साल 2022 में कब है पूर्णिंमा? जानें पूर्णिमा पूजा एवं व्रत विधि

bell icon Mon, Dec 13, 2021
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Purnima 2022: कब है 2022 में पूर्णिमा? जानें तिथि एवं समय

हिन्दू धर्म के लोगों के जीवन में पूर्णिमा को विशेष स्थान प्राप्त है और हर वर्ष के 12 महीनों में 12 पूर्णिमा आती है। आने वाले नए साल में पूर्णिमा की तिथि एवं समय को जानने के लिए पढ़ें।

पूर्णिमा के दिन को हिन्दू धर्म में अत्यधिक शुभ माना जाता है जो प्रत्येक माह आती है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा तिथि का अपना अलग महत्व होता है। हिन्दू समुदाय के लोगों के जीवन में पूर्णिमा को विशेष स्थान प्राप्त है। वर्ष के 12 महीनों में 12 पूर्णिमा आती है और हर पूर्णिमा पर कोई न कोई त्यौहार एवं व्रत अवश्य मनाया जाता है। पूर्णिमा 2022 के माध्यम से आने वाली पूर्णिमा की तिथि, दिन एवं समय के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।  

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क्या होती है पूर्णिमा?

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर माह में कुल 30 तिथियां होती है और इन्ही 30 तिथियों को चन्द्रमा की कला के आधार पर 15-15 दिन के दो पक्षों अर्थात भागो में बांटा गया है जो इस प्रकार है:“शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। प्रत्येक पक्ष में 14 तिथियां और एक विशेष तिथि पूर्णिमा या अमावस्या होती है।

कब होती है पूर्णिमा?

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, महीने के प्रथम भाग को शुक्ल पक्ष कहते है और शुक्ल पक्ष की पहली तिथि को प्रतिपदा या शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा भी कहा जाता है। यह पक्ष प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया से लेकर चतुर्दशी (चौदस) तक निरंतर चलता है और इसकी अगली तिथि अर्थात शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा, पूरनमासी या शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कहते है। इस दिन चन्द्रमा अपने पूर्ण आकार में दिखाई देता है।

पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता हैं। इस तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने पूरे आकार में दर्शन देता है। पूर्णिमा को देश में अलग-अलग स्थानों पर अनेक नामों से जाना जाता है जैसे किसी जगह पर पौर्णिमी, तो कहीं पूर्णमासी कहा जाता  है। 

सनातन धर्म में पूर्णिमा के दिन दान, धर्म के साथ-साथ व्रत करने की भी मान्यता है। कार्तिक वैशाख और माघ महीने की पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक स्थानों पर स्नान, दर्शन एवं दान-धर्म करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा का विधान है। पूर्णिमा का अत्यंत महत्व होने के कारण पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा आदि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किये जाते हैं। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य को हर तरह की सुख,शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन पूर्वजों का स्मरण करने की भी परंपरा है।

पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में एक पूर्णिमा अवश्य आती है, इस प्रकार से वर्ष के 12 महीने में कुल 12 पूर्णिमा आती हैं। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, मानव जीवन के लिए पूर्णिमा को अतिफलदायी माना गया है। हिन्दू कैलेंडर में पूर्णिमा तिथि का निर्धारण चंद्रमा की गति के आधार पर किया जाता है, जिस दिन चन्द्रमा अपने पूरे आकार में निकलता है उस तिथि को पूर्णिमा कहते है, इसके विपरीत जब चन्द्रमा नहीं निकलता है, उस तिथि को अमावस्या कहते हैं।

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पूर्णिमा का ज्योतिषीय एवं वैज्ञानिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र में भी पूर्णिमा तिथि को महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अतिरिक्त पूर्णिमा के अवसर पर ही महान आत्माओं के जन्म उत्सव से लेकर बड़े-बड़े त्योहारों को धूमधाम से मनाया जाता हैं। हिन्दू धर्म के लोगों के लिए पूर्णिमा तिथि विशेष रूप से मायने रखती है। वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को मन का कारक माना गया है। यही कारण है कि चन्द्रमा के अपने पूर्ण आकार में होने से उसका प्रभाव जातक के मन पर सीधा पड़ता है।

अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा के बारे में बात करें तो चन्द्रमा पानी को अपनी तरफ आकर्षित करता है, और मानव शरीर में 70 प्रतिशत पानी होता है जिसके कारण पूर्णिमा के दिन मनुष्य के स्वभाव में कुछ न कुछ परिवर्तन जरूर होता है। हिन्दू पंचांग में प्रत्येक पूर्णिमा का अपना विशिष्ट महत्व होता है इसलिए सालभर आने वाली 12 पूर्णिमा पर कोई खास त्यौहार या व्रत मनाया जाता हैं।

