Skip Navigation Links
दशहरा - बुराई पर अच्छाई का दिन है विजय दशमी


दशहरा - बुराई पर अच्छाई का दिन है विजय दशमी

हिन्दू धर्म में दशहरा अथवा विजय दशमी का बहुत ही का महत्त्व है| यह दिन बुराई पर अच्छाई, झूठ पर सच्चाई की विजय का प्रतीक है| प्रत्येक वर्ष आश्विन मास की दशमी तिथि पर यह अत्यंत शुभ पर्व पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास से मनाया जाता है| इस वर्ष यह उत्साहपूर्ण पर्व 30 सितंबर 2017 को धूमधाम से मनाया जाएगा|

दशहरा नाम संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुआ है जिसे विच्छेद करने से बनता है ‘दशा’ यानि दस एवं ‘हारा’ यानी हार जिसका अर्थ है दस सर वाले रावण की हार| विजय दशमी का अर्थ है हिन्दू पंचांग की दशमी तिथि पर बुराई पर सच्चाई की विजय|

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब श्रीराम 14 वर्षों के वनवास में अपना जीवन यापन कर रहे थे तो लंकापति रावण ने उनकी पत्नी माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका की अशोक वाटिका में बंदी बना कर रखा लिया था| श्रीराम ने अपने अनुज लक्ष्मण, भक्त हनुमान और सुग्रीव, जामवंत आदि से संपन्न वानर सेना के साथ रावण की सेना से लंका में ही पूरे नौ दिनों तक युद्ध लड़ा| मान्यता है कि उस समय प्रभु राम ने देवी माँ की उपासना करी और उनके आशीर्वाद से आश्विन मास की दशमी तिथि पर अहंकारी रावण का वध किया|

एक और कथा के अनुसार असुरों के राजा महिषासुर ने देवों को पराजित कर इन्द्रलोक और समस्त पृथ्वी पर अपना वर्चस्व कायम कर दिया था| चूंकि ब्रह्मदेव के वरदान से महिषासुर को ना ही कोई पुरुष, ना कोई देव, यहाँ तक कि स्वयं त्रिदेव यानि ब्रह्मा विष्णु महेश भी उसका वध नहीं कर सकते थे| ऐसे में त्रिदेवों के साथ मिलकर सभी देवों ने अपनी शक्तियों से देवी महालक्ष्मी की उत्पत्ति की| तत्पश्चात देवी माँ ने महिषासुर के साथ उनकी सेना का वध कर देवों को पुनः स्वर्गलोक का अधिकार दिलवाया और समस्त विश्व को महिषासुर के आतंक से मुक्त करवाया| माँ की इस विजय को ही विजय दशमी के नाम से मनाया जाता है| देवी महालक्ष्मी का रूद्ररूप को माँ दुर्गा के नाम से प्रख्यात हुआ|

दशहरा शुभ मुहूर्त

दशहरा / विजय दशमी तिथि - 30 सितंबर 2017, शनिवार

विजय मुहूर्त - दोपहर 02:08 से 02:55 बजे तक

अपराह्न पूजा मुहूर्त - दोपहर 01:21से 03:42 बजे तक

दशमी तिथि प्रारंभ  - रात्रि 11:49 बजे, 29 सितंबर 2017

दशमी तिथि समाप्त - रात्रि 01:35 बजे, 01 अक्तूबर 2017

एस्ट्रोयोगी कामना करता है कि आपका जीवन सदैव सुखमय रहें। आप सभी को दशहरे / विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं| 

विजयदशमी पर आपको कैसे मिल सकती है विजय जानें अपनी कुंडली के अनुसार ज्योतिषाचार्यों से सरल उपाय। अभी परामर्श करें।

संबंधित लेख

दिवाली 2017   |     दिवाली पूजा मंत्र   |    दीपावली –  पूजन विधि और शुभ मूहूर्त   ।   दिवाली पर यह पकवान न खाया तो क्या त्यौहार मनाया   |  

लक्ष्मी-गणेश मंत्र   |   लक्ष्मी मंत्र   ।   गोवर्धन पूजा - गोवर्धन पूजा कथा और शुभ मुहूर्त   |   भैया दूज - भाई बहन के प्यार का पर्व   |   

छठ पूजा - व्रत विधि और शुभ मुहूर्त   |




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

सीता नवमी 2018 – जानें जानकी नवमी की व्रत कथा व पूजा विधि

सीता नवमी 2018 – ज...

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान राम का प्राकट्य हुआ तो माता सीता वैशाख शुक्ल नवमी को प्रकट हुई थी। यही कारण है कि हिंदू धर्मानुयायी विशेषकर वैष्णव संप्रदाय ...

और पढ़ें...
मोहिनी एकादशी 2018 – जानें मोहिनी एकादशी की व्रत कथा व पूजा विधि

मोहिनी एकादशी 2018...

वैशाख मास को भी पुराणों में कार्तिक माह की तरह ही पावन बताया जाता है इसी कारण इस माह में पड़ने वाली एकादशी भी बहुत ही पुण्य फलदायी मानी जाती है। वैशाख शुक्ल एकादशी क...

और पढ़ें...
शनि वक्री 2018 - शनि की वक्री चाल क्या होगा हाल? जानें राशिफल

शनि वक्री 2018 - श...

शनि वक्री 2018 - 18 अप्रैल 2018 को जैसे ही शनि की चाल बदलेगी उसके साथ हमें भी अपने आस-पास बहुत कुछ बदलता हुआ दिखाई देगा। यह चेंज हमें अपनी पर्सनल, प्रोफेशनल से लेकर ...

और पढ़ें...
शुक्र का वृषभ राशि में गोचर – क्या होगा असर आपकी राशि पर !

शुक्र का वृषभ राशि...

20 अप्रैल को शुक्र मेष राशि को छोड़कर स्वराशि वृषभ में प्रवेश कर रहे हैं। शुक्र को मीन राशि में उच्च तो कन्या में नीच का माना जाता है। उच्च राशि व स्वराशि के होने पर...

और पढ़ें...
जपमाला - जप माला में 108 दाने क्यों होते हैं? जानें रहस्य।

जपमाला - जप माला म...

हिन्दू धर्म में हम मंत्र जप के लिए जिस माला का उपयोग करते है, उस माला में दानों की संख्या 108 होती है। शास्त्रों में इस संख्या 108 का अत्यधिक महत्व होता है । माला मे...

और पढ़ें...