आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) तक मनाई जाएगी। यह नौ दिवसीय पावन पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और सुख-समृद्धि, रक्षा तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त

नवरात्रि का शुभारंभ घटस्थापना (कलश स्थापना) से होता है। शास्त्रों के अनुसार इसे शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

  • घटस्थापना मुहूर्त: प्रातः 05:33 बजे से 10:09 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: 11:56 बजे से 12:52 बजे तक

प्रतिपदा तिथि

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 14 जुलाई 2026 को दोपहर 03:12 बजे

  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 15 जुलाई 2026 को प्रातः 11:50 बजे

दिन तिथि एवं वार पूजा
दिन 1 15 जुलाई 2026 (बुधवार)
तिथि: प्रतिपदा
मां शैलपुत्री पूजा
दिन 2 16 जुलाई 2026 (गुरुवार)
तिथि: द्वितीया
मां ब्रह्मचारिणी पूजा
दिन 3 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार)
तिथि: तृतीया
मां चंद्रघंटा पूजा
दिन 4 18 जुलाई 2026 (शनिवार)
तिथि: चतुर्थी
मां कूष्माण्डा पूजा
दिन 5 19 जुलाई 2026 (रविवार)
तिथि: पंचमी
मां स्कंदमाता पूजा
दिन 6 20 जुलाई 2026 (सोमवार)
तिथि: षष्ठी
मां कात्यायनी पूजा
दिन 7 21 जुलाई 2026 (मंगलवार)
तिथि: सप्तमी
मां कालरात्रि पूजा
दिन 8 22 जुलाई 2026 (बुधवार)
तिथि: अष्टमी
मां महागौरी पूजा
संधि पूजा मुहूर्त: प्रातः 04:52 बजे से 05:40 बजे तक
दिन 9 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)
तिथि: नवमी
मां सिद्धिदात्री पूजा

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कब आती है गुप्त नवरात्रि

नवरात्रि का त्योहार साल में चार बार आता है। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रि के बारे में तो सभी जानते ही हैं जिन्हें वासंती और शारदीय नवरात्रि भी कहा जाता है लेकिन गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं। गुप्त नवरात्रि की जानकारी अधिकतर उन लोगों को होती है जो तंत्र साधना करते हैं।

गुप्त नवरात्रि पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे, कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती। मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें। तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ।

क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि

  • गुप्त नवरात्रि पर लोग घटस्थापना के साथ त्योहार की शुरुआत करते हैं।

  • घटस्थापना में माता को लाल फूल और चुनरी भी भेंट की जाती है। 

  • विधिपूर्वक घटस्थापना के बाद लोग सुबह शाम मां दुर्गा की उपासना करते हैं। 

  • सुबह शाम की पूजा में दुर्गा चालीस और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। 

  • पूजा में लौंग और बताशे का भोग लगाया जाता है।  

  • वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं।

अन्य लेख : कमला माता मंत्र | काली मंत्र | दुर्गा चालीसा | दुर्गा आरती | जानें नवरात्रों में, करने और ना करने वाले कुछ कार्य। दुर्गा स्त्रोत । महिषासुर मर्दिनी स्त्रोत

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का महत्व

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का महत्व हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। ये महाविद्याएं देवी दुर्गा के दस रूपों को प्रतिष्ठित करती हैं और भक्तों को विभिन्न आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इन महाविद्याओं की पूजा और साधना से आध्यात्मिक उन्नति, सामरिक विजय, धन, सुख, संतान, समृद्धि, शक्ति और मुक्ति जैसे विभिन्न आरोग्य और अभिवृद्धि प्राप्त होती हैं।

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन, पहली महाविद्या के रूप में माता काली की साधना की जाती है। इनको 10 महाविद्याओं में सबसे प्रथम माना गया है। माता काली की साधना से साधक को विरोधियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ॐ हृीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा' है।

