Skip Navigation Links
कूर्मा जयंती –  वास्तु दोष दूर करने के लिये श्रेष्ठ है कूर्मा जयंती


कूर्मा जयंती – वास्तु दोष दूर करने के लिये श्रेष्ठ है कूर्मा जयंती

कूर्मा जयंती प्रत्येक वर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने कूर्मा अवतार धारण किया था। इस वर्ष कूर्मा जयंती 10 मई को है। क्या आप जानते हैं कूर्मा अवतार की कहानी? कैसे मनाई जाती है कूर्मा जयंती? आइये जानते हैं एस्ट्रोयोगी के इस लेख में।

कूर्मा असल में भगवान विष्णु के अवतारों में से एक हैं। जब-जब भक्तों पर संकट मंडराता है तो जगत के पालक भगवान विष्णु अपने भक्तों की रक्षा के लिये अवतरित हुए हैं। कूर्मा अवतार को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विष्णु का दूसरा अवतार माना जाता है। कूर्मा को कच्छप अवतार भी कहा जाता है। कूर्मा दरअसल संस्कृत भाषा का शब्द है इसे हम कच्छप और कछुए के रूप में समझ सकते हैं। कछुए को ही कूर्म कहा जाता है। कुल मिलाकर भगवान विष्णु ने द्वितीय अवतार कछुए का धारण किया था। जिस दिन विष्णु कच्छुए का रूप धारण कर अवतरित हुए वह दिन वैशाख मास की पूर्णिमा का था इसलिये विष्णु भक्त वैशाख पूर्णिमा को कूर्मा जयंती के रूप में भी मनाते हैं।

विष्णु ने क्यों लिया कूर्म अवतार?

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत का भार सहन करने की क्षमता किसी में नहीं थी जैसे ही उसे क्षीर सागर में छोड़ा गया वह नीचे की ओर धंसता जा रहा था तब भगवान विष्णु ने कच्छुए यानि कूर्मा अवतार धारण कर उसे अपनी पीठ का आधार दिया था। भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के दौरान उनकी पीठ का घेरा एक लाख योजन का बताया जाता है। इसके पश्चात ही समुद्र मंथन संभव हो सका था। पौराणिक ग्रंथों में भी इसका वर्णन विस्तार से मिलता है। वहीं पद्मपुराण के ब्रह्मखंड में यह वर्णन भी मिलता है कि इंद्र द्वारा दुर्वासा ऋषि का अपमान किये जाने के बाद उन्होंने इंद्र को शाप दे दिया कि तुम्हारा वैभव समाप्त हो जाये। शाप के कारण मां लक्ष्मी समुद्र में लुप्त हो गई। तब भगवान विष्णु ने लक्ष्मी की पुन: प्राप्ति और दुर्वासा के शाप से मुक्ति के लिये देवताओं को समुद्र मंथन की सलाह दी। लेकिन देवता अकेले समुद्र मंथन करने में सक्षम नहीं थे। इस कारण असुरों से उन्होंने समुद्र मंथन के पश्चात निकलने वाले अमृत का लालच देकर समुद्र मंथन के लिये राजी कर लिया। इसके लिये मंदराचल पर्वत को मथनी तो वासुकी नाग को रस्सी बनाने का विकल्प सुझाया गया। यहां भी देवताओं ने चालाकी की ओर असुरों की प्रशंसा कर उन्हें वासुकी नाग को मुख की ओर से पकड़ने के लिये प्रेरित किया तो खुद देवताओं ने वासुकी की पूंछ थामी। जब मंथन होने लगा तो वासुकी की विषैली फुंफकार से अनेक असुर मारे गये और अनेक निशक्त हो गये। जैसे ही मंदराचल पर्वत को समुद्र में डाला गया तो उसके लिये कोई आधार नहीं था तब भगवान विष्णु ने कूर्मा अवतार धारण किया और मंदराचल पर्वत का आधार बने। कई चरणों में हुए इस समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए अंत में मां लक्ष्मी और अमृत कलश लेकर धन्वतरि निकले। मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के पास चली गई तो असुरों ने अमृत अपने पास रख लिया इसके पश्चात भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों को अपने मोहपाश में बांध लिया और छल पूर्वक देवताओं को अमृतपान करवाकर अमर कर दिया। अमरत्व प्राप्त करने के पश्चात देवताओं ने असुरों के साथ युद्ध किया और उन्हें हराकर अपना वैभव, साम्राज्य पुन: प्राप्त किया।

कूर्म जयंती वास्तु दोष दूर करने के लिये है श्रेष्ठ

सबसे अहम बात तो यही है कि यह भगवान विष्णु के एक अवतार कूर्म के अवतरित होने का दिन है। दूसरा यह तिथि निर्माण से जुड़े कार्यों का शुभारंभ करने के लिये बहुत ही सौभाग्यशाली मानी जाती है। कूर्मा जयंती पर ही वास्तु दोष दूर करने के उपाय भी किये जाते हैं। ग्रह प्रवेश पूजा आदि के लिये भी यह दिन बहुत ही सौभाग्यशाली माना जाता है। कूर्मा जयंती पर सरल ज्योतिषीय उपाय जानने के लिये आप एस्ट्रोयोगी पर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। अभी परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें

बुद्ध पूर्णिमा - विष्णु के नौवें अवतार बुद्ध की जयंती   |   वैशाख पूर्णिमा 2017 – सत्यविनायक पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि   |   नृसिंह जयंती की व्रतकथा व पूजा विधि

वैशाख 2017 – वैसाख मास के व्रत व त्यौहार   |   किसने बचाई नृसिंह की क्रोधाग्नि से बचायी सृष्टि?   |  भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की कहानी

जानें विष्णु के किस अवतार में थी कितनी कलाएं   |   शिव वृषभ अवतार - क्यों किया विष्णु पुत्रों का संहार?   |   भगवान विष्णु को समर्पित है बद्रीनाथ धाम




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

हरियाली तीज 2017 - जानें श्रावणी तीज की व्रत कथा व पूजा विधि

हरियाली तीज 2017 -...

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “श्रावणी तीज” कहते हैं। परन्तु ज्यादातर लोग इसे हरियाली तीज के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार मुख्य रूप स...

और पढ़ें...
नाग पंचमी 2017 - भगवान शिव और नागों की पूजा का दिन है

नाग पंचमी 2017 - भ...

नाग पंचमी एक  हिन्दू पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण...

और पढ़ें...
शुक्र राशि परिवर्तन – किसको मिलेगा लाभ किसको होगी हानि जानें राशिफल

शुक्र राशि परिवर्त...

किसी भी जातक की कुंडली में लाभ, सुख-समृद्धि आदि के कारक शुक्र माने जाते हैं इसलिये शुक्र का गोचर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास अहमियत रखता है...

और पढ़ें...
राशिनुसार कैसे करें शिव की पूजा

राशिनुसार कैसे करे...

शिव भक्तों के लिये सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माह होता है। इसलिये इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिये सर्वोत्तम भी माना जाता है। इ...

और पढ़ें...
श्रावण सोमवार 2017 - जानें सावन सोमवार की व्रतकथा व पूजा विधि

श्रावण सोमवार 2017...

सावन माह का नाम आते ही हमारे मन में भी बादल घुमड़ने लगते हैं, ठंडी हवाओं के झौंके सुकून देने लगते हैं, तपती ज्येष्ठ और आषाढ़ में गरमी से बेहा...

और पढ़ें...