मोती - Pearl

वैदिक ज्योतिष में सभी राशियों के लिए रत्नों को निर्धारित किया गया है। इन रत्नों को धारण कर जातक शुभ परिणाम पाते हैं। ज्योतिष के मुताबिक हर व्यक्ति को अपने राशि अनुसार रत्न धारण करना चाहिए। जिससे जातकों इसका उचित फल मिल सके। साथ ही इसके प्रभाव से जातक अपने जीवन में सफल हो सके। इस लेख में हम ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व रखने वाले रत्न मोती के बारे में बात करेंगे। मोती कैसे बनता है? मोती का क्या ज्योतिषीय महत्व है? मोती के क्या लाभ हैं? किस राशि के जातकों को मोती धारण करना चाहिए? मोती कैसे धारण करें? तो आइये जानते हैं मोती के बारे में


मोती क्या है?

पर्ल एक कार्बनिक, सफेद से सफेद भूरे रंग का, कीमती रत्न है। इस रत्न को मॉलस्क ’नामक जीव के शरीर के अंदर उत्पादित किया जाता है। आम बोल चाल में इस जीव को घोंघा या सीप भी कहा जाता है। बाजार में मोती आठ तरह के पाए जाते हैं। जिनका नाम है अभ्र, शंख, शुक्ति मोती, सर्प, गज, बांस, शूकर और मीन मोती। परंतु वर्तमान में प्राकृतिक रूप से बने मोती के साथ ही मानव द्वारा निर्मित किये गए मोती भी बाजार में उपलब्ध हैं। क्योंकि मोती की बढ़ती मांग को देखते हुए। वर्तमान में मोती की खेती बड़ें पैमाने पर की जा रही है। जिसके चलते मोती आज बाजार में आसानी से मिल जाती है।


मोती का ज्योतिषी महत्व

यह रत्न वैदिक ज्योतिष में एक मजबूत ज्योतिषीय महत्व रखता है। मोती पहनने वाले के जन्म कुंडली में ग्रह चंद्रमा को शांत करने के लिए पहना जाता है। क्योंकि वैदिक ज्योतिष में मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। जिस भी जातक का चंद्रमा कमजोर हो उसे भी यह रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। मोती से चंद्रमा का प्रभाव बढ़ जाता है। जिससे जातक को उसके चंद्रमा का लाभ मिलता है। चंद्रमा को मन का भी कारक कहा जाता है। यदि चंद्रमा कुंडली में सही स्थान ठीक प्रभाव में न हो तो जातक का मन अशांत व भ्रमित रहता है। इसके साथ ही चंद्रमा का प्रभाव जातक के विवेव पर भी पड़ता है। बात यदि पश्चिमी ज्योतिष की करें तो इस इसमें भी मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। जून के महीने में जन्म लेने वालों लोगों को मोती धारण करने का सुझाव दिया जाता है।


मोती धारण करने के क्या लाभ हैं?

मोती अपने उच्च ज्योतिषीय महत्व, सौंदर्यशास्त्र, अद्वितीय आध्यात्मिक गुणों और उपचार क्षमताओं के लिए एक जानी जाती है। मोती का उपयोग सदियों से किसी न किसी रुप में किया जा रहा है। इस रत्न को भारत, रोम, चीन और मिस्र के प्राचीन ग्रंथों में विशेष रूप से चित्रित किया गया है। मोती को द क्वीन ऑफ जेम्स भी कहा जाता है। मोती धारण करने से तो चंद्रमा शांत व मजबूत तो होते ही हैं। साथ ही इसे धारण करने से व्यक्ति अपने क्रोध पर भी नियंत्रण रखने में सफल हो पाता है।
मोती मातृ संबंध में सुधार करता है
चंद्रमा वैदिक ज्योतिष में मां या पोषणकर्ता के साथ जुड़ा हुआ है। चंद्र रत्न धारण करने से व्यक्ति की मां के स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाता है और उनके आपसी संबंध को मजबूत करता है। साथ ही जातक मां के आदेशों का पालन करता है।
<h3>मोती के औषधिय गुण  </h3>

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, प्राकृतिक मोती पहनने से जातक को पानी से होने वाली बीमारियों से राहत मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि मोती की सकारात्मक ऊर्जा शरीर में पानी के संतुलन को उत्तेजित करती है और जिससे पहनने वाले को स्वच्छ त्वचा, चमकदार आंखें और मजबूत संचार प्रणाली हासिल करने में मदद मिलती है।


मोती किस राशि लोग धारण कर सकते हैं?

वैदिक ज्योतिष में मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है और चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। इसलिए इस रत्न को कर्क राशि के जातक धारण कर सकते हैं। पाश्च्यात ज्योतिष में भी कर्क राशि के जातक मोती धारण कर सकते हैं। इसके लिए अलावा ज्योतिषीय परामर्श पर कोई भी और किसी भी राशि के जातक मोती को धारण कर सकते हैं। परंतु धारण करने से पहले ज्योतिषीय सलाह जरूर लें। अन्यथा आपको इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके विपरित आप परेशानी पड़ सकते हैं। अभी ज्योतिषीय परामर्श के लिए यहां क्लिक करें या 9999091091 पर कॉल करें।
मोती धारण करने की विधि

मोती शीतल है। इसलिए इसे धारण के लिए सबसे उपयुक्त धातु चाँदी मानी जाती है। 8 से 15 रत्ती तक के मोती को चाँदी में ही धारण किया जाता है। इसके साथ ही आप इसे सोमवार के दिन धारण कर सकते हैं। परंतु धारण करने से पूर्व आप मोती को एक दिन पहले ही दूध, गंगाजल, शहद व चीनी के घोल में डालकर रख दें। इसके बाद ही मोती को धारण करें।




एस्ट्रो लेख

प्रभु श्री राम ...

प्रभु श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। भगवान विष्णु ने जब भी अवतार धारण किया है अधर्म पर धर्म की विजय हेतु लिया है। रामायण अगर आपने पढ़ी नहीं टेलीविज़न पर धाराव...

और पढ़ें ➜

भगवान श्री राम ...

रामायण और महाभारत महाकाव्य के रुप में भारतीय साहित्य की अहम विरासत तो हैं ही साथ ही हिंदू धर्म को मानने वालों की आस्था के लिहाज से भी ये दोनों ग्रंथ बहुत महत्वपूर्ण हैं। आम जनमानस ...

और पढ़ें ➜

वैशाख 2020 – वै...

 वैशाख भारतीय पंचांग के अनुसार वर्ष का दूसरा माह है। चैत्र पूर्णिमा के बाद आने वाली प्रतिपदा से वैसाख मास का आरंभ होता है। धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर वैशाख महीने का बहुत अधिक महत...

और पढ़ें ➜

चैत्र नवरात्रि ...

प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रे आते है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि तक चलने वाले नवरात्र चैत्र नवरात्र व वासंती नवरात्र कह...

और पढ़ें ➜