कार्तिक मास 2020 - पवित्र नदी में स्नान औऱ दीपदान का महीना

31 अक्तूबर 2020

हिंदू पंचांग के अनुसार साल के 8वें महीने को कार्तिक मास कहा जाता है। ये आश्विन के बाद और अगहन महीने से पहले आता है। हिंदू कैलेंडर में हर महीने का अपना ही एक अलग महत्व है। कहा जाता है कि कार्तिक माह में ही भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा से जागते हैं। पंडितजी  के अनुसार कार्तिक का महीना पवित्र नदी में स्नान और दीपदान का माह माना जाता है। वहीं इस बार 1 नवंबर से 30 नवंबर तक कार्तिक मास रहेगा। इस माह को भगवान शिव, विष्णु, कार्तिकेय औऱ तुलसी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस महीने में ही सूर्य तुला राशि से वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। इस महीने में करवाचौथ, रमा एकादशी, दिवाली और देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। 

 

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कार्तिक माह के कुछ विशेष व्रत और पर्व

 

करवाचौथ

 

पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों द्वारा रखा जाने वाला निर्जला व्रत करवा चौथ इस बार  4 नवंबर को मनाया जाएगा। करवाचौथ व्रत हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना पानी के उपवास रखती हैं।

 

रमा एकादशी

 

कार्तिक माह में पड़ने वाली हर एकादशी का अपना ही एक महत्व है। इस बार रमा एकादशी 11 नवंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण की विधिवत धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प एवं फलों से पूजा की जाती है। इस दिन तुलसी पूजन करना भी शुभ माना जाता है।

 

धनतेरस

 

धनतेरस से ही 5 दिवसीय दीपोत्सव का त्योहार शुरु हो जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। इसके अलावा धन के देवता कुबेर और मृत्युदेव यमराज की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इस बार धनतेरस का पर्व 13 नवंबर को मनाया जा रहा है। 

 

नरक चतुर्दशी

 

नरक चतुर्दशी को ही छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक नरक चतुर्दशी का पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाने का विधान है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और 16 हजार 1 सौ कन्याओं को आजाद करवाया था। इस बार नरक चतुर्दशी का त्योहार 14 नवंबर को मनाया जाएगा। 

 

दीपावली

 

दीपों का पर्व दिवाली इस बार 14 नवंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान राम रावण का वध करके और 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या वापस आए थे जिसकी खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे राज्य को दीपों से जगमगा दिया था। दिवाली की शाम को गणेश लक्ष्मी की पूजा का विधान है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को ही दिवाली का पावन पर्व मनाया जाता है। 

 

गोवर्धन पूजा

 

दिवाली के दूसरे दिन यानि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन अन्नकूट पूजा का भी अपना महत्व है। इस साल 15 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा के लिए घर के द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत के प्रतीक रूप को निर्मित करते हैं। महाराष्ट्र में इस दिन को विष्णु अवतार वामन की राजा महाबलि पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है। वहीं गुजरात में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गुजराती नववर्ष के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। 

 

भाई दूज

 

प्रकाश पर्व यानि दिवाली के 2 दिन बाद भाई-बहन के प्रेम-स्नेह का पर्व भैया दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन यमलोक के राजा यमदेवता और उनकी बहन यमुना जी की पूजा का विधान है। इस साल भाई दूज का पर्व 16 नवंबर 2020 को मनाया जाएगा। 

 

छठ पर्व

 

दिवाली के 6 दिन बाद शुभ मुहूर्त नहाय, खाय और खरना, साझं औऱ भोर के अर्घ्य का पर्व छठ है। इस बार छठ पर्व 20 नवंबर को मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। वैसे तो यह पर्व बिहार में काफी प्रचलित है लेकिन अब इस पूरे उत्तर भारत में भी मनाया जाता है। इस मुख्य पर्व पर सूर्यदेव की उपासना की जाती है।  

 

अक्षय नवमी

 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास की नवमी को आंवला नवमी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के पूजन का भी विधान है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पूर्व दिशा में बैठकर पूजन करके और खीर, पूड़ी, सब्जी और मिष्ठान खाने का प्रावधान है। इस बार यह 23 नवंबर को मनाया जाएगा।

 

देवउठनी एकादशी

 

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु 4 मास की निद्रा के बाद जागते हैं तो उस दिन से मांगलिक कर्म शुरू हो जाते हैं। इस बार 26 नवंबर को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन तुलसी विवाह का भी महत्व है। 

 

कार्तिक पूर्णिमा

 

कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान, त्रिपुरी पूर्णिमा आदि कई नामों से जाना जाता है। कार्तिक माह को पवित्र नदी में स्नान और दीपदान के लिये भी जाना जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 30 नवंबर को मनायी जा रही है। 

 

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