आषाढ़ अमावस्या 2021: पितृकर्म अमावस्या

08 जुलाई 2021

प्रत्येक मास में चंद्रमा की कलाएं घटती और बढ़ती रहती हैं। चंद्रमा की घटती बढ़ती कलाओं से ही प्रत्येक मास के दो पक्ष बनाये गये हैं। जिस पक्ष में चंद्रमा घटती कला का होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है और चढ़ती कला के चंद्रमा वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। ऐसे में प्रत्येक पक्ष का अंतिम दिन बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन यानि जिस दिन चंद्रमा की कलाएं चढ़ते-चढ़ते चंद्रमा अपने वास्तविक रूप में गोल गोल और दूधिया रोशनी वाला दिखाई दे वह पूर्णिमा कहलाता है तो जब चंद्रमा घटते घटते बिल्कुल समाप्त हो जाये और रात घोर अंधकार वाली हो तो उसे अमावस्या कहते हैं। धार्मिक रूप से अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या तो शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है। आषाढ़ मास की अमावस्या को भी खास माना जाता है।

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आषाढ़ अमावस्या 

आषाढ़ मास हिंदू पंचांग के अनुसार का हिंदू वर्ष का चौथा महीना माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या के पश्चात वर्षा ऋतु का आगमन भी माना जाता है। इस मायने में आषाढ़ अमावस्या का बहुत ही महत्व है। दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले अनुष्ठानों के लिये तो यह तिथि चिर-परिचित है ही। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों, धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है।

 

2021 में क्यों खास है आषाढ़ अमावस्या

2021 में आषाढ़ अमावस्या 09 जुलाई को शुक्रवार के दिन है। जो जातक अमावस्या को पितृकर्म करना चाहते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उन्हें 09 जुलाई को पितृकर्म संपन्न करवाना चाहिये। अमावस्या तिथि 09 जुलाई को सुबह 05 बजकर 16 मिनट से आरंभ हो रही है जो कि 10 जुलाई को प्रातः 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। 

 

आषाढ़ अमावस्या तिथि व मुहूर्त 

  • अमावस्या तिथि – 09 जुलाई 2021
  • अमावस्या तिथि आरंभ – सुबह 05 बजकर 16 मिनट (09 जुलाई 2021) से
  • अमावस्या तिथि समाप्त – प्रातः 06 बजकर 46 मिनट (10 जुलाई 2021) तक

 

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