Skip Navigation Links
मांगलिक दोष - मांगलिक योग है या दोष?


मांगलिक दोष - मांगलिक योग है या दोष?

मांगलिक यह शब्द सुनते ही विवाह का लड्डू किरकिरा नज़र आने लगता है। जिसके साथ विवाह होना है यदि उसकी कुंडली में यह दशा मौजूद हो तो वह जीवनसाथी नहीं जीवनघाती लगने लगता है। लेकिन बहुत बार जैसा ऊपरी तौर पर नज़र आता है वैसा असल में नहीं होता। ज्योतिषशास्त्री भी कहते हैं कि सिर्फ मांगलिक दोष के कारक भाव में मंगल के होने से ही मांगलिक दोष प्रभावी नहीं हो जाती बल्कि उसे घातक अन्य परिस्थितियां भी बनाती हैं। यह हानिकारक तभी होता है जब मंगल निकृष्ट राशि का व पापी भाव का हो। कहने का तात्पर्य है कि मांगलिक मात्र कुंडली का दोष नहीं है बल्कि यह कुछ परिस्थितियों में विशेष शुभ योग भी बन जाता है। कैसे? इसी पर चर्चा करेंगें इस लेख में।

क्या है मांगलिक दोष (MANGLIK DOSH)

जब कुंडली में लग्न की दृष्टि से मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें, या बारहवें स्थान पर हो तो ज्योतिषशास्त्री इसे मांगलिक दोष मानते हैं।

सतमंगली दोष (SATMANGLI DOSH)

वैसे तो लग्न कुंडली में पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें, या बारहवें स्थान पर मंगल ग्रह हो तो मांगलिक दोष होता है लेकिन ज्योतिषाचार्य इनमें से सबसे हानिकारक सातवें भाव में मंगल को बताते हैं। इसलिये इस दोष को सतमंगली कहा जाता है। यह जीवनसाथी के लिये घातक माना जाता है।

मांगलिक दोष कब बनता है योग 

वो कहावत तो आपने सुनी होगी या पढ़ी होगी कि लोहे को लोहा काटता है या फिर ज़हर को ज़हर मारता है। इसी तर्ज़ पर यदि दो मांगलिक जातकों का आपस में विवाह करवा दिया जाये तो यही मांगलिक दोष एक बहुत ही शुभ योग बन जाता है।

इसी तरह यदि चंद्रमां, राहु, शनि में से कोई भी ग्रह प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, एवं द्वादश भाव में मंगल के साथ मौजूद हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है और जातक का वैवाहिक जीवन बहुत ही हंसी-खुशी के साथ व्यतीत होता है।

यदि विवाह के लिये जातकों की कुंडलियों का मिलान करने पर दोनों कुंडलियों में 27 गुण एक दूसरे से मिल जाते हैं तो भी मांगलिक दोष पर ज्योतिषाचार्य विचार नहीं करते यानि इस अवस्था में भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

यदि कुंडली में मंगल स्वराशि का हो या फिर उच्च का होकर मित्र घर में विराजमान हो तो भी मांगलिक दोष निष्प्रभावी रहता है।

इतना ही नहीं मंगल जिस भी राशि में बैठा हो यदि उस राशि का स्वामी उच्च होकर त्रिकोण या केंद्र में बैठा हो तो वह भी मंगल दोष की काट करता है।

वृष, मिथुन, सिंह, व वृश्चिक लग्न की कुंडली में भी मंगल दोष नहीं होता।

कुल मिलाकर ऐसी बहुत सी परिस्थितियां हैं जिनका विचार किये बिना ही मांगलिक दोष से जातक घबरा जाते हैं। आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है या योग इसका सटीक आकलन आप एस्ट्रोयोगी पर देशभर के जाने-माने ज्योतिषियों से करवा सकते हैं। अभी परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।

अन्य लेख

मांगलिक दोष   |   कुंडली में विवाह योग   |   गुरु चाण्डाल दोष   |   शनि दोष   |   चंद्र दोष   |   पितृदोष

कुंडली में संतान योग   |   कुंडली में प्रेम योग   |   कुंडली में कालसर्प दोष   




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

हरियाली तीज 2017 - जानें श्रावणी तीज की व्रत कथा व पूजा विधि

हरियाली तीज 2017 -...

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “श्रावणी तीज” कहते हैं। परन्तु ज्यादातर लोग इसे हरियाली तीज के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार मुख्य रूप स...

और पढ़ें...
नाग पंचमी 2017 - भगवान शिव और नागों की पूजा का दिन है

नाग पंचमी 2017 - भ...

नाग पंचमी एक  हिन्दू पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण...

और पढ़ें...
शुक्र राशि परिवर्तन – किसको मिलेगा लाभ किसको होगी हानि जानें राशिफल

शुक्र राशि परिवर्त...

किसी भी जातक की कुंडली में लाभ, सुख-समृद्धि आदि के कारक शुक्र माने जाते हैं इसलिये शुक्र का गोचर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास अहमियत रखता है...

और पढ़ें...
राशिनुसार कैसे करें शिव की पूजा

राशिनुसार कैसे करे...

शिव भक्तों के लिये सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माह होता है। इसलिये इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिये सर्वोत्तम भी माना जाता है। इ...

और पढ़ें...
श्रावण सोमवार 2017 - जानें सावन सोमवार की व्रतकथा व पूजा विधि

श्रावण सोमवार 2017...

सावन माह का नाम आते ही हमारे मन में भी बादल घुमड़ने लगते हैं, ठंडी हवाओं के झौंके सुकून देने लगते हैं, तपती ज्येष्ठ और आषाढ़ में गरमी से बेहा...

और पढ़ें...