Varalakshmi Vratam - धन एवं समृद्धि के लिए रखें वरलक्ष्मी व्रत

20 अगस्त 2021

माता लक्ष्मी (Maa laxmi) के 8 स्वरूपों में से एक वरलक्ष्मी (varalakshmi vratam) का व्रत श्रावण मास के आखिरी शुक्रवार को होता है। इस साल ये व्रत 20 अगस्त को पड़ रहा है। कहते हैं कि  वरलक्ष्मी व्रत (varalakshmi vratam) को परिवार की सलामती के लिए रखा जाता है और अविवाहित लड़कियां इस व्रत को नहीं रख सकतीं।

 

क्षीर सागर से उत्पन्न हुईं थी वरलक्ष्मी

कहते हैं कि मां लक्ष्मी के आठवें स्वरूप के लिए ये व्रत रखा जाता है। लक्ष्मी जी का ये व्रत उनके अष्टलक्ष्मी पूजन का फल प्रदान करता है। मान्यता है कि वरलक्ष्मी (varamahalakshmi) का अवतरण दूधिया महासागर से हुआ था, जिसे क्षीर सागर भी कहा जाता है। खुद मां लक्ष्मी ने इस रूप में अवतार लिया था। आपको बता दें कि क्षीर सागर में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। 

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वरलक्ष्मी व्रत 2021 शुभ मुहूर्त और तिथि 

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष के दौरान आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है और राखी और श्रवण पूर्णिमा के कुछ दिन पहले आता है।

वरलक्ष्मी व्रत शुक्रवार, अगस्त 20, 2021 को

  • सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (प्रातः) 05 बजकर 53 मिनट से 07 बजकर 59 मिनट तक (अवधि - 02 घण्टे 06 मिनट)
  • वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (अपराह्न) - 12 बजकर 35 मिनट से 02 बजकर 54 मिनट तक (अवधि- 02 घण्टे 19 मिनट)
  • कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त (सन्ध्या)- 06 बजकर 40 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट (अवधि- 01 घण्टा 27 मिनट)
  • वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि)- 11 बजकर 07 मिनट से 01 बजकर 03 मिनट तक, अगस्त 21 (अवधि- 01 घण्टा 56 मिनट)

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वरलक्ष्मी व्रत से प्राप्त होती है सुख-समृद्धि

मां लक्ष्मी के स्वरूप वरलक्ष्मी (varamahalakshmi) की उपासना करने से मनुष्य को सुख-समृद्धि और धन धान्य की प्राप्ति होती है। वरलक्ष्मी व्रत और पूजन मां लक्ष्मी को ही समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी विवाहित महिला पूरे विधि विधान से माँ लक्ष्मी की पूजा करती है तो माता की कृपा उस महिला और उसके परिवार पर ज़रूर बरसती है और उसके जीवन में कभी धन धान्य की कमी नहीं होती। इसके अलावा इस व्रत को करने वाले महिला के जीवन से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। जैसे आर्थिक परेशानी, क़र्ज़ आदि से मुक्ति मिलती है।

 

वरलक्ष्मी व्रत को करने की विधि

  • इस व्रत की शुरूआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद हो जाती है।
  • इस दिन प्रात: उठकर घर में सबसे पहले साफ-सफाई करें और उसके बाद नहा लें।
  • फिर घर के पूजा स्थल पर चौक या रंगोली बनाएं। मां लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं फिर नए कपड़ों, जेवर और कुमकुम से मूर्ति को सजाएं।
  • इसके बाद गणेशजी और माता लक्ष्मी की मूर्ति को पूर्व दिशा में रखें।
  • इनके पास चावल भरकर कलश को स्थापित करें और लक्ष्मी जी के साथ ही कलश पर भी चंदन से तिलक लगाएं।
  • फिर दीप और धूप प्रज्जवलित करें। पूजा की थाली में एक नया लाल कपड़ा और चावल, खीर या सफेद मिठाई रखें।
  • इसके बाद वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें। इस कथा के बाद पूजा समाप्त हो जाती है। बाद में प्रसाद को महिलाओं में वितरित करें।

 

वरलक्ष्मी व्रत की कथा

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, एकबार भगवान शंकर ने माता पार्वती को वरलक्ष्मी व्रत के महत्व के बारे में बताया था। कहा जाता है कि मगध देश में कुंडी नाम का नगर हुआ करता था, जो सोने का बना हुआ था। इस नगर में एक स्त्री चारूमती रहती थी, जो कि एक आदर्श पत्नी की तरह अपने परिवार की देखभाल करती थी। परिवार की देखभाल के साथ-साथ चारूमती मां लक्ष्मी की भी अराधनी करती थी, जिसकी वजह से मां लक्ष्मी चारुमती से बहुत ही प्रसन्न रहती थीं। 

एक बार की बात है, जब देवी लक्ष्मी ने चारुमती को सपने में दर्शन दिए और उसे वरलक्ष्मी व्रत रखने के लिए कहा। इस स्वप्न के बारे में चारूमती ने अपनी आस-पड़ोस की महिलाओं को भी बताया। चारूमती के सपने को सुनकर पड़ोस में रहने वाली महिलाओं ने भी श्रावण मास में पूर्णमासी से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को वरलक्ष्मी का व्रत रखा। चारूमती समेत सभी महिलाओं ने  देवी लक्ष्मी द्वारा बताई गई विधि से पूजा की और उसके बाद कलश की परिक्रमा की। जैसे ही परिक्रमा पूरी हुई तो उन सभी के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए। उनके घर भी स्वर्ण के बन गए तथा उनके घर पर गाय, घोड़े, हाथी आदि वाहन आ गए। इस पर व्रत करनेवाली सभी महिलाओं ने चारूमती की प्रशंसा की क्योंकि उसी के कारण सभी को व्रत रखने का सौभाग्य मिला, जिससे सभी को सुख समृद्धि की प्राप्ति हुई। बाद में सभी नगर वासियों को इसी वरलक्ष्मी (varamahalakshmi) व्रत को रखने से सामान समृद्धि की प्राप्ति हो गई।

 

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