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इन राशियों के प्यार में लिखी है तकरार


इन राशियों के प्यार में लिखी है तकरार

प्रेम एक ऐसा भाव है जो किसी खास रिश्ते में बंधा नहीं होता लेकिन प्रत्येक रिश्ते को खास बनाने के लिये प्रेम का होना आवश्यक है। हालांकि कहते हैं कि प्यार अंधा भी होता है लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि हम प्रेम में भले बूरे की पहचान भी खो देते हैं। इंसान की सोचने, समझने और विश्लेषण करने की अपनी सीमितताएं होती हैं इसलिये वह सतही तौर पर तो कोई आकलन कर सकता है लेकिन अच्छे बूरे अपने पराये की पहचान उसे तभी होती है जब वह ऐसे मोड़ पर पंहुच जाता है जहां से लौटकर आना उसके लिये दुखदायी हो। इसलिये ज्योतिष शास्त्र जन्म कुंडली के अनुसार ग्रहों की दशा व दिशा के आधार पर आकलन कर सुझाता है कि किसके साथ हम प्रेम कर सकते हैं और किसके साथ नहीं। विवाह करने से पहले अक्सर कुंडलियों का मिलान किया जाता है उसका अभिप्राय भी यही रहता है कि जातकों के गुणों का मिलान किया जाये कि इनके ग्रह आपस में मेल रखते हैं या नहीं उसी पर सुखी जीवन का सपना निर्भर करता है। तो आइये जानते हैं कि राशि के अनुसार किस राशि के जातकों में प्रेम होने पर उनका जीवन सुखी रहने की संभावना कम होती हैं। या कहें किस राशि के जातकों से प्रेम करने से पहले आपको अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिये।

राशि चक्र में बारह राशियां होती हैं। इन बारह राशियों के स्वामी 9 ग्रह होते हैं। इन्ही ग्रहों के प्रभाव से राशियों की प्रकृति निर्धारित होती है फिर यही प्रकृति आपके प्रेम और अंतर्विरोधों को जन्म देती है। राशि चक्र की निम्न राशियां एक दूसरे से मेल नहीं खाती जिनके कारण इनका प्रेमजीवन कष्टप्रद रहने की संभावना होती है।


मेष, मिथुन व कुंभ जातकों का कर्क राशि वालों के साथ प्रेम होता है कष्टदायक

मेष और कर्क राशि का स्वभाव एक दूसरे मेल नहीं खाता। मेष राशि का स्वामी मंगल होता है इसलिये मेष जातक काफी ऊर्जावान होते हैं, व्यावहारिक होते हैं वहीं कर्क जातक काफी संवेदी और भावुक प्रकृति के होते हैं। इसी वजह से इनका आपसी स्वभाव एक दूसरे से टकराने की संभावनाएं प्रबल रहती हैं। वहीं कुंभ जातक कर्क राशि वालों को शुरूआत में तो प्रभावित करते हैं लेकिन कुछ समय के पश्चात कर्क की कुंभ से अनबन शुरु हो जाती है। कुंभ जातक असल में काफी सक्रिय और उत्साह वाले होते हैं जबकि कर्क जातक अपने दायरे से बाहर निकलने में झिझकते हैं खासकर घर परिवार से ज्यादा समय तक दूरी बनाये रखना इनके लिये बहुत मुश्किल होता है अक्सर कुंभ व कर्क जातकों के प्रेम में अंतर्विरोध इसी को लेकर पैदा होते हैं। इसी तरह मिथुन जातकों की भावशून्यता के शिकार भी अतिसंवेदनशील होने के कारण कर्क जातक बन जाते हैं इस कारण ज्योतिष के विद्वान मिथुन व कर्क जातकों के रिश्ते को भी मधुर नहीं बताते कुल मिलाकर मेष, मिथुन व कुंभ राशि के जातकों को कर्क राशि के जातकों के साथ प्रेम संबंध स्थापित करने से पहले पुनर्विचार करना चाहिये।


