विनायक चतुर्थी 2019

इस व्रत का भी उतना ही महत्व है जितना की हिंदू धर्म के अन्य व्रतों का है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस तिथि को गणेश जी का जन्मदिन माना जाता है। गणेश चतुर्थी के अलावा हर महीने में पड़ने वाले प्रत्येक चतुर्थी का अपना ही एक महत्व है। इस लेख में हम चतुर्थी व्रत क्या है, व्रत का महत्व क्या है, व्रथ कथा और व्रत की पूजा विधि क्या है, इस वर्ष यह व्रत किस दिन पड़ रहा है इस बारे में जानेंगे।

विनायक चतुर्थी व्रत क्या है?

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक चंद्र माह में दो चतुर्थियां पड़ती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार चतुर्थी भगवान गणेश की तिथि है। शुक्ल पक्ष के दौरान अमावस्या या अमावस्या के बाद की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में जाना जाता है और कृष्ण पक्ष के दौरान पूर्णिमा या पूर्णिमा के बाद पड़ने वाले चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में जाना जाता है।  वैसे तो विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने किया जाता है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण विनायक चतुर्थी भाद्रपद के महीने में पड़ने वाले को माना जाता है। भाद्रपद माह के विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी पूरे विश्व में हिंदुओं द्वारा भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्रा में इस पर्व को बड़े ही भव्य रूप में मनाया जाता है।

विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व

विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वरद का अर्थ है भगवान से किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए कहना। जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश ज्ञान व धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। बुद्धि व धैर्य दो ऐसे गुण हैं जिनका महत्व मानव को युगों से ज्ञात है। जो कोई भी इन गुणों को अपने पास रखता है, वह जीवन में प्रगति करता है और जो कुछ भी चाहता है वह उसे प्राप्त करने में सफल होता है।

चतुर्थी व्रत कथा

गणेश चतुर्थी के संबंध में एक कथा जग प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती के मन में ख्याल आता है कि उनका कोई पुत्र नहीं है। ऐसे में वे अपने मैल से एक बालक की मूर्ति बनाकर उसमें जीव भरती हैं। इसके बाद वे कंदरा में स्थित कुंड में स्नान करने के लिए चली जाती हैं। परंतु जाने से पहले माता बालक को आदेश देती हैं कि किसी परिस्थिति में किसी को भी कंदरा में प्रवेश न करने देना। बालक अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए कंदरा के द्वार पर पहरा देने लगता है। कुछ समय बीत जाने के बाद वहां भगवान शिव पहुंचते हैं। शिव जैसे ही कंदरा के भीतर जाने के लिए आगे बढ़ते हैं बालक उन्हें रोक देता है। शिव बालक को समझाने का प्रयास करते हैं लेकिन वह उनकी एक न सुना, जिससे क्रोधित हो कर भगवान शिव अपनी त्रिशूल से बालक का शीश धड़ से अलग कर देते हैं।

यह भी पढ़ें - गणेश चतुर्थी 2019 

इस अनिष्ट घटना का आभास माता पार्वती को हो जाता है। वे स्नान कर कंदरा से बाहर आती हैं और देखती है कि उनका पुत्र धरती पर प्राण हीन पड़ा है और उसका शीश कटा है। यह दृष्य देख माता क्रोधित हो जाती हैं जिसे देख सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं। तब भगवान शिव गणों को आदेश देते हैं कि ऐसे बालक का शीश ले आओ जिसकी माता का पीठ उस बालक की ओर हो। गण एक हथनी के बालक का शीश लेकर आते हैं शिव गज के शीश को बाल के धड़ जोड़कर उसे जीवित करते हैं। इसके बाद माता पार्वती शिव से कहती हैं कि यह शीश गज का है जिसके कारण सब मेरे पुत्र का उपहास करेंगे। तब भगवान शिव बालक को वरदान देते हैं कि आज से संसार इन्हें गणपति के नाम से जानेगा। इसके साथ ही सभी देव भी उन्हें वरदान देते हैं कि कोई भी मांगलिक कार्य करने से पूर्व गणेश की पूजा करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा कोई नहीं करता है तो उसे उसके अनुष्ठान का फल नहीं मिलेगा।

विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि

साधक सूर्योदय से पूर्व उठकर शुद्ध हो जाएं। इसके बाद घर अथवा मंदिर में गणेश जी की पूजा करने के लिए स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजन आरंभ करते हुए साधक गणेश मंत्र का उच्चारण कर गणेश जी का आहवाहन कर लें। फिर पुष्प, दूब, चंदन, दही, मिष्ठान, फल तथा पान का पत्ता चढ़ाएं। धूप-दीप जालाकर गणेश कथा का पाठ करें। पाठ हो जाने के बाद आरती कर प्रसाद सभी में बांट दें। सायं को फिर स्नान कर विधिवत गणेश जी की पूजा करें और प्रसाद बांटें और फलाहार कर अगले दीन व्रत को खोलें। राशिनुसार  पूजा विधि जानने के लिए बात करें, देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से।

विनायक चतुर्थी व्रत पूजा तिथि व मुहूर्त 2019

विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा हिंदू कैलेंडर के अनुसार दोपहर में की जाती है। जो इस प्रकार है -

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 10 जनवरी 2019 दिन - बृहस्पतिवार – मुहूर्त – प्रातः 11:27  से  दोपहर 13:31 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 08 फरवरी 2019 दिन – शुक्रवार – मुहूर्त – प्रातः 11:31  से  दोपहर 13:42 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 10 मार्च 2019 दिन – रविवार – मुहूर्त – प्रातः 11:22  से  दोपहर 13:43 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 09 अप्रैल 2019 दिन – मंगलवार – मुहूर्त – प्रातः 11:08  से  दोपहर 13:39 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 08 मई 2019 दिन – बुधवार – मुहूर्त – प्रातः 10:59  से  दोपहर 13:38 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 06 जून 2019 दिन – बृहस्पतिवार – मुहूर्त – प्रातः 10:58  से  दोपहर 13:43 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 06 जुलाई 2019 दिन – शनिवार – मुहूर्त – प्रातः 11:04  से  दोपहर 13:10 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 04 अगस्त 2019 दिन – रविवार – मुहूर्त – प्रातः 11:08  से  दोपहर 13:48 तक

गणेश चतुर्थी - दिनांक - 02 सितंबर 2019 दिन – सोमवार – मुहूर्त – प्रातः 11:06  से  दोपहर 13:37 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 02 अक्टूबर 2019 दिन – बुधवार – मुहूर्त – प्रातः 11:01  से  दोपहर 13:40 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 31 अक्टूबर 2019 दिन – बृहस्पतिवार – मुहूर्त – प्रातः 11:00  से  दोपहर 13:11 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 30 नवंबर 2019 दिन – शनिवार – मुहूर्त – प्रातः 11:08  से  दोपहर 13:12 तक

विनायक चतुर्थी - दिनांक - 30 दिसंबर 2019 दिन – सोमवार – मुहूर्त – प्रातः 11:23  से  दोपहर 13:26 तक

एस्ट्रो लेख

शुक्र का सिंह र...

ऊर्जा व कला के कारक शुक्र माने जाते हैं। शुक्र जातक के किस भाव में बैठे हैं यह बहुत मायने रखता है। शुक्र के हर परिवर्तन के साथ जातक की कुंडली में शुक्र की स्थिति में भी बदलाव आता ह...

और पढ़ें ➜

विदेश जाने का य...

क्या आपको पता है कि आपके विदेश जाने राज आपके हथेली में छुपा है? क्या आप इस बात को मानते है कि हमारे हथेलियों की लकीर में छिपा है हमारे किस्मत का राज? यदि जवाब हां में है तो ठीक यदि...

और पढ़ें ➜

भाद्रपद - भादों...

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल के छठे महीने को भाद्रपद अथवा भादों का महीना कहा जाता है। ये श्रावण माह के बाद और आश्विन माह से पहले आता है। सावन शंकर का महीना है तो भादों श्रीकृष्ण का ...

और पढ़ें ➜

भाई की सुख समृद...

हिंदू धर्म में कई तरह के रीति-रिवाज और परंपराएं विद्यमान है। दुनियाभर में भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है, यहां आए दिन कोई न कोई पर्व मनाया जाता है। वहीं किसी भी तीज-त्योहार क...

और पढ़ें ➜