Skip Navigation Links
माघ - इस माह का है हर दिन पवित्र


माघ - इस माह का है हर दिन पवित्र

माघ एक ऐसा माह जो भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चंद्रमास व दसवां सौरमास कहलाता है। दरअसल मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण यह महीना माघ का महीना कहलाता है। वैसे तो इस मास का हर दिन पर्व के समान जाता है। लेकिन कुछ खास दिनों का खास महत्व भी इस महीने में हैं। उत्तर भारत में 12 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ ही माघ स्नान की शुरुआत हो चुकी है जिसका समापन 10 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन संपन्न होगा।


षटतिला एकादशी (23 जनवरी)- इस दिन तिलों के जल से स्नान किया जाता है, तिल का ही उबटन लगाया जाता है, तिल से ही हवन होता है व तिल मिले जल का पान, तिल का भोजन एवं तिल का दान किया जाता है। माना जाता है इससे समस्त पापों का नाश होता है। काले तिल व काली गाय के दान का भी बहुत महत्व होता है।

कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या (27 जनवरी)- यह दिन भी अति पवित्र होता है। इस दिन मौन रहकर या मुनियों जैसा आचरण करते हुए स्नान-दान करें। इस दिन त्रिवेणी या गंगा तट पर स्नान-दान की भी बहुत ज्यादा मान्यता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि का दान करना चाहिए। यदि मौनी अमावस्या का दिन रविवार, व्यतिपात योग और श्रवण नक्षत्र हो तो ‘अर्धोदय योग’ होता है। इस अवसर पर स्नान-दान का फल भी मेरू के समान मिलता है।

माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी, 1 फरवरी)- इस दिन विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी को पूजा जाता है। ब्रह्मावैवर्त पुराण में इन देवियों का जन्म भगवान श्रीकृष्ण के कंठ से होना बताया गया है।

अचला सप्तमी (3 फरवरी)- माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत रखा जाता है। इसका महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। उनके अनुसार इस दिन स्नान-दान, पितरों के तर्पण व सूर्य पूजा एवं वस्त्रादि दान करने से व्यक्ति बैकुंठ में जाता है। माना जाता है कि इस दिन के व्रत रखने से साल भर रविवार के दिन रखे व्रतों के समान पुण्य मिलता है। रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी को अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है और इसे बहुत शुभ माना जाता है।

भीमाष्टमी (4 फरवरी)- शुक्ल पक्ष की ही अष्टमी को भीमाष्टमी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण-त्याग किया था। मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान व माधव पूजा से मनुष्य मात्र के सब पाप कट जाते हैं।

माघ पूर्णिमा (10 फरवरी)- माघी पूर्णिमा का महत्व सर्वाधिक माना गया है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होकर अमृत की वर्षा करते हैं। इसके अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों में होते हैं इसलिए इनमें सारे रोगों से मुक्ति दिलाने वाले गुण उत्पन्न होते हैं। मान्यता यह भी है कि माघ पूर्णिमा में स्नान दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।

इसके अलावा भारत भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर माघ मास में मेलों का आयोजन होता है। प्रयाग, हरिद्वार, उत्तरकाशी आदि स्थलों पर लगने वाला माघ मेला तो काफी प्रसिद्ध भी है।

यह भी पढ़ें

गंगा मैया देती हैं जीवात्मा को मोक्ष   |   आरती श्री गंगा जी   |   श्री गंगा चालीसा   |   माघ – स्नान-दान से मिलता है मोक्ष   |  

मोक्षदायिनी पौष पूर्णिमा   |   पौष मास – जानें पौष मास के व्रत त्यौहार व महत्व के बारे में    |  

सावन - शिव की पूजा का माह   |   सावन के बाद आया, श्रीकृष्ण जी का माह ‘भादों‘   |   मार्गशीर्ष – जानिये मार्गशीर्ष मास के व्रत व त्यौहार   |




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

शुक्र बदलेंगें राशि जानें अपना राशिफल

शुक्र बदलेंगें राश...

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राशिचक्र की 12 राशियों में वृषभ व तुला राशि के स्वामी शुक्र एक शुभ ग्रह माने जाते हैं। इन्हें लाभ व सुख-समृद्धि का क...

और पढ़ें...
भाद्रपद अमावस्या – सूर्य ग्रहण से बढ़ा सोमवती अमावस्या का महत्व

भाद्रपद अमावस्या –...

स्नान, दान और तर्पण के लिये अमावस्या की तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है लेकिन सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तो और भी सौभाग्यशाली मान...

और पढ़ें...
राहू राशि परिवर्तन – क्या लायेगा आपके जीवन में बदलाव

राहू राशि परिवर्तन...

18 अगस्त शुक्रवार 2017 को प्रात:काल 5 बजकर 53 मिनट मिथुन के चंद्रमा के साथ कर्क राशि में प्रविष्ट होंगे जिसका प्रत्येक राशि पर अलग-अलग प्रभाव...

और पढ़ें...
राहु और केतु ग्रहों को शांत करने के सरल उपाय

राहु और केतु ग्रहो...

राहु-केतु ग्रहों को छाया ग्रह के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष की दुनिया में इन दोनों ही ग्रहों को पापी ग्रह भी बोला जाता है। इन दोनों ग्रहों ...

और पढ़ें...
क्या आपकी कुंडली में हैं शुभ या पापकर्तरि योग?

क्या आपकी कुंडली म...

किसी भी जातक की कुंडली में अनेक शुभाशुभ योग होते हैं। इन्हीं योगों के आधार पर जातक जीवन में अपना मुकाम हासिल कर पाता है। अशुभ योगों के प्रभाव...

और पढ़ें...