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नागपंचमी पर ऐसे मिलेगी कालसर्प दोष से मुक्ति!


नागपंचमी पर ऐसे मिलेगी कालसर्प दोष से मुक्ति!

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को उत्तर भारत में नाग पूजा की जाती है, वहीं दक्षिण भारत में एेसा ही पर्व कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का अत्यंत महत्व माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है। और दूध चढ़ाया जाता है। भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है जिसे श्रद्घा पूर्वक विधि विधान से मनाने पर भोलेनाथ प्रसन्न हो कर अपनी कृपा बरसाते हैं।


नागपंचमी की पौराणिक कथाएं

भविष्य पुराण के अनुसार सावन महीने की पंचमी नाग देवता को समर्पित है यही कारण है कि इसे नागपंचमी कहते हैं पौराणिक कथा के अनुसार सावन महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी को भगवान श्री कृष्ण ने वृदांवन में नाग को हराकर लोगों का जीवन बचा लिया था श्री कृष्ण भगवान ने सांप के फन पर नृत्य किया, जिसके बाद वह नथैया कहलाये, एक और पौराणिक कथा भी है जिसके अनुसार इस दिन सृष्टि रचयिता ब्रह्रमा जी ने अपनी कृपा से शेषनाग को अलंकृत किया था पृथ्वी का भार धारण करने के बाद लोगों ने नाग देवता की पूजा करनी शुरू कर दी, तभी से यह परंपरा चली आ रही है|


नागपंचमी पूजन और सर्पदोष से मुक्ति

मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को नागपंचमी के दिन व्रत भी रखा जाता है, व्रत के बारे में गरूण पुराण में लिखा है कि व्रत रखने वाले को मिट्टी या आटे के सांप बनाकर उन्हें अलग-अलग रंगो से सजाना चाहिए, सजाने के बाद फूल, खीर, दूध, दीप आदि से उनकी पूजा करें, क्योंकि नाग देवता को पंचम तिथि का स्वामी माना जाता है  पूजा के बाद भुने हुये चने और जौ को प्रसाद के रूप में बांट दें|

जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है उन लोगों को इस दिन नाग देवता की पूजा करनी चाहिए| इस दिन पूजा करने से कुंडली का यह दोष समाप्त होता है|


नागपंचमी पूजा 2018 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष नाग पंचमी का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार नाग पंचमी हस्त नक्षत्र और साध्य योग में पड़ रही है, जो कि अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से सांयकाल 04 बज कर 13 मिनट तक है। इस दिन जो लोग नाग पूजा और काल सर्प योग की साधना आदि करते हैं वे अपनी पूजा प्रातः 11 बज कर 48 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 32 मिनट के मध्य कर लें। ये सर्प पूजा का सबसे शुभ काल है।

यह लेख एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी, द्वारा लिखा गया है। पंडित जी से ऑनलाइन परामर्श लेने के लिये यहां क्लिक करें या फिर हमें 9999091091 पर कॉल करें।

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