Makar Sankranti Kyon Manae Jaati Hai: मकर संक्रांति भारत के उन प्रमुख पर्वों में से एक है, जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ज्योतिष, प्रकृति, कृषि और जीवन-दर्शन सभी का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यह पर्व हमें यह समझाने आता है कि मनुष्य और प्रकृति का रिश्ता कितना गहरा है। मकर संक्रांति उस परिवर्तन का उत्सव है, जब अंधकार से प्रकाश की ओर, ठंड से ऊष्मा की ओर और निराशा से आशा की ओर यात्रा शुरू होती है।
मकर संक्रांति मनाने का सबसे बड़ा कारण सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में आते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। उत्तरायण का अर्थ है सूर्य का उत्तर दिशा की ओर गमन। इसके साथ ही दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।
भारतीय संस्कृति में सूर्य को ऊर्जा, जीवन और चेतना का स्रोत माना गया है। सूर्य की यह गति न केवल मौसम को बदलती है, बल्कि मानव जीवन में भी नई सक्रियता और सकारात्मकता लाती है। इसी कारण मकर संक्रांति को शुभ, पवित्र और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
मकर संक्रांति शीत ऋतु के धीरे-धीरे विदा होने का संकेत देती है। लंबे समय तक चली ठंड, कोहरा और सुस्ती अब कम होने लगती है। सूर्य की किरणें तेज और गर्म महसूस होने लगती हैं, जिससे शरीर और मन दोनों में स्फूर्ति आती है।
आप अनुभव करेंगे कि इस समय सुबह की धूप में बैठना अच्छा लगता है, लोगों का बाहर निकलना बढ़ता है और प्रकृति में भी हरियाली लौटने लगती है। मकर संक्रांति हमें यह संदेश देती है कि कठिन समय स्थायी नहीं होता। जैसे सर्दी के बाद गर्मी आती है, वैसे ही जीवन में भी अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है।
मकर संक्रांति मनाने का एक बहुत महत्वपूर्ण कारण इसका कृषि से जुड़ाव है। यह पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई के बाद मनाया जाता है। किसान महीनों की मेहनत के बाद जब अपनी फसल घर लाते हैं, तब यह समय आनंद, संतोष और कृतज्ञता का होता है।
इस दिन धरती माता, सूर्य देव और प्रकृति को धन्यवाद दिया जाता है। नए अनाज से बने व्यंजन, सामूहिक भोज और मेलों का आयोजन इस भावना को दर्शाता है। मकर संक्रांति हमें यह भी सिखाती है कि अन्न का सम्मान करें, क्योंकि हर दाने के पीछे किसान की मेहनत और प्रकृति की कृपा छिपी होती है।
मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। कहीं यह पोंगल है, कहीं लोहड़ी, कहीं भोगाली बिहू तो कहीं उत्तरायण। कहीं पतंग उड़ती हैं, कहीं अग्नि के चारों ओर नृत्य होता है और कहीं नए चावल व दूध से पकवान बनाए जाते हैं।
इन सभी रूपों में एक ही भावना निहित है- सूर्य का सम्मान, फसल का उत्सव और जीवन में नई शुरुआत। यही कारण है कि मकर संक्रांति भारत की विविधता में एकता का सशक्त प्रतीक बन जाती है।
मकर संक्रांति को पवित्र स्नान और दान का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान मन को शुद्ध करता है और नकारात्मकता को दूर करता है।
सूर्य देव के साथ-साथ शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य और शनि के संबंध संतुलित होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं कम होती हैं। तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन खाने की परंपरा है। तिल शरीर को गर्मी देता है और गुड़ ऊर्जा प्रदान करता है, जो सर्दियों के मौसम में बहुत लाभकारी होता है।
इसके साथ ही यह परंपरा एक सामाजिक संदेश भी देती है- जीवन में मिठास बनाए रखें और आपसी संबंधों में कटुता न आने दें। “तिल-गुड़ खाओ, मीठा बोलो” केवल कहावत नहीं, बल्कि मकर संक्रांति का जीवन-दर्शन है।
कई राज्यों में मकर संक्रांति पतंगबाजी के लिए प्रसिद्ध है। खुले आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें जीवन की उमंग, स्वतंत्रता और ऊंचे सपनों का प्रतीक हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग- सभी इस सामूहिक खुशी में शामिल होते हैं।
पतंग उड़ाना यह दर्शाता है कि आप भी अपने सपनों को ऊंचाइयों तक ले जाने का साहस रखते हैं। यह पर्व लोगों को जोड़ता है और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है।
मकर संक्रांति को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य इस समय किए जाते हैं। यह पर्व आपको यह विश्वास दिलाता है कि आगे का समय शुभ और फलदायी होगा।
आप भी इस दिन अपने जीवन में नए संकल्प ले सकते हैं- स्वास्थ्य सुधारने का, सकारात्मक सोच अपनाने का और अपने लक्ष्यों की ओर पूरे मन से आगे बढ़ने का।
मकर संक्रांति इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यह जीवन में संतुलन, आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक है। यह पर्व हमें सूर्य, प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा है।
जब आप मकर संक्रांति मनाएं, तो इसके पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझें- आभार, एकता, परिश्रम और नई शुरुआत। यही इस पर्व की सच्ची भावना है, जो आपके जीवन में प्रकाश और उल्लास भर देती है।