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माघ मास - इस माह का है हर दिन पवित्र



माघ मास - इस माह का है हर दिन पवित्र

माघ एक ऐसा माह जो भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चंद्रमास व दसवां सौरमास कहलाता है। दरअसल मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण यह महीना माघ का महीना कहलाता है। वैसे तो इस मास का हर दिन पर्व के समान जाता है। लेकिन कुछ खास दिनों का खास महत्व भी इस महीने में हैं। उत्तर भारत में 1 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ ही माघ स्नान की शुरुआत हो चुकी है जिसका समापन 31 जनवरी को माघी पूर्णिमा के दिन होगा।


षटतिला एकादशी (12 जनवरी)- इस दिन तिलों के जल से स्नान किया जाता है, तिल का ही उबटन लगाया जाता है, तिल से ही हवन होता है व तिल मिले जल का पान, तिल का भोजन एवं तिल का दान किया जाता है। माना जाता है इससे समस्त पापों का नाश होता है। काले तिल व काली गाय के दान का भी बहुत महत्व होता है।

कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या (16 जनवरी)- यह दिन भी अति पवित्र होता है। इस दिन मौन रहकर या मुनियों जैसा आचरण करते हुए स्नान-दान करें। इस दिन त्रिवेणी या गंगा तट पर स्नान-दान की भी बहुत ज्यादा मान्यता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि का दान करना चाहिए। यदि मौनी अमावस्या का दिन रविवार, व्यतिपात योग और श्रवण नक्षत्र हो तो ‘अर्धोदय योग’ होता है। इस अवसर पर स्नान-दान का फल भी मेरू के समान मिलता है।

बसंत पंचमी (22 जनवरी)- इस दिन विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी को पूजा जाता है। ब्रह्मावैवर्त पुराण में इन देवियों का जन्म भगवान श्रीकृष्ण के कंठ से होना बताया गया है।

अचला सप्तमी (24 जनवरी)- माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत रखा जाता है। इसका महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। उनके अनुसार इस दिन स्नान-दान, पितरों के तर्पण व सूर्य पूजा एवं वस्त्रादि दान करने से व्यक्ति बैकुंठ में जाता है। माना जाता है कि इस दिन के व्रत रखने से साल भर रविवार के दिन रखे व्रतों के समान पुण्य मिलता है। रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी को अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है और इसे बहुत शुभ माना जाता है।

भीमाष्टमी (25 जनवरी)- शुक्ल पक्ष की ही अष्टमी को भीमाष्टमी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण-त्याग किया था। मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान व माधव पूजा से मनुष्य मात्र के सब पाप कट जाते हैं।

माघ पूर्णिमा (31 जनवरी)- माघी पूर्णिमा का महत्व सर्वाधिक माना गया है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होकर अमृत की वर्षा करते हैं। इसके अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों में होते हैं इसलिए इनमें सारे रोगों से मुक्ति दिलाने वाले गुण उत्पन्न होते हैं। मान्यता यह भी है कि माघ पूर्णिमा में स्नान दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।

इसके अलावा भारत भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर माघ मास में मेलों का आयोजन होता है। प्रयाग, हरिद्वार, उत्तरकाशी आदि स्थलों पर लगने वाला माघ मेला तो काफी प्रसिद्ध भी है।


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