पूर्णिमा तिथि पर घरों में भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा करने की परंपरा हैं। पुराणों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन अनेक देवी-देवता मानव रूप में परिवर्तित हो गए थे। पूर्णिमा की रात को आसमान में पूरा चाँद दिखाई देता हैं जो रात के अंधकार को अपने प्रकाश से दूर करता है। भविष्य पुराण में पूर्णिमा के विषय में वर्णित है कि पूर्णिमा के दिन किसी धार्मिक स्थल के पवित्र कुंड में स्नानादि करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। अगर तीर्थस्थल पर जाना संभव नहीं है तो आप घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान कर सकते है। पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण करना भी शुभ माना गया है।

पूर्णिमा पूजा एवं व्रत विधि

  • पूर्णिमा तिथि पर प्रातः काल जल्दी उठकर सूर्योदय से पूर्व स्नानादि कार्यों से निवृत होना चाहिए। यदि संभव हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। ऐसा करने से आपको पूर्व जन्म में किए गए सारे बुरे कार्यों एवं पापों से मुक्ति मिल जाती है। 
  • पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन कई भक्त पूरे दिन कठोर व्रत का पालन करते हैं। यह व्रत सूर्योदय के साथ शुरू होता है और रात को चंद्रमा के दर्शन के साथ समाप्त होता है। किसी व्यक्ति द्वारा पूरी आस्था एवं सच्चे मन से पूर्णिमा व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूर्णिमा तिथि से जुडी समस्त जानकारी आपको प्रदान करने के बाद हम साल 2022 में आने वाली पूर्णिमा की तिथियां एवं मुहूर्त के बारे में जानेंगे जो नीचे दी गई है:

  1. पौष पूर्णिमा: 17 जनवरी 2022, सोमवार, प्रारम्भ : सुबह 03:18 , 17 जनवरी - समाप्त: सुबह 05:17, 18 जनवरी 
  2. माघ पूर्णिमा: 16 फरवरी 2022, बुधवार, प्रारम्भ: रात 09:42, 15 फरवरी - समाप्त: रात 0:25, 16 फरवरी
  3. फाल्गुन पूर्णिमा: 18 मार्च, 2022, बृहस्पतिवार, प्रारम्भ: दोपहर 01:29, 17 मार्च - समाप्त: दोपहर 12:47, 18 मार्च
  4. चैत्र पूर्णिमा: 16 अप्रैल  2022, शनिवार, प्रारम्भ: सुबह 02:25,16 अप्रैल - समाप्त: सुबह 12:24,17 अप्रैल
  5. वैशाख पूर्णिमा: 16 मई 2022, सोमवार, प्रारम्भ: दोपहर 12:45,15 मई - समाप्त: सुबह 09:43, 16 मई
  6. ज्येष्ठ पूर्णिमा: 14 जून 2022, मंगलवार, प्रारम्भ - दोपहर 09:02,13 जून - समाप्त: दोपहर 05:21,14 जून
  7. आषाढ़ पूर्णिमा: 13 जुलाई 2022, बुधवार, प्रारम्भ: सुबह 04:00,13 जुलाई - समाप्त - रात 12:06,14 जुलाई
  8. श्रावण पूर्णिमा: 12 अगस्त 2022, शुक्रवार, प्रारम्भ: सुबह 10:38, 11 अगस्त - समाप्त - सुबह 07:05, 11 अगस्त
  9. भाद्रपद पूर्णिमा: 10 सितम्बर, 2022, शनिवार, प्रारम्भ: शाम 06:07,09 सितम्बर - समाप्त: दोपहर 03:28 ,10 सितम्बर
  10. आश्विन पूर्णिमा: 9 अक्टूबर 2022, रविवार, प्रारम्भ: सुबह 03:41 ,09 अक्टूबर - समाप्त: सुबह 02:24 ,10 अक्टूबर
  11. कार्तिक पूर्णिमा:  8 नवम्बर 2022, मंगलवार, प्रारम्भ: शाम 04:15 ,07 नवम्बर - समाप्त: शाम 04:31,08 नवम्बर
  12. मार्गशीर्ष पूर्णिमा: 8 दिसम्बर 2022, बृहस्पतिवार, प्रारम्भ: सुबह 08:01,07 दिसम्बर  - समाप्त: सुबह 09:37,08 दिसम्बर

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✍️ By- Team Astroyogi