Mangala Gauri Vrat 2022: अखंड सौभाग्य के लिए करें मंगला गौरी व्रत

bell icon Mon, Jul 25, 2022
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Mangala Gauri Vrat 2022: अखंड सौभाग्य के लिए करें मंगला गौरी व्रत

सावन के प्रत्येक मंगलवार को मां मंगला मौरी का पूजन किया जाता है। लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस बार 19 अप्रैल से मंगला गौरी व्रत शुरू हो रहे हैं। इस लेख को पढ़कर जानिए क्यों रखा जाता है मंगला गौरी व्रत?

Mangala Gauri Vrat 2022 date:  सावन माह भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय है। इस साल 2022 में सावन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई दिन बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह में ही मंगला गौरी व्रत को भी धारण किया जाता है। इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। माता को आराध्य मानते हुए मंगला गौरी व्रत शुरू किया जाता है।मां मंगला गौरी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस  व्रत को करने से विवाह और वैवाहिक जीवन की हर समस्या दूर हो जाती है। अगर किसी की कुंडली में मंगल दोष बाधा उत्पन्न कर रहा है तो इस दिन की पूजा उसके लिए अत्यधिक लाभदायी होती है। पति की लंबी आयु के लिए भी इस दिन शादीशुदा महिलाएं व्रत करती हैं। 

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2022 में कब से है मंगला गौरी व्रत?

मंगलवार को व्रत करने से इसका नाम मंगला व मां गौरी को पूजन होने से इस व्रत का नाम मंगला गौरी पड़ा। इस साल सावन माह में चार मंगलवार पड़ रहे हैं। सावन का पहला मंगलवार 19 जुलाई को पड़ रहा है। वहीं, सावन का आखिरी मंगलवार 09 अगस्त 2022 को पड़ेगा। इसके साथ ही जिन राज्यों अमांत चंद्र कैलेंडर का प्रचलन है, वहां सावन 20 जुलाई 2022 शुक्रवार से प्रारंभ होगा। भारत के महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि राज्यों में अमांत चंद्र कैलेंडर प्रचलनन में है। आइये जानते हैं मंगला गौरी की तिथियों के बारे में

  1. पहला मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई को  
  2. दूसरा मंगला गौरी व्रत 26 जुलाई को 
  3. तीसरा मंगला गौरी व्रत 02 अगस्त को
  4. चौथा मंगला गौरी व्रत 09 अगस्त को

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कौन हैं मां मंगला गौरी

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मां मंगला गौरी, आदि शक्ति माता पार्वती का ही मंगल स्वरूप हैं। इन्हें मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन मां के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है। 

ऐसा कहा जाता है कि माता पर्वती ने भगवान शिव को पति स्वरूप में पाने के लिए कठोर तप किया था,  इस कारण उनका रंग काला पड़ गया था, लेकिन भगवान शंकर ने गंगा जल से प्रयोग से मां को फिर गोरा रंग प्रदान किया। इसी वजह से इनका नाम महागौरी पड़ गया। मां मंगला गौरी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और श्वेत आभूषण भी, इसलिए इन्हें श्वेतांबरी भी कहा जाता है।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

मान्यता है कि मंगला गौरी के व्रत करने से जीवन में खुशहाली और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। पूरे सावन मंगला गौरी की उपासना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इंसान के सारे कष्ट दूर होते हैं। अविवाहित युवतियों के विवाह में आने वाली बाधा दूर हो जाती है और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। संतान से जुड़ी परेशानियों के लिए भी ये व्रत फायदेमंद माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

मां मंगला गौरी का व्रत सावन से शुरू किया जाता है। कुछ लोग इस व्रत को केवल सावन के मंगलवार में रखते हैं, वहीं, कुछ लोग इस व्रत को सावन से शुरू करके 16 मंगलवार करने का संकल्प लेते हैं। इस प्रकार शुरू करें व्रत ।

  •  इस व्रत के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए अथवा नए वस्त्र धारण कर व्रत करना चाहिए।
  • मां मंगला गौरी (पार्वतीजी) का एक चित्र अथवा प्रतिमा लें।
  • इस मंत्र के साथ व्रत करने का संकल्प लें।

