Skip Navigation Links
मूलांक से जानें कौनसा ग्रह और कौनसा वार आपके लिये है शुभ


मूलांक से जानें कौनसा ग्रह और कौनसा वार आपके लिये है शुभ

दुनिया में जितनी भी संख्याएं हैं सभी 0 से लेकर 9  अंकों से बनी होती हैं। यानि कुल मिलाकर अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 और 0 ही होते हैं। हर छोटी से लेकर बड़ी संख्या में इनके अलावा कोई अंक नहीं होता लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये अंक आपके जीवन के गणित को भी बता सकते हैं? दरअसल अंको से आपके भविष्य का आकलन किया जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र की ही एक विधा अंक ज्योतिष में 1 से लेकर 9 तक अंक माने जाते हैं। ग्रहों की संख्या भी 9 ही मानी जाती है। तो आइये जानते हैं आपके अंक और उस अंक के स्वामी ग्रह के बारे में।

कैसे ज्ञात करें अपना शुभ अंक

ज्योतिषीय आकलन के लिये आपके शुभ अंक का पता जन्मतिथि के अनुसार लगाया जाता है। जिस तिथि को जन्म हुआ हो उसके अंकों का योग मूलांक कहलाता है और जन्म तिथि, जन्म माह एवं जन्म वर्ष का कुल योग भाग्यांक कहलाता है। उदाहरण के लिये यदि आपकी जन्मतिथि 01/01/1991 है तो आपका मूलांक 1 है और आपका भाग्यांक 0+1+0+1+1+9+9+1=22=4 यानि आपका भाग्यांक 4 है। इसी प्रकार यदि जन्मतिथि दो अंकों यानि 11 है तो आपका मूलांक 1+1=2 होगा।

अंक और उनके स्वामी ग्रह

ज्योतिष में 9 ग्रह माने जाते हैं इस प्रकार सभी 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 अंकों के स्वामी अलग-अलग ग्रह माने जाते हैं।

1 अंक के स्वामी – 1 अंक के स्वामी सूर्य ग्रह माने जाते हैं। सूर्य ग्रह राशि चक्र की सिंह राशि से स्वामि भी हैं। जिन जातकों का जन्म 01, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है उनका मूलांक 1 होता है एवं इनके मूलांक स्वामी सूर्य हैं।

2 अंक के स्वामी – 2 अंक के स्वामी अंक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा हैं। जिन जातकों का जन्म 02, 11, 20 या 29 तिथि को हुआ है उनका मूलांक 2 बनता है इसके अनुसार आपके स्वामी चंद्रमा हैं। चंद्रमा राशि चक्र में कर्क राशि के स्वामी माने जाते हैं।

3 अंक के स्वामी – 2 अंक के स्वामी देवगुरु ग्रह बृहस्पति माने जाते हैं। जो जातक 03, 12, 21 या 30 तारीख को पैदा हुए हैं उनका मूलांक 3 है और इनके मूलांक स्वामी बृहस्पति हैं।

4 अंक के स्वामी – जिन जातकों का जन्म 04, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ हो उनका मूलांक 4 होता है जिसके स्वामी नेपच्युन यानि राहू माने जाते हैं। राहू को ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह माना जाता है। इन्हें राशि चक्र की किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं है एवं राहू जन्म से वक्री ग्रह माने जाते हैं।

5 अंक के स्वामी – जो जातक 05, 14 या 23 तारीख को जन्मे हैं उनका मूलांक 5 होगा। 5 अंक बुध का अंक माना जाता है। बुध राशि चक्र की मिथुन व कन्या राशियों के स्वामी माने जाते हैं।

6 अंक के स्वामी – 06, 15 और 24 तारीख को जन्में जातकों का मूलांक 6 होता है। 6 अंक के स्वामी शुक्र माने जाते हैं। शुक्र राशि चक्र की दूसरी राशि वृषभ और सातवीं राशि तुला के स्वामी भी हैं।

