर

कन्या से तुला में बुध के परिवर्तन का क्या होगा आपकी राशि पर असर?

खर मास - क्या करें क्या न करें

Chat now for Support
Support