मंत्र - 'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।’

अर्थ- ऐसा माना जाता है कि मैं अपने पति, पुत्र-पौत्रों, उनकी सौभाग्य वृद्धि एवं मंगला गौरी की कृपा प्राप्ति के लिए इस व्रत को करने का संकल्प लेती हूं।

  • इसके बाद मंगला गौरी के चित्र या प्रतिमा को एक चौकी पर सफेद फिर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। प्रतिमा के सामने एक घी का दीपक (आटे से बनाया हुआ) जलाएं। दीपक ऐसा हो जिसमें 16 बत्तियां लगाई जा सकें।
  • इसके बाद 'कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम् व नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्...।।' यह मंत्र बोलते हुए माता मंगला गौरी का षोडशोपचार पूजन करें। माता के पूजन के बाद उनको सभी वस्तुएं (जो 16 की संख्या में होनी चाहिए) 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग क‍ी सामग्री, 16 चूड़ियां तथा मिठाई अर्पित करें। इसके अलावा 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज-धान्य (जिसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि चढ़ाएं।
  • पूजन के बाद मंगला गौरी की कथा सुनी जाती है।
  • इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन मां पार्वती की आराधना की जाती है। मां मंगला गौरी व्रत विशेष तौर पर मध्यप्रदेश, पंजाब, बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हिमाचलप्रदेश में प्रचलित है।

मां मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा

पम्पापुर नामक गांव में एक साहूकार अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह धनवान और सुखी था, परंतु उनके कोई संतान नहीं थी। बस यही दुख उनके मन में चिंता पैदा करता था। एक दिन साहूकार के घर पर एक साधु आया। साहूकार ने उनका खूब आदर-सत्कार किया और अपनी व्यथा सुनाई। साधु ने उन्हें मंगलवार को पार्वतीजी की पूजा करने तथा व्रत रखने को कहा। 

सावन माह के  पहले मंगलवार से सेठानी ने पार्वतीजी की पूजन व व्रत करना प्रारंभ किर दिया।  कई महीनों तक उन्होंने व्रत एवं पूजन किया। उनके भक्तिभाव से मां पार्वतीजी प्रसन्न हुईं। एक दिन साहूकार को स्वप्न आया कि जिस आम के वृक्ष के नीचे गणेशजी  बैठे हों, उस आम के वृक्ष का फल तोड़कर अपनी पत्नी को खिला दे, तो अवश्य ही तुझे पुत्ररत्न की प्राप्ति होगी। 

अब तो साहूकार ऐसे आम के वृक्ष को ढूंढता रहता। एक दिन उसे ऐसा आम का वृक्ष दिखाई दे गया, तब फल तोड़ने के लिए उसने पेड़ पर पत्‍थर मारे। आम का फल तो प्राप्त हो गया, परंतु गणेशजी को पत्थर लग जाने से उन्होंने उसे श्राप देते हुए कहा कि हे स्वार्थी मनुष्य, तूने अपने स्वार्थ के कारण मुझे चोट पहुंचाई है, अत: तुझे भी एक ऐसी ही चोट लगेगी। 

मां पार्वती के आशीर्वाद से तुझे पुत्र-रत्न की प्राप्ति तो होगी, परंतु वह सर्पदंश के कारण 21 वर्ष की आयु तक जीवित रहेगा। ऐसी वाणी सुनकर साहूकार घबरा गया। उस साहूकार ने आम का फल अपनी पत्नी को खिला दिया, परंतु गणेशजी के श्राप देने वाली बात नहीं बतायी। 9 माह बाद साहूकार के घर में एक सुंदर बालक का जन्म हुआ। उसका नाम मनु रखा गया। उन्होंने मनु के लाड़-प्यार में कोई कमी नहीं रखी। धीरे-धीरे मनु 20 वर्ष का हो गया। वह अपने पिता के साथ व्यापार करने जाता था। एक दिन व्यापार करके लौटते समय दोनों पिता-पुत्र भोजन करने के लिए एक गांव के पास तालाब के किनारे पेड़ की छांव में बैठ गए और भोजन  करने लगे। कुछ देर बाद उस गांव की दो लड़कियां उस तालाब पर कपड़े धोने आईं। वे लड़कियां हंसमुख, फुर्तीली एवं उच्च-सभ्य घर की प्रतीत हो रही थीं। कपड़े धोते समय वे आपस में वार्तालाप करती जातीं। उनमें से कमला ने कहा- क्योंरी मंगला, तुझे याद है, मैं कब से मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत करती हूं। 