7 अंक के स्वामी – 07, 16 एवं 25 तारीख को जन्में जातकों का मूलांक 7 है इस अंक के स्वामी केतु माने जाते हैं। केतु भी राहू के ठीक विपरीत सिरे पर वक्री होकर गोचर करते हैं। इन्हें भी छाया ग्रह माना जाता है और राशि चक्र की किसी भी राशि के स्वामी ये नहीं हैं।

8 अंक के स्वामी – 8 अंक शनिदेव का अंक है। शनिदेव राशिचक्र की दसवीं और ग्यारहवीं राशि मकर व कुंभ के स्वामी माने जाते हैं। जो जातक 8, 17 या 26 तारीख को जन्में हैं उनका मूलांक 8 बनता है।

9 अंक के स्वामी – 9 अंक के स्वामी युद्ध के देवता मंगल माने जाते हैं। राशि चक्र की प्रथम राशि मेष व आठवीं राशि वृश्चिक के स्वामी भी मंगल हैं। जिन जातकों का जन्म 09, 18 या 27 तारीख को हुआ हो उनका मूलांक 9 व मूलांक स्वामी मंगल होते हैं।

इसी प्रकार यदि जातक का भाग्यांक भी 1 से लेकर 9 तक जो भी अंक हो उसके भाग्यांक स्वामी उस अंक का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह होगा। उदाहरण के लिये यदि आपका भाग्यांक 1 बनता है तो आपके भाग्यांक स्वामी सूर्य होंगे।

मूलांक व भाग्यांक के अनुसार शुभ दिन

अंक 1 के लिये शुभ दिन रविवार का होता है

अंक 2 के लिये सोमवार का दिन सौभाग्यशाली माना जाता है।

अंक 3 के लिये बृहस्पतिवार यानि गुरुवार का दिन शुभ माना जाता है।

अंक 4 के लिये शनिवार काफी शुभ दिन कहा जा सकता है।

अंक 5 के लिये बुधवार का दिन खास होता है।

अंक 6 के लिये शुक्रवार का दिन विशेष सौभाग्यशाली कहा जा सकता है।

अंक 7 के लिये रविवार का दिन अच्छा होता है।

अंक 8 के लिये शनिवार का दिन शुभ माना जाता है।

अंक 9 के लिये मंगलवार का दिन सौभाग्यशाली कहा जा सकता है। 

अंक ज्योतिष के अनुसार अपने बारे में जानने के लिये एस्ट्रोयोगी पर इंडिया के बेस्ट न्यूमेरोलॉजिस्ट से परामर्श करें। प्रसिद्ध अंक ज्योतिषाचार्यों से अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

माँ कालरात्रि - नवरात्र का सातवाँ  दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा विधि

माँ कालरात्रि - नव...

माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है।माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत...

और पढ़ें...
गुरु गोचर 2018-19 : मंगल की राशि में गुरु, इन राशियों के अच्छे दिन शुरु!

गुरु गोचर 2018-19 ...

गुरु का वृश्चिक राशि में गोचर 2018-19 - देव गुरु बृहस्पति 11 अक्तूबर को लगभग 7 बजकर 20 मिनट पर राशि परिवर्तन कर रहे हैं। गुरु का गोचर ज्योतिषशास्त्र में बहुत महत्वपू...

और पढ़ें...
नवरात्रों में कन्या पूजन देता है शुभ फल

नवरात्रों में कन्य...

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। सनातन धर्म वैसे तो सभी बच्चों में ईश्वर का रूप बताता है किन्तु नवरात्रों में छोटी कन्याओं में ...

और पढ़ें...
माँ महागौरी - नवरात्र का आठवां दिन माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा विधि

माँ महागौरी - नवरा...

माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों के ...

और पढ़ें...
ज्योतिष क्या है?

ज्योतिष क्या है?

ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम् अर्थात सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है| इसमें मुख्य रूप से ग्रह, नक्षत्र आदि...

और पढ़ें...