सिंह जातक रहें कन्या, मीन व वृषभ से दूर

वृषभ जातक काफी धैर्यवान होते हैं, स्थायित्व और सुरक्षित वातावरण की चाह रखते हैं जबकि जोश व जुनून से लबरेज सिंह जातक एक जगह टिकने में कम यकीन रखते हैं। इनके स्वभाव में निहित यहीं कारक इनके दिलों में दूरियां पैदा होने का कारण भी बनते हैं। वहीं कन्या जातक मितव्ययी होते हैं और सिंह जातकों की खर्चा करने की आदत होती है इनका यही स्वभाव प्रेम जीवन में खलल पैदा करने के लिये काफी होता है। सिंह जातक स्वभाव से स्वतंत्र होते हैं और साथ ही अपने साथी से काफी अपेक्षाएं भी रखते हैं सामने वाले मर्जी हो या न हो इनकी मर्जी पूरी होनी चाहिये इस मामले में मीन जातकों के साथ इनका आंकड़ा छत्तीस का हो जाता है क्योंकि मीन जातक अपनी एक अलग ही दुनिया में रहते हैं बेपरवाह जो कि सिंह जातकों को अच्छा नहीं लगता। इसलिये ज्योतिषाचार्य सुझाते हैं कि सिंह जातक कन्या, मीन व वृषभ जातकों से दूर ही रहें तो इनका जीवन सुखद रहता है।


वृश्चिक की मेष व कुंभ से नहीं बनती

वृश्चिक व मेष राशि दोनों ही स्वभाव से स्वतंत्र व आत्मनिर्भर होती है। इनके प्रेमजीवन में आड़े आता है अहं। मेष जहां थोड़े चंचल और फ्लर्ट मिज़ाज के होते हैं तो वृश्चिक जातकों को इनकी इस प्रवृति से ईर्ष्या होने लगती है यही कारण है कि इनके बीच विश्वास का रिश्ता कायम नहीं हो पाता और संबंध विच्छेद की नौबत आ जाती है। वहीं कुंभ जातक काफी रोमांचकारी होते हैं नये की तलाश में नयी नयी जगहों पर जाना पसंद करते हैं जबकि वृश्चिक जातक इनसे समर्पण व स्थायीत्व की उम्मीद लगाये रहते हैं जब उम्मीदों पर पानी फिरने लगता है तो परिणति बिल्कुल भी अच्छी नहीं होती। इसलिये ज्योतिषाचार्य यही सलाह देते हैं वृश्चिक जातक मेष व कुंभ जातकों के प्रेम में न ही पड़ें तो अच्छा रहता है।


कुंभ की वृषभ, वृश्चिक व कर्क से रहती है अनबन

वृश्चिक की तरह वृषभ राशि वाले भी कुंभ राशि वाले अपने साथी को अपने साथ रखना चाहते हैं लेकिन कुंभ खुले स्वभाव के होने के कारण एक जगह पर टिकना कम ही पसंद करते हैं जिस कारण इनका विवाद बढ़ जाता है कर्क वालों के साथ कड़वाहट का कारण पहले बता ही चुके हैं।


मकर बनायें तुला व धनु जातकों से दूरी

तुला राशि का स्वभाव होता है दूसरों की खुशी में अपनी खुशी प्रकट करना, जबकि मकर राशि के जातक होते हैं थोड़े दंबंग टाइप कई बार ये तुला जातकों के स्वभाव का फायदा भी उठाते हैं लेकिन बर्दाश्त करना जब हद से ज्यादा हो जाता है तो फिर प्यार में तकरार स्वभाविक हो जाती है। वहीं धनु जातकों को मकर राशि वालों की उदासीनता बिल्कुल भी नहीं भाती यही कारण है कि इन्हें मकर राशि वालों के साथ से उकताहट होने लगती है। इसलिये मकर राशि वालों के लिये बेहतर है कि वे तुला व धनु राशि वाले जातकों के साथ प्रेम संबंध न स्थापित करें।


मिथुन – मीन, कन्या व कर्क से न हो प्यार

मिथुन जातकों यदि मीन कन्या व कर्क से प्यार हो जाये तो पछताना पड़ सकता है। दरअसल मिथुन चाहते हैं आजादी जबकि मीन उन्हें बांध कर रखना चाहते हैं। वहीं कन्या राशि वाले होते हैं सपष्ट तो मिथुन वाले रहते हैं अक्सर असमंजस में। कर्क वालों के साथ तालमेल क्यों नहीं बैठता इसी पोस्ट में ऊपर बता चुके हैं। तो मिथुन जातकों अगर अपनी आजादी प्यारी है तो मीन, कन्या व कर्क से प्यार के पचड़े में न ही पड़ें तो बेहतर है।

उपरोक्त जिन भी राशियों के बारे में लेख में जिक्र किया गया है वह जरूरी नहीं है कि पूरे तौर पर सही उतरे, जन्म के समय ग्रहों की दशा पर भी काफी निर्भर करता है लेकिन आमतौर पर ज्योतिषाचार्य इसे शुभ नहीं मानते। यदि आप भी किसी विपरीत राशि वाले के प्यार में पड़े हैं तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर इसका उपाय जान सकते हैं। परामर्श करने के लिये लिंक पर क्लिक करें।


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