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फाल्गुन अमावस्या 2018 – क्यों खास है इस वर्ष फाल्गुनी अमावस्या


फाल्गुन अमावस्या 2018 – क्यों खास है इस वर्ष फाल्गुनी अमावस्या

फाल्गुन मास जो कि अल्हड़पन और मस्ती के लिये जाना जाता है और हिंदू वर्ष का अंतिम मास है। फाल्गुन माह में पड़ने वाली अमावस्या ही फाल्गुन या कहें फाल्गुनी अमावस्या कहलाती है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या भी होती है। अमावस्या से पहले दिन यानि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी भगवान शिवशंकर भोलेनाथ की आराधना के पर्व महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है।


फाल्गुन अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिये वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या का महत्व होता है लेकिन फाल्गुनी अमावस्या का अपना विशेष माहात्म्य है। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले दान,तर्पण, श्राद्ध आदि के लिये यह दिन बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है।

मान्यता है कि मृत्यु पर्यन्त दिंवगत आत्माएं पितृ लोक पंहुचती हैं। यह उनका एक प्रकार से अस्थाई निवास होता है और जब तक उनके भाग्य का अंतिम फैसला नहीं होता उन्हें वहीं रहना पड़ता है। इस दौरान उन्हें भूख और प्यास की अत्यंत पीड़ा सहन करनी पड़ती है क्योंकि वे स्वयं कुछ भी ग्रहण करने में समर्थ नहीं होते। उनकी इस पीड़ा का निवारण तभी होता है जब भू लोक से उनके सगे-संबंधि, परिचित या कोई भी उन्हें मानने वाला उनके लिये श्राद्ध दान तर्पण करता है।

हालांकि श्राद्ध हमेशा उसी तिथि को किया जाता है जिस तिथि को दिंवगत आत्मा इह लोक से पर लोक गमन करती है लेकिन यदि यह संभव न हो और किसी कारण वह तिथि मालूम न हो तो प्रत्येक मास में आने वाली अमावस्या को यह किया जा सकता है। साल में 12 अमावस्याएं आती हैं यदि निरंतरता में प्रत्येक अमावस्या को आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो कुछ अमावस्याएं विशेष तौर पर सिर्फ श्राद्ध कर्म के लिये शुभ मानी जाती हैं। फाल्गुन अमावस्या उन्हीं में से एक है।

कालसर्प दोष के निवारण के लिये पूजा भी अमावस्या के दिन विशेष रूप से की जाती है।

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फाल्गुनी अमावस्या पर कई धार्मिक तीर्थों पर फाल्गुन मेलों का आयोजन भी होता है।


फाल्गुनी अमावस्या 2018 – क्यों है खास

इस वर्ष फाल्गुनी अमावस्या अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार 15 फरवरी को गुरुवार के दिन है। अमावस्या से पहले दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। वहीं अमावस्या के दिन ही साल 2018 का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसलिये यह अमावस्य पितरों को मोक्ष दिलाने वाली मानी जा रही है। ग्रहण के समय पितरों के लिये तर्पण करें व ग्रहण के पश्चात पवित्र धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नानादि करें। गंगा स्नान इस दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। हालांकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा जिस कारण सूतक भी नहीं लगेगा।

अमावस्या तिथि आरंभ – 00:47 बजे (15 फरवरी 2018)

अमावस्या तिथि समाप्त – 2:34 बजे (16 फरवरी 2018)


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