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आषाढ़ अमावस्या 2017 – पितृकर्म अमावस्या 23 जून तो 24 को रहेगी शनि अमावस्या


आषाढ़ अमावस्या 2017 – पितृकर्म अमावस्या 23 जून तो 24 को रहेगी शनि अमावस्या

प्रत्येक मास में चंद्रमा की कलाएं घटती और बढ़ती रहती हैं। चंद्रमा की घटती बढ़ती कलाओं से ही प्रत्येक मास के दो पक्ष बनाये गये हैं। जिस पक्ष में चंद्रमा घटती कला का होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है और चढ़ती कला के चंद्रमा वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। ऐसे में प्रत्येक पक्ष का अंतिम दिन बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन यानि जिस दिन चंद्रमा की कलाएं चढ़ते-चढ़ते चंद्रमा अपने वास्तविक रूप में गोल गोल और दूधिया रोशनी वाला दिखाई दे वह पूर्णिमा कहलाता है तो जब चंद्रमा घटते घटते बिल्कुल समाप्त हो जाये और रात घोर अंधकार वाली हो तो उसे अमावस्या कहते हैं। धार्मिक रूप से अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या तो शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है। आषाढ़ मास की अमावस्या को भी खास माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या (ASHADHA AMAVASYA)

आषाढ़ मास हिंदू पंचांग के अनुसार का हिंदू वर्ष का चौथा महीना माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या के पश्चात वर्षा ऋतु का आगमन भी माना जाता है। इस मायने में आषाढ़ अमावस्या का बहुत ही महत्व है। दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले अनुष्ठानों के लिये तो यह तिथि चिर-परिचित है ही। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों, धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है।

2017 में क्यों खास है आषाढ़ शनि अमावस्या (ASHADHA SHANI AMAVASYA IN 2017)

2017 में अमावस्या 23 व 24 जून दो दिनों तक है। जो जातक अमावस्या को पितृकर्म करना चाहते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उन्हें 23 जून को पितृकर्म संपन्न करवाना चाहिये। इसका कारण यह है कि 24 जून को सूर्योदय के समय तो अमावस्या की तिथि रहेगी लेकिन पितृ कर्म का समय लगभग 12 बजे का माना जाता है और 24 तारीख को उस समय प्रतिपदा तिथि आरंभ हो चुकी होगी वहीं अमावस्या तिथि 23 जून को 11 बजकर 50 मिनट से आरंभ हो रही है जिसके कारण 12 बजे 23 जून के पितृकर्म किये जा सकते हैं। वहीं 24 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने से भी उस दिन अमावस्या तिथि रहेगी। चूंकि यह दिन शनिवार का है इसलिये यह शनि अमावस्या भी है। शनि अमावस्या का महत्व इसलिये बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन शनि से पीड़ित जातक कुछ विशेष उपाय अपनाकर शनिदोष निवारण कर सकते हैं और वर्तमान में तो शनि वक्री होकर गोचर कर रहे हैं उस पर हाल ही में 21 जून को वे वृश्चिक राशि में परिवर्तित भी हुए हैं। ऐसे में इस शनि अमावस्या का बहुत अधिक महत्व बन जाता है। 

आषाढ़ अमावस्या तिथि व मुहूर्त (ASHADHA AMAVASYA TITHI MUHURAT)

अमावस्या तिथि – 23-24 जून 2017

अमावस्या तिथि आरंभ – 11:50 बजे से (23 जून 2017)

अमावस्या तिथि समाप्त – 8:00 बजे तक (24 जून 2017)

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