गणेश रूद्राक्ष से मिलती है सदबुद्धि

15 मई 2017

जीवन में अक्सर निर्णायक मोड़ आते रहते हैं जो हमारे जीवन की दशा व दिशा बदल कर रख देते हैं। यदि इन निर्याणक मोड़ों पर हम सही निर्णय लेते हैं तो सकारात्मक परिवर्तन होते हैं और अगर हमारे द्वारा लिया फैसला उल्टा पड़ जाये तो फिर जो होता है उसे देखकर हम झल्ला जाते हैं यानि परिवर्तन नकारात्मक होते हैं। कई बार हम जानबूझ कर तो कई बार अन्जाने में ही आत्मविश्वास में भर सही और गलत निर्णय लेने में समर्थ होते हैं ऐसे में हम अपने निर्णयों के सही गलत होने पर कोई ज्यादा खुशी और दुख मनाने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि परिणाम चाहे जो भी रहे हम उसके लिये दिमागी तौर पर तैयार रहते हैं। लेकिन बहुत बार निर्णय लेने में ऐसे पेंच उलझते हैं कि अपने आप को चोराहे पर खड़ा पाते हैं और यह मालूम नहीं होता कि जायें तो जायें कहां। इसी उलझन, इसी असमंजस, इसी द्वंद्व में जब घिरे हों तो हमें कोई चाहिये जो हमें मार्ग सुझा सके, जो हमें सद्बुद्धि दे सके। अब सद्बुद्धि कौन देते हैं वह देने वाले हैं भगवान श्री गणेश और भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिये, उनका आशीर्वाद हमेशा साथ रखने के लिये पहना जाता है एक अनमोल रत्न जिसे कहते हैं गणेश रूद्राक्ष। रूद्राक्ष यानि भगवान रूद्र का अक्ष यानि भगवान शिवशंकर के नेत्रों का जल बिंदु। रूद्राक्ष कई तरह के होते हैं। लेकिन मुख्य रूप से यह गौरी शंकर रूद्राक्ष, गणेश रूद्राक्ष और गौरीपाठ रूद्राक्ष माने जाते हैं। इनमें से भगवान गणेश का रूद्राक्ष निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। विद्यार्थियों के लिये तो यह बहुत ही सौभाग्यशाली माना जाता है।

गणेश रूद्राक्ष का महत्व

गणेश रूद्राक्ष विघ्नकर्ता भगवान श्री गणेश जो कि बुद्धि के देवता रिद्धि सिद्धियों के स्वामी माने जाते हैं उन्हीं श्री गणेश का स्वरूप इसे माना जाता है। मान्यता है कि गणेश रूद्राक्ष धारण करने से जातक की बुद्धि पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे जातक अहम निर्णयों को लेने में किसी तरह की दुविधा में नहीं पड़ता। इतना ही नहीं बल्कि यह रूद्राक्ष धारण करने पर जातक के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं व ऐश्वर्य का जीवन भोगते हुए अंत समय मोक्ष को प्राप्त होता है।

कैसे करें गणेश रूद्राक्ष की पहचान

गणेश रूद्राक्ष की विशेष पहचान होती है रूद्राक्ष में भगवान गणेश की आकृति का होना। गणेश रूद्राक्ष में सुंड की तरह का एक उभार देखा जाता है। यह एक बहुत ही दिव्य मनका माना जाता है।

गणेश रूद्राक्ष धारण करने की विधि

गणेश रूद्राक्ष को लाल धागे या सोने अथवा चांदी के तार में धारण किया जाता है। रूद्राक्ष धारण करने के लिये सोमवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भी इस रूद्राक्ष को धारण करना बहुत ही सौभाग्यशाली व शुभ फलदायी माना जाता है।

हमारी सलाह है कि किसी भी रत्न चाहे मोती हो या रूद्राक्ष को धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिये। रूद्राक्ष हो या अन्य रत्न धारण करने से पहले अपनी कुंडली जरूर दिखा लेनी चाहिये। क्योंकि रूद्राक्ष या रत्न प्रभावी तभी रहते हैं जब आप उन्हें अपनी कुंडली में ग्रहों की दशा व दिशा के अनुसार धारण करते हैं। यदि आप भी अपनी कुंडली पर ज्योतिषीय परामर्श पाने के इच्छुक हैं तो कृपया यहां क्लिक करें।

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