नवरात्रि के दूसरे दिन, दूसरी महाविद्या के रूप में माता तारा की साधना की जाती है। मान्यता है कि सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने महाविद्या तारा की उपासना की थी। इन्हें तांत्रिकों की देवी माना गया है। तारा की आराधना से आर्थिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति होती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ हृीं स्त्रीं हुम फट्‌' है।

तीसरे दिन, तीसरी महाविद्या के रूप में माता त्रिपुरा सुंदरी की साधना होती है। ये महाविद्या ललिता या राज राजेश्वरी के रूप में भी जानी जाती हैं। त्रिपुरा सुंदरी की साधना से आप आनंदमय और सुखी जीवन प्राप्त कर सकते हैं। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऐं हृीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः' है।

गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन, चौथी महाविद्या के रूप में माता भुवनेश्वरी की साधना होती है। माता भुवनेश्वरी की साधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'हृीं भुवनेश्वरीयै हृीं नमः' है।

पांचवे दिन, पांचवी महाविद्या के रूप में माता छिन्नमस्ता की साधना होती है। यदि आप शांत मन से इस महाविद्या की साधना करते हैं, तो माता शांत स्वरूप में प्रकट होती हैं, जबकि उग्र रूप से की गई साधना से आप माता के उग्र रूप को देख सकते हैं। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'श्रीं हृीं ऐं वज्र वैरोचानियै हृीं फट स्वाहा' है।

गुप्त नवरात्रि में छठे दिन, छठी महाविद्या के रूप में माता त्रिपुरा भैरवी हैं। इनकी साधना से जीवन के सभी बंधनों से मुक्ति मिलती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहाः' है।

गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन, सातवीं महाविद्या के रूप में माता धूमावती की साधना होती है। इनकी साधना से सभी संकट दूर हो जाते हैं। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहाः' है। साधना करने वाला इस महाविद्या के जाप के लिए महाप्रतापी और सिद्ध पुरुष कहलाता है।

गुप्त नवरात्रि में आठवें दिन, आठवीं महाविद्या के रूप में माता बगलामुखी हैं। इनकी साधना से भय से मुक्ति मिलती है और वाक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ हृीं बगुलामुखी देव्यै हृीं ओम नमः' है।

गुप्त नवरात्रि में नौवें दिन, मातंगी नौवीं महाविद्या हैं। इनकी साधना से गृहस्थ जीवन में खुशहाली आती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ ह्नीं ऐ भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा' है।

गुप्त नवरात्रि में दसवें दिन, माता कमला को दसवीं महाविद्या कहा गया है। इनकी साधना से धन, नारी और पुत्र की प्राप्ति होती है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं कमले जगत्प्रसूत्यै नमः' है।

गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन, ग्यारहवीं महाविद्या के रूप में माता मातंगी की साधना होती है। इनकी साधना से सभी आरोग्य संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। इस महाविद्या के मंत्र का जाप, 'ऐं ह्लीं क्लीं सौः मातंगी महालक्ष्म्यै नमः' है।

ये सभी महाविद्याएं गुप्त नवरात्रि में साधकों के लिए प्रमुख हैं, और इनकी साधना से विभिन्न आराध्याओं की कृपा प्राप्त होती है। साधना करने से पहले, ध्यान और श्रद्धा के साथ माता की कृपा की प्रार्थना करें और उनके मंत्रों का जाप करें। इन महाविद्याओं की साधना आपके जीवन में आनंद, समृद्धि, और सुख का संचार कर सकती है।

एस्ट्रोयोगी की सभी साधकों से अपील है कि तंत्र साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के मार्गदर्शन अथवा अपने गुरु के निर्देशन में ही करें। यदि साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रतिकूल प्रभाव भी साधक पर पड़ सकते हैं।

ये भी देखें: आज का पंचांग ➔  आज की तिथिआज का चौघड़िया  ➔ आज का राहु काल  ➔ आज का शुभ योगआज के शुभ होरा मुहूर्त  ➔ आज का नक्षत्र 

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