सावन का तीसरा सोमवार - ये बन रहे हैं सयोंग

सावन का महिना, भगवान शिव का प्रिय महिना माना जाता है इसिलिए इस महिनें में भगवान शिव की अराधना करनें की हिंदु धर्म में परंपरा है। हर वर्ष सावन का ये महिना अपने साथ कई सयोंग लेकर आता है। जिनके कारण कुछ दिन अति शुभ माने जाते हैं। सावन के इस पवित्र माह में सोमवार के व्रतों का काफी महत्व माना गया है। इस सावन के दो सोमवार गुजर चुके हैं और आने वाला है तीसरा सोमवार, तीसरा सोमवार अंग्रेजी कलेंडर के हिसाब से 5 अगस्त को आने वाला है। इस बार ये तीसरा सोमवार अपने साथ कुछ सयोंग लेकर आया है जिस से ये खास बन रहा है। तो आईए जानते हैं 2019 में सावन के तीसरे सोमवार का महत्व।

 

तीसरे सोमवार के सयोंग

5 अगस्त 2019 को सावन का तीसरा सोमवार पड़ रहा है। भगवान शिव की आराधना के इस दिन बहुत ही अच्छा संयोग बन रहा है। इस दिन नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा जो कि शिवभक्ति का ही पर्व है। इसलिये सावन का यह तीसरा सोमवार बहुत ही खास हो जाता है। इस दिन का नक्षत्र हस्त है जो कि चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है। चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगें। कुल मिलाकर इस सोमवार को बहुत ही सौभाग्यशाली माना जा सकता है।

 

क्या है हस्त नक्षत्र

भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के हिसाब से कुंडली से कि जाने वाली गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताईस नक्षत्रों में से हस्त नक्षत्र को 13 वां स्थान दिया गया है। इसके साथ साथ भगवान शिव की जटाओं में विराजने वाले चंद्रमा के अधीन इस नक्षत्र को माना जाता है। चंद्रमा को वैदिक ज्योतिष के अनुसार मन का, द्रव्य का, कला का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ही इस नक्षत्र की राशि कन्या मानी जाती है जिसके स्वामी बुध माने जाते हैं। कुल मिलाकर यह संयोग आपके लिये बहुत ही सौभाग्यशाली कहा जा सकता है। रूप, गुण, कला, ज्ञान, विवेक आदि के लिये यह नक्षत्र बहुत महत्वपूर्ण होता है। 

 

मधुस्रावणी पर्व क्या है

मधुस्रावणी पर्व मिथिलांचल क्षेत्र में सबसे पावन व्रत को कहा जाता है। ये व्रत नवविहाताओं द्वारा रखा जाता है। इस दिन पंद्रह दिन तक चलने वाले मधुस्रावणी व्रत का समापन होता है  इस व्रत की खास बात ये है की नवविवाहिताएं इन पंद्रह दिनों तक केवल अपने ससुराल के दिए वस्त्र और भोजन ही ग्रहण करती हैं। ये व्रत अच्छे दांपत्य जीवन और परिवार में खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस व्रत के पीछे मान्यता ये है की मां गौरी नें महादेव को अपने पति के रुप में पाने के लिए काफी वर्षों से कठोर तपस्या की थी। अन्य देवताओं के द्वारा मां गौरी के इस कठोर तपस्या को देख महादेव को गौरी से विवाह करने का आग्रह किये तथा महादेव भी गौरी के कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गौरी से विवाह कर पारिवारिक संबंध में बंध गये। इसी उपलक्ष्य में ये पर्व मनाया जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव की पांच पुत्रियों के जन्म की कहानी इस पर्व से जुड़ी हुई है। नाग पंचमी भी इसलिये मनाई जाती है। संयोग से सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी भी का पर्व भी पड़ रहा है। मधुस्रावणी पर्व सावन माह की कृष्ण पंचमी से लेकर शुक्ल पंचमी तक चलता है।

 

तीसरे सोमवार का महत्व

इन पर्वों के सयोंग के कारण इस सावन का ये तीसरा सोमवार अति महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना करने से विवाहिताओं को अच्छा दामपत्य सुख और अविवाहितों को सुयोग्य वर मिलने के योग बन रहे हैं। इसलिए इस सोमवार के महत्व को समझते हुए पूरे विधि विधान से व्रत और अराधना करना भी आवश्यक है।

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