पद्मिनी एकादशी – जानिए कमला एकादशी का महत्व व व्रत कथा के बारे में

कमला एकादशी, अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मिनी एकादशी कहलाती है। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में व्रत व त्यौहारों की बड़ी मान्यता है। सप्ताह का प्रत्येक वार, पक्ष की प्रत्येक तिथि, मास का प्रत्येक पक्ष किसी न किसी रूप में व्रत व त्यौहारों से जुड़े हुए हैं। व्रत तिथियों में एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या तिथि प्रमुख हैं। एकादशी तिथि व्रत कृष्ण और पक्ष दोनों ही तिथियों में शुभ फलदायी माना जाता है। प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है। ऐसे में प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी उपवास रखे जाते हैं लेकिन जिस वर्ष में अधिक मास भी पड़ रहा हो जैसा कि 2018 में ज्येष्ठ मास में अधिक मास भी चल रहा है। उस वर्ष एकादशियों की संख्या 26 हो जाती है। अधिकमास वैसे भी स्नान, दान, पूजा पाठ आदि धार्मिक, आध्यात्मिक कार्यों को करने का होता है तो इस मास की एकादशी तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है। आइए जानते हैं कमला (पद्मिनी) एकादशी का महत्व व इसकी व्रत कथा के बारे में।


पद्मिनी (कमला) एकादशी की व्रत कथा

कहते हैं प्राचीन समय की बात है। माहिष्मति नगरी में एक चंद्रवंशी राजा कृतवीर्य हुआ करते थे। उनकी बहुत सारी रानियां भी थी। लेकिन दुख की बात राजा के लिये यह थी कि किसी भी रानी से उन्हें कोई संतान नहीं मिली। राजा ने बहुत प्रयत्न किये लेकिन कोई यत्न नहीं बन रहा था। अंत में राजा ने तपस्या करने की ठानी। रानियों सहित जंगलों में वास करने लगा व व्रत उपवास करने लगा। एक दिन राजा की एक रानी की भेंट माता अनुसूया से हो गई। देवी अनुसूया ने उन्हें मल मास की शुक्ल एकादशी यानि पद्मिनी एकादशी का उपवास करने की कही। माता अनुसूया ने रानी को व्रत पालन की विधी भी बताई। रानी ने विधि अनुसार व्रत का पालन किया तो भगवान प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। रानी ने आग्रह किया प्रभु मेरी जगह मेरे पति को वरदान दीजिए। तब भगवान ने राजा से कहा मांगो क्या मांगते हो वत्स। राजा ने कहा प्रभु मुझे ऐसी संतान प्राप्त होने का वरदान दीजिए जो सर्वगुण संपन्न हो, जिसका तीनों लोकों में यश फैले और जो आपके अलावा किसी से भी पराजित न हो। भगवान ने तथास्तु कहा हो अंतर्धान हो गये। कहते हैं पद्मिनी एकादशी व्रत के प्रताप व भगवान के दिये वरदान के फलस्वरूप राजा कृतवीर्य के यहां पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई नाम रखा गया कार्तवीर्य अर्जुन इन्हें सहस्रबाहु अर्जुन के नाम से भी जाना गया। भगवान दत्तात्रेय के परमभक्त कार्तवीर्य को सर्वगुण संपन्न और अपराजित माना जाता था।


पद्मिनी एकादशी व्रत व पूजा विधि

पद्मिनी एकादशी का व्रत भी अन्य एकादशियों की तरह ही रखा जाता है। एकादशी के दिन स्नानादि के पश्चात भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस व्रत को निर्जला रखने से यह बहुत पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन विष्णु या शिव पुराण का पाठ किया जाता है। भजन कीर्तन कर रात्रि जागरण भी करना चाहिये। जागरण के समय प्रति पहर भगवान विष्णु और भगवान शिव को अलग-अलग भेंट चढ़ाएं। इसमें नारियल, बेल, सीताफल, नारंगी, सुपारी आदि अर्पित कर सकते हैं। द्वादशी के दिन श्री हरि की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन करवाने व दक्षिणा देने के पश्चात स्वयं आहार ग्रहण करें। व्रत पालन के समय सात्विकता का ध्यान रखें। तामसिक पदार्थों के साथ-साथ विचारों से भी दूरी बनाएं रखें।


पद्मिनी एकादशी 2018 व्रत तिथि व मुहूर्त

वर्ष 2018 में कमला एकादशी या कहें पद्मिनी एकादशी की तिथि 25 मई को है।

एकादशी तिथि – 25 मई 2018

पारण का समय – 05:30 से 08:14 बजे तक (26 मई 2018)

एकादशी तिथि आरंभ – 18:18 बजे (24 मई 2018)

एकादशी तिथि समाप्त – 17:47 बजे (25 मई 2018)

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