धनतेरस 2020


धन तेरस यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा है। विशेषकर पीतल व चांदी के बर्तन खरीदने का रिवाज़ है। मान्यता है कि इस दिन जो कुछ भी खरीदा जाता है उसमें लाभ होता है। धन संपदा में वृद्धि होती है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धन्वंतरि भी इसी दिन अवतरित हुए थे इसी कारण इसे धन तेरस कहा जाता है। देवताओं व असुरों द्वारा संयुक्त रूप से किये गये समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए चौदह रत्नों में धन्वन्तरि व माता लक्ष्मी शामिल हैं। यह तिथि धनत्रयोदशी के नाम से भी जानी जाती है|

इस दिन लक्ष्मी के साथ धन्वन्तरि की पूजा की जाती है| दीपावली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है| दीपोत्सव का आरंभ धनतेरस से होता है| जैन आगम (जैन साहित्य प्राचीनत) में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' कहते हैं| मान्यता है,  भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे| तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हुये| तभी से यह दिन जैन आगम में धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ| धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है|

धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन से धन्वन्तरि प्रकट हुए| धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था| भगवान धन्वन्तरी कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है| विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदना चाहिए,  क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का धातु है| इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ होता है| धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और यमदेव की पूजा अर्चना का विशेष महत्त्व है| इस दिन को धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है|

धनतेरस पर दक्षिण दिशा में दीप जलाने का महत्त्व

धनतेरस पर दक्षिण दिशा में दिया जलाया जाता है। इसके पिछे की कहानी कुछ यूं है। एक दिन दूत ने बातों ही बातों में यमराज से प्रश्न किया कि अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यमदेव ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दिया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती| इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं| फलस्वरूप उपासक और उसके परिवार को मृत्युदेव यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है| विशेषरूप से यदि घर की लक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है|

धनतेरस पूजा विधि

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है| धनतेरस के अवसर पर यमदेव के नाम से एक दीपक निकालने की भी प्रथा है| दीप जलाकर श्रद्धाभाव से यमराज को नमन करना चाहिए|

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

धनतेरस पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

धनतेरस 2020

13 नवंबर

धनतेरस तिथि - शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 05:25  बजे से शाम 05:59 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:25 से रात 08:06  बजे तक

वृषभ काल -  शाम 05:33 से शाम 07:29 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - रात 09:30 बजे (12 नवंबर 2020) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - शाम 05:59 बजे (13 नवंबर 2020)  तक

धनतेरस 2021

2 नवंबर

धनतेरस तिथि - मंगलवार, 2 नवंबर 2021

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 06:18 बजे से रात 08:10 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:32 से रात 08:10 बजे तक

वृषभ काल -  शाम 06:18 से रात 08:13 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - सुबह 11:31 बजे (2 नवंबर 2021) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - सुबह 09:02 बजे (3 नवंबर 2021)  तक

धनतेरस 2022

22 अक्टूबर

धनतेरस तिथि - शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 07:02 बजे से रात 08:16 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:42 से रात 08:16  बजे तक

वृषभ काल -  शाम 07:02 से रात 08:58 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - शाम 06:02 बजे (22 अक्टूबर 2022) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - शाम 06:03 बजे (23 अक्टूबर 2022)  तक

धनतेरस 2023

10 नवंबर

धनतेरस तिथि - शुक्रवार, 10 नवंबर 2023

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 05:48 बजे से शाम 07:44 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:27 से रात 08:07 बजे तक

वृषभ काल -  शाम 05:48 से शाम 07:44 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - दोपहर 12:35 बजे (10 नवंबर 2023) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - दोपहर 01:57 बजे (11 नवंबर 2023)  तक

धनतेरस 2024

29 अक्टूबर

धनतेरस तिथि - मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 06:32 बजे से रात 08:11 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:35 से रात 08:11 बजे तक

वृषभ काल -  शाम 06:32 से रात 08:28 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - सुबह 10:31 बजे (29 अक्टूबर 2024) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - दोपहर 01:15 बजे (30 अक्टूबर 2024)  तक

धनतेरस 2025

18 अक्टूबर

धनतेरस तिथि - शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 07:17  बजे से रात 08:18 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:45 से रात 08:18 बजे तक

वृषभ काल -  शाम 07:17 से रात 09:12 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - दोपहर 12:18 बजे (18 अक्टूबर 2025) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - दोपहर 01:51 बजे (19 अक्टूबर 2025)  तक

धनतेरस 2026

6 नवंबर

धनतेरस तिथि - शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

धनतेरस पूजन मुर्हुत - शाम 06:03 बजे से शाम 07:59 बजे तक

प्रदोष काल - शाम 05:30 से रात 08:08 बजे तक

वृषभ काल -  शाम 06:03 से शाम 07:59 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - सुबह 10:30 बजे (6 नवंबर 2026) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - सुबह 10:47 बजे (7 नवंबर 2026)  तक

एस्ट्रो लेख

चंद्र ग्रहण 202...

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी के औ...

और पढ़ें ➜

चंद्र ग्रहण का ...

साल 2020 का दूसरा चंद्रग्रहण(chandra grahan 2020) इस बार 5 जून शुक्रवार को पड़ेगा। चंद्र ग्रहण 05 जून रात 11:15 बजे से शुरू होगा और 06 जून 02:34 बजे तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण वृश्चि...

और पढ़ें ➜

ज्येष्ठ पूर्णिम...

वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व माना जाता है लेकिन ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तो और भी पावन मानी जाती है। धार्मिक तौर पर पूर्णिमा को स्नान दान का बहुत अध...

और पढ़ें ➜

निर्जला एकादशी ...

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। लेकिन अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती है। सभी एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान विष्णु क...

और पढ़ें ➜