अब तो अगले मंगलवार व्रत का उद्यापन भी करूंगी। इस व्रत के करने से मुझे मेरे मन लायक पति मिलेगा और सुख-चैन से रहूंगी। ऐसा कहते हुए कमला ने आगे कहा- मंगला, तू भी अगले साल सावन माह के पहले मंगलवार से व्रत करना शुरू कर देना तो तुझे भी मनपसंद वर मिलेगा। इस व्रत को करने से पति की आयु भी बढ़ती है। मंगला भी व्रत करने को राजी हो गई।

पेड़ के नीचे भोजन करते समय वे दोनों पिता-पुत्र उन लड़कियों की बातचीत सुन रहे थे। उन लड़कियों के वार्तालाप से सेठजी ने समझ लिया कि कमला नाम की लड़की अपने पुत्र के विवाह के लिए सर्वथा उपयुक्त है। सेठजी ने अपने पुत्र की मनोभावना जानने के लिए पुत्र से कई तरह की बातें कहीं। पुत्र भी अपने पिता के विचारों से सहमति प्रकट करता रहा। अत: सेठजी ने अपने पुत्र का कमला के साथ विवाह करने का निश्चय कर लिया और सोचा कि ऐसा होने पर मेरे पुत्र की आयु बढ़ सकती है और कोई अनहोनी घटना भी टल सकती है।

अब पिता-पुत्र कमला के पीछे-पीछे उसके घर गए। कमला के पिता भी नामी साहूकार थे। सेठजी ने कमला के पिता से अपने पुत्र के विवाह के बारे में बातचीत की। वे कमला का विवाह मनु के साथ करने को सहमत हो गए। शुभ मुहूर्त में बड़ी धूमधाम से उनका विवाह संपन्न हो गया। दोनों ने पति-पत्नी के रूप में अपनी गृहस्थी शुरू किया।

कमला ने ससुराल में आकर भी मंगला गौरी का व्रत नियमानुसार चालू रखा, जिससे माता पार्वती एक दिन कमला को स्वप्न में दर्शन देकर कहने लगीं कि मैं तेरे व्रत से प्रसन्न हूं, लेकिन तेरे पति की आयु बहुत कम है। अगले महीने मंगलवार को एक सर्प तेरे पति के प्राण लेने आएगा, लेकिन तू घबराना नहीं। सर्प के लिए एक प्याले में मीठा दूध रखना, उसके पास एक खाली मटकी रख देना। सांप दूध पीकर अपने अपने आप मटकी के अंदर बैठ जाएगा, तब तू जल्दी से उस मटकी का मुंह कपड़े से बांध देना और उसे जंगल में छोड़ आना। इससे तेरे पति के प्राण बच जाएंगे।

अब मंगलवार का दिन आया। कमला ने किसी को कुछ नहीं बताया और माता पार्वती के कहे अनुसार सारा कार्य कर दिया। मां पार्वती की कृपा से कमला के पति के प्राण बच गए। इस प्रकार व्रत के प्रभाव से मनु श्राप के प्रभाव से मुक्त हो गया। जब घर लोगों को सारी घटना मालूम हुई तो सबने खुशी मनाई। अब तो चारों ओर कमला का गुणगान होने लगा। गांव की महिलाओं ने भी कमला से व्रत का विधि-विधान पूछा और व्रत करने लगीं। कमला ने भी अगले मंगलवार विधि-विधान से मंगला गौरी व्रत का उद्यापन भव्य रूप से कराया। ब्राह्मणों को भोजन करा, दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया।

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